मकर संक्रांति के दिन मिथिला में खाया जाता है दही-चूड़ा, स्वाद ही नहीं सेहत का राज है ये पारंपरिक खाना

Dahi chura Is Eaten in Bihar on the occasion of Makar Sankranti: मकर संक्रांति के खास मौके पर पूरे देश में तिल-गुड़ और खिचड़ी खाई जाती है। लेकिन हमारे देश में एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही- चूड़ा खाया जाता है।

Written by Ashu Kumar Das | Published : January 12, 2026 3:59 PM IST

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मकर संक्रांति पर क्यों खाया जाता है?

Dahi chura Is Eaten in Bihar on the occasion of Makar Sankranti: भारत के हर हिस्से में मकर संक्रांति का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है।मकर संक्रांति के खास दिन तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, पूरन पोली, गजक और उंधियू जैसे पकवान बहुत ही चाव से खाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल- गुड़ तो हर हिस्से में खाया जाता है। लेकिन भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही- चूड़ा खाया जाता है।

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मिथिला में मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है दही- चूड़ा

ये हिस्सा है मिथिला। मैं खुद मिथिला से हूं और मेरे घर में हर साल मकर संक्रांति के दिन दही- चूड़ा जरूर खाया जाता है। मिथिला में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ उत्सव है। इस दिन सबसे विशेष रूप से दही-चूड़ा खाया (Dahi- Chura Khane ke Fayde) ही जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को हिंदू धर्म में शुद्ध और सात्विक माना गया है। वहीं, चावल को अन्न का राजा कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सात्विक भोजन करने का विधान है। इसलिए मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा खाया जाता है।  Also Read - भारत में अभी भी कई बच्चे कैंसर अस्पतालों देर से क्यों पहुंचते हैं? कैसे थोड़ी जागरूकता बच्चे की जान बचा सकती है

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दही -चूड़ा खाने के फायदे

आयुर्वेद के अनुसार, चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और दही शरीर में गर्मी को बनाए रखता है। मकर संक्रांति का त्योहार सर्दियों में मनाया जाता है। दही- चूड़ा को एक साथ खाने से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म बनाए रखने में मदद मिलती है। ये कॉम्बो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत अंदर से देता है।

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पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च बताती है कि दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स होते हैं। दही खाने से पेट में गुड़ बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे कब्ज, गैस और अपच की परेशानी दूर होती है। वहीं, चूड़ा पचाने में आसान होता है। जब आप दही और चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो इससे मल नरम होता है। इससे सुबह पेट अच्छे से साफ होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनती है। Also Read - कंडोम का यूज करने से नहीं होती है एलर्जी, Condom Day पर जानें इससे जुड़े 4 Myths के Facts

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दही- चूड़ा इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है

दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के खास मौके पर दही- चूड़ा खाने से शरीर की सर्दी में कम होने वाली इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या घटती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हैं, उन्हें मकर संक्रांति के दिन दोपहर के खाने में दही- चूड़ा जरूर खाना चाहिए।

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हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद

दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है। जबकि चूड़ा आयरन, फाइबर व प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। जब आप दही- चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो ये शरीर की हड्डियों और दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। Also Read - कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल? हो सकती है Vitamin B12 की कमी! तुरंत खाना शुरू कर दें ये 5 सब्जियां

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शरीर को मिलती है एनर्जी

मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग सुबह जल्दी स्नान आदि करके पूजा, पाठ और दान करते हैं। इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। खाने के बाद दही- चूड़ा तुरंत ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे शरीर को ताजगी व एनर्जी मिलती है।

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मकर संक्रांति के दिन कब खाएं दही- चूड़ा

परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा नाश्ते में तिलकुट, गुड़, सब्जी, अचार और चटनी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग दोपहर के खाने में भी दही चूड़ा खाते हैं। आप अपनी सुविधा के हिसाब से मकर संक्रांति के दिन दही- चूड़ा खा सकते हैं। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में दही -चूड़ा रात को बिल्कुल न खाएं। Also Read - पुरुषों में यूरिक एसिड कितना होना चाहिए? जानें High Uric Acid के लक्षण और कारण

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निष्कर्ष

मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि धर्म, विज्ञान, स्वास्थ्य और संस्कृति का सुंदर संगम है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि पारंपरिक और स्थानीय खाना ही स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत फायदेमंद होता है।