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Chandra Grahan 2018: 27 जुलाई का चंद्र ग्रहण सेहत पर क्या कर सकता है असर, जानें

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Written By: Anshumala | Updated: July 27, 2018, 12:03 PM

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27 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगने वाला है। माना जा रहा है कि यह 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा, जो 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 45 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 जुलाई की सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर होगा। इसे पूरे देश में देखा जा सकेगा। जब कभी भी चंद्र ग्रहण पड़ता है, तो लोगों को इसे लेकर मन में काफी डर, आशंकाएं और कई सवाल होते हैं। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि चंद्र या सूर्य ग्रहण को देखने से कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। खासकर प्रेगनेंसी में महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, अधिकतर लोगों की यही राय होती है। इसे देखने से आंखें खराब हो सकती हैं आदि। विज्ञान के मुताबिक, माना जाता है कि फुल मून (पूर्णिमा) सेहत पर भी कुछ न कुछ नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान लोगों को खास सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

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दिल की सेहत- 'इंडियन जर्नल ऑफ बेसिक एंड अप्लाइड मेडिकल रिसर्च' में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, पूर्ण चांद या फुल मून होने पर एक्सरसाइज जरा संभल कर करना चाहिए, क्योंकि इस समय दिल की गति बहुत तेज हो जाती है। एक्सरसाइज करते समय चांद की अवस्था जरूर देख लें। Also Read - मानसून में कौन सी सब्जियां जरूर खानी चाहिए?

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दिमाग पर असर- डच के शोधकर्ताओं की हाइपोथेसिस के अनुसार, चांद का अपना ग्रैविटेशनल खिंचाव होता है। इससे इंसान के मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है। कुछ लोगों में अनियमित व्यवहार की समस्या हो सकती है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पूर्ण चांद मिर्गी के रोगियों में अटैक की गतिविधियों को कम करने की क्षमता रखता है। शोधकर्ताओें के अनुसार, मिर्गी के दौरे की कमी चांद की अवस्था के कारण नहीं बल्कि चांद की ज्यादा रोशनी के कारण आती है। शोध में शोधकर्ताओं ने मिर्गी के कुछ मरीजों को शामिल किया। उन्हें चांद की रोशनी में रखा गया। उनमें चांज के अधिक चमकदार होने के दौरान मिर्गी के दौरे कम पड़े।

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किडनी में स्टोन हो तब- 'जर्नल ऑफ यूरोलॉजी' में प्रकाशित एक स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार, जिन्हें किडनी में स्टोन की शिकायत होती है, उन्हें पूर्ण चांद के दौरान अधिक दर्द महसूस हो सकता है। कई बार फुल मून के दौरान यूरोलॉजिकल समस्या के कारण अधिक मरीज हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। दरअसल, पूर्ण चांद के दौरान शरीर के कई अंगों के कार्य भी प्रभावित होते हैं। हालांकि, इस बात पर कई शोधकर्ताओं की राय अलग है, कुछ ने तो असहमति भी जताई है। Also Read - हार्मोनल इम्बैलेंस और हेयर फॉल के बीच क्या कनेक्शन है? कैसे रखें अपने बालों को हेल्दी?

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नींद होती है प्रभावित- 'करेंट बायोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, इस अध्ययन में तीन दिनों तक लोगों की नींद के पैटर्न की जांच की गई। लोगों को ऐसे वातावारण में सोने के लिए कहा गया, जहां न कोई घड़ी थी और न बाहर की कोई रोशनी। लोगों के नींद के इस डाटा को चांद की अवस्था के साथ मिलाकर देखा गया। परिणाम में यह बात सामने आई कि चांद के ज्यादा चमकदार होने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर कम होता है। साथ ही लोगों को सोने में 5-7 मिनट का समय भी अधिक लगा, बल्कि अन्य दिनों के मुकाबले लोग 20 मिनट कम सोए, जिससे उनकी सेहत भी खराब हुई।

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बच्चों का जन्म होता है ज्यादा- जापान के शोधकर्ताओं ने अपने एक शोध में कहा है कि जब धरती पर चांद की ग्रैविटेशनल फोर्स सबसे ज्यादा पावरफुल होती है, तो उस स्थिति में बच्चों का जन्म अधिक होता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि ऐसा क्यों होता है इसके कारण वे नहीं जान पाए हैं। इटली में हुए एक अध्ययन पर नजर डालें तो यह पता चला है कि तीन वर्ष से अधिक समय में सिर्फ 1,200 बच्चों का जन्म हुआ, जबकि पूर्ण चांद के अगले दो दिनों में इससे भी ज्यादा बच्चों का जन्म हुआ। Also Read - कार्डियोथोरेसिक ऑपरेशन के बाद मरीज को किन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए?

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चोट लगती है अधिक- माना जाता है कि पूर्ण चंद्र के दौरान एक्सीडेंट और बीमार होने की संभावना रहती है। 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ सर्जरी' में प्रकाशित एक स्टडी में यह बात सामने आई थी कि पूर्ण चांद के दौरान लोगों में बीमारी और इमरजेंसी कॉल 3 फीसदी तक बढ़ जाती है, जबकि नए चांद के समय इन हेल्थ इमरजेंसी कॉल में 6 फीसदी की कमी आ जाती है।

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पीरियड्स पर असर- पीरियड्स की साइकिल आमतौर पर 28 दिन की होती है। ये लूनर साइकिल के समान ही होती है, जो 29 या इससे ज्यादा दिन की होती है। चीन के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कहा है कि लगभग 30 फीसदी महिलाओं में पूर्ण चंद्र के दौरान ओव्यूलेशन शुरू होता है। ओव्यूलेशन के दौरान गर्भाशय के अंडों का आकार विकसित होता है, जिससे गर्भ ठहरता है। वहीं नए चांद के समय मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। भारत में आमतौर पर लोगों की यही राय होती है कि गर्भवती महिलाओं को किसी भी तरह के ग्रहण काल में घर के अंदर ही रहना चाहिए। लोग सोचते हैं कि ग्रहण की नकारात्मक किरणें महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। Also Read - 20 की उम्र में ही कमजोर हो रही है महिलाओं की ओवरी, जानें क्यों बढ़ रहे हैं मामले