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डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा! खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये 4 टिप्स

मानसून में डेंगू और मलेरिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ टिप्स जरूर फॉलो करें। इनसे मच्छरों से बचाव होगा और डेंगू-मलेरिया का खतरा भी काफी कम हो जाएगा।

Written By Anju Rawat
Published : July 7, 2026 3:27 PM IST

डेंगू-मलेरिया से बचने के लिए क्या करें?

बारिश के मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के साथ ही मच्छर भी तेजी से पनपते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में मच्छरजनित रोग जैसे- डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। आपको बता दें कि डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छर और मलेरिया एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द और कमजोरी डेंगू-मलेरिया के आम लक्षण हो सकते हैं। वैसे तो डेंगू-मलेरिया सालभर में कभी भी हो सकते हैं। लेकिन, मानसून में इनका खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए डेंगू-मलेरिया से खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।

1. मच्छरों को पनपने न दें

मानसून में डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए घर या उसके आस-पास बिल्कुल पानी जमा न होने दें। बाल्टी, टब, कूलर, टंकी और गमलों की नियमित रूप से सफाई करें। पानी के बर्तनों को ढककर रखें, इससे मच्छरों को पनपने के लिए जगह नहीं मिलेगी और आप डेंगू-मलेरिया से सुरक्षित रह सकते हैं।

2. फुल स्लीव्स के कपड़े पहनें

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मानसून में डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए आपको फुल स्लीव्स के कपड़े पहनने चाहिए। शरीर को भी पूरी तरह से ढककर रखें। इससे मच्छर नहीं काट पाएंगे और मच्छरजनित बीमारियों से बचाव होगा।

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3. मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स यूज करें

डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए घर में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। खासकर, बच्चों और बुजुर्गों को मच्छरदानी के भीतर ही सुलाएं। मॉस्किटो रिपेलेंट का भी इस्तेमाल करें। इससे मच्छरों के काटने का खतरा काफी कम हो सकता है और डेंगू-मलेरिया से बचाव हो सकता है।

4. दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाएं

मच्छर दरवाजों और खिड़कियों से भी घर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए आपको दरवाजों और खिड़कियों पर जाली जरूर लगानी चाहिए। इससे मच्छरों के घर के अंदर आने की संभावना कम हो जाएगी और डेंगू-मलेरिया का खतरा भी काफी कम हो सकता है।

इन लक्षणों की न करें अनदेखी

WHO के अनुसार, लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी और पेट में तेज दर्द जैसे लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें और जांच कराएं।