क्या पीरियड्स में ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं? जानिए क्या करें और क्या नहीं

periods main breathing exercises karna chahiye ya nahi: कई लोगों को कन्फ्यूजन रहती है ​कि पीरियड्स के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं! आज हम जानेंगे कि आखिर कौन सी ब्रीदिंग एक्सरसाइज breathing exercises करना फायदेमंद होता है।

Written by Rahul Sharma | Published : July 17, 2025 2:27 PM IST

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क्या पीरियड्स के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते है?

पीरियड्स के दौरान महिलाओं में शारीरिक बदलाव होने के साथ साथ मानसिक बदलाव भी होता है। वैसे तो हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है लेकिन ज्यादातर महिलाएं इस दौरान पेट में दर्द, ऐंठन, सिर में दर्द, मूड में बदलाव और भूख में कमी का अनुभव करती है। ऐसे में इन्हें कम करने के लिए क्या करना सही रहेगा? क्या इसके लिए महिलाओं को दवाओं लेनी चाहिए या डॉक्टर के पास जाना चाहिए? नहीं! आप केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज के दम पर भी पीरियड्स के दर्द को कम कर सकते हैं। हालांकि कई लोगों को कन्फ्यूजन रहती है कि मासिक धर्म के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं! आज हम आपको बताएंगे कि मासिक धर्म के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं साथ ही हम इसके फायदे के बारे में भी जानेंगे।

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पीरियड्स में ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं?

पीरियड्स के दौरान सांस लेने वाले व्यायाम करना सेहत के लिए जितना जरूरी होता है उतना ही मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। कै्म्प्स और तनाव को कम करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना सबसे बेस्ट विकल्प होता है। आइए जानते हैं कौन सी ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना सबसे फायदेमंद होता है।  Also Read - चिंता, तनाव और अनिद्रा से राहत दिलाता है सांस लेने का सही तरीका, जानिए लंबी गहरी सांस लेने के फायदे

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1. अनुलोम-विलोम प्राणायाम है फायदेमंद

मासिक धर्म यान कि पीरियड्स के दौरान तनाव होना आम बात है। आपको बता दें कि पीरियड्स के दौरान अनुलोम-विलोम करने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। साथ ही, अनुलोम-विलोम का नियमित रूप से अभ्यास करना हमारे ब्लड प्रेशर के लिए प्रभावी है। प्राणायाम को करने के लिए हमें नाक से बारी-बारी सांस लेना होता है। इस प्रक्रिया को करने के लिए कम से कम 15 मिनट तक अभ्यास जरूर करें।

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2. शीतकारी प्राणायाम है लाभकारी

पीरियड्स के समय महिलाओं को पेट में ऐंठन और एंग्जाइटी बहुत होती है। ऐसे में, शीतकारी प्राणायाम करना उनके लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि इसका अभ्यास शरीर को ठंडा रखने के साथ ऐंठन को कम करता है। इस प्राणायाम को गर्मियों में करना फायदेमंद रहता है। शीतकारी व्यायाम करने के लिए हमें जीभ को बाहर निकालकर नली की तरह आकार देना है। फिर दांतों को हल्का सा खोलकर सांस लेने के साथ मुंह बंद करके नाक से सांस छोड़ना है।  Also Read - बेचैनी और घबराहट से तुरंत राहत दिलाते हैं ये 2 योगासन, जानें फायदे और करने का तरीका

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3. उज्जायी प्राणायाम भी कर सकते हैं

पीरियड्स के दर्द को कम करने के लिए उज्जायी प्राणायाम करना लाभकारी माना जाता है। पीरियड्स में ज्यादातर महिलाएं मूड स्विंगस की वजह से परेशान रहती हैं। इस समस्या से बचाव के लिए उज्जायी प्राणायाम करना फायदेमंद होता है क्योंकि यह शांत और आरामदायक होता है। साथ ही, इसका अभ्यास मूड को बेहतर करता है। उज्जायी प्राणायाम को करने के लिए हमें गले को हल्का सा संकुचित करके सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को लगातार करना है। जिससे एक हल्की सी हम्म जैसी आवाज उत्पन्न होती है।

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4. भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास है जरूरी

पीरियड्स के समय महिलाओं में तनाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे में, भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास मानसिक रूप से चिंता को कम करता है। इस प्राणायाम का अभ्यास हमारे एकाग्रता में सुधार कर सकता है। भ्रामरी प्राणायम करने के लिए हमें शांत जगह बैठकर अपनी आंखें बंद करनी है और उंगलियों से अपने कानों को धीरे से बंद करना है। फिर, नाक से सांस लें और सांस छोड़ते हुए ऊं की आवाज निकालनी है। जैसे कि एक भौंरा गुनगुना रहा हो।  Also Read - 2 मिनट की ये एक्सरसाइज आपके दिमाग की 'गंदगी' को कर देगी साफ, भरोसा न हो तो कर के देखिये

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5. पीरियड्स में कपालभाति प्राणायाम नहीं कर सकते

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए कपालभाति का अभ्यास करना नुकसानदायक माना जाता है। इसे करने से हमारे पेट पर जोर पड़ता है जिससे पेट की ऐंठन बढ़ सकती है। इसलिए इस दौरान कपालभाति नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि कपालभाति के समय पेट को अंदर और बाहर तेजी से किया जाता है, जिससे पेट की मांसपेशियों पर जोर पड़ने के साथ पेट में दर्द, ऐंठन, या अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।