कर्नाटक में पिछले तीन साल में 41 हजार बच्चों को जन्मजात हृदय रोग, जानें इसके पीछे के कारण और गंभीरता

Congenital Heart Disease: कर्नाटक में बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के मामलों में वृद्धि देखने को मिले हैं। जानें, क्या है यह बीमारी?

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Written By: Anju Rawat | Updated: September 28, 2025, 5:27 PM

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Medically Verified By: Dr. Binay Kumar

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कर्नाटक में 41 हजार बच्चों को जन्मजात हृदय रोग

कर्नाटक में पिछले 3 सालों में जन्मजात हृदय रोगों के मामलों में काफी वृद्धि देखने को मिली है। आपको बता दें कि राज्य में पिछले तीन सालों में लगभग 41 हजार बच्चों में जन्मजात हृदय रोग का निदान हुआ है। इन सभी मामलों की पहचान स्कूली बच्चों में हुई हैं। वैसे तो, कई बच्चों को जन्मजात हृदय रोग होता है, लेकिन ये आंकडे चौंकाने वाले हैं। दरअसल, ये मामले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सामने आए थे। जब जन्म से पहले हृदय के विकास में कोई समस्या आती है, तो यही जन्मजात हृदय रोग होता है। इसकी समय पर पहचान करना बहुत जरूरी है। दरअसल, हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) मनाया जाता है। आइए, यर्थाथ सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. बिनय कुमार से जानते हैं जन्मजात हृदय रोग के बारे में विस्तार से-

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जन्मजात हृदय रोग क्या है?

जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जन्म से पहले ही हृदय की रक्त वाहिकाओं का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता है। आपको बता दें कि जन्मजात हृदय रोग, हृदय की संरचना से जुड़ी एक समस्या है। यह रोग किसी बच्चे में, जन्म से ही मौजूद होती है। जन्मजात हृदय रोग, रक्त के सामान्य प्रवाह को रोकते हैं। ऐसा दिल की दीवार में छेद, खून ले जाने वाली नसों की असामान्यता या दिल के वाल्व की खराबी के रूप में हो सकता है। Also Read - अगर छवें महीने में डिलीवरी हुई तो क्या होगा? जानिए प्रीमैच्योर बेबी के सर्वाइवल रेट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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जन्मजात हृदय रोग की पहचान कैसे करें?

बार-बार सांस फूलना, बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दिक्कत होना, वजन बढ़ना आदि जन्मजात हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा, छाती में बार-बार इंफेक्शन भी जन्मजात हृदय रोगों की वजह से हो सकता है। जन्मजात हृदय रोगों की वजह से थकान और कमजोरी हो सकती है। नाखूनों का रंग पीला पड़ सकता है। जब किसी बच्चे में ये लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर हृदय रोगों का पता लगाने के लिए कार्डियोग्राफी, ईसीजी और पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग करते हैं।

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क्यों बढ़ रहे हैं जन्मजात हृदय रोग के मामले?

जन्मजात हृदय रोग एक जानलेवा बीमारी है। लेकिन, अब कई ऐसी दवाइयां मौजूद हैं, जिनकी मदद से जन्मजात हृदय रोगों वाले बच्चों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि, जन्मजात हृदय रोगों के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। अगर किसी महिला को डायबिटीज और थायराइड है, तो उनके बच्चों में जन्मजात हृदय रोग का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, अगर प्रेग्नेंसी में संक्रमण की वजह से भी यह बीमारी हो सकती है।  Also Read - Diabetes, HPV Vaccine और PCOS के बारे में कितना जानते हैं आप? World Health Day

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क्या जन्मजात हृदय रोग से बचाव संभव है?

आपको बता दें कि जन्मजात हृदय रोगों से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है। लेकिन, इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। जन्मजात हृदय रोगों का जोखिम कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं को अपना रेगुलर चेकअप जरूर करवाना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान बैलेंस डाइट लें। अपनी डाइट में विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फूड्स शामिल करें। प्रेग्नेंसी के समय पर धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से परहेज करें। इतना ही नहीं, गर्भधारण से पहले रूबेला का टीका भी जरूर लगवाएं। प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियों को कंट्रोल में रखें।

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जन्मजात हृदय रोग का इलाज क्या है?

जन्मजात हृदय रोग का इलाज दोष की गंभीरता के आधार पर होता है। कुछ मामलों में जन्मजात हृदय रोग का इलाज दवाइयों से हो जाता है। वहीं, कुछ बच्चों को कैथेटर या सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं, अगर समय पर जन्मजात हृदय रोगों का इलाज न किया जाए, तो इस स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। रोगी को कौन-सा इलाज देना है, यह डॉक्टर द्वारा निर्धारित किया जाता है। Also Read - लोक नायक अस्पताल में बच्चों के हार्ट का इलाज: जानें पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग की सुविधाएं और बच्चों के लिए अपॉइंटमेंट लेने का तरीका

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