क्या चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है?

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can chicken cause food poisoning: क्या चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग का खतरा होता है? इस सवाल का जवाब दे रही हैं डाइटिशियन प्रांजल कुमत।

Written by Ashu Kumar Das | Published : December 28, 2025 1:53 PM IST

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क्या चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है?

सर्दियों का मौसम आते ही भारत में चिकन खाने वालों की डिमांड तेजी से बढ़ती है। चिकन सर्दी के मौसम में शरीर को गर्म रखता है। चिकन में हाई प्रोटीन होता है, जो  मांसपेशियों की मजबूती देता है। लेकिन सर्दियों में चिकन खाने से पहले ज्यादातर लोग ये सवाल करते हैं कि क्या चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग होती है? अगर हां तो किन परिस्थितियों में चिकन फूड प्वाइजनिंग (Kya Chicken khane se Food Poisoning ho Sakti hai) का कारण बन सकता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब जयपुर स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डाइटिशियन प्राजंल कुमत से।

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फूड प्वाइजनिंग क्या है?

यूएस मेडिकल रिसर्च सेंटर की रिसर्च के अनुसार, फूड प्वाइजनिंग एक ऐसी स्थिति है, जिसमें खराब, दूषित या बैक्टीरिया से संक्रमित खाना खाने से व्यक्ति बीमार हो जाता है। फूड प्वाइजनिंग के कारण बुखार, दस्त, उल्टी और जी मिचलाने की समस्या होती है। फूड प्वाइजनिंग ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण हल्के से गंभीर तक हो सकते हैं। खासकर जब बात बच्चों, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वालों की हो तो फूड प्वाइजनिंग तेजी से होता है। Also Read - क्या सिर्फ मोटे लोगों को ही हाइपरटेंशन होता है?

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क्या चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डाइटिशियन प्राजंल कुमत बताती हैं कि हां चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है। लेकिन चिकन खाने से किसी भी व्यक्ति को फूड प्वाइजनिंग तब होता है, जब चिकन को पकाने से पहले सही तरह से साफ न किया गया हो। कुछ मामलों में अधा पका चिकन या लंबे समय तक काटकर रखे हुए चिकन को खाने से भी फूड प्वाइजनिंग की परेशानी हो सकती है।

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चिकन फूड प्वाइजनिंग का मुख्य कारण क्या है?

एक्सपर्ट का कहना है कि कच्चे चिकन को खाने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या ज्यादा देखी जाती है। दरअसल, जब चिकन को काटा जाता है, तो उसमें कई बैक्टीरिया जिंदा रह जाते हैं। इस बैक्टीरिया का मेडिकल नाम है- कैम्पिलोबैक्टर। ऐसे में इसे पकाने में थोड़ी सी लापरवाही की जाए तो ये कच्चा रह जाता है। कच्चे चिकन में बैक्टीरिया जिंदा ही रहते हैं, जब हम इसे खाते हैं तो फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ता है। Also Read - बच्चे को बार-बार हो जाता है इंफेक्शन? ये 5 टिप्स आएंगे बेहद काम, घर पर जरूर अपनाएं

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चिकन के कारण होने वाले फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

अगर किसी व्यक्ति को चिकन खाने के कारण फूड प्वाइजनिंग की समस्या हुई है, तो इसके लक्षण चिकन खाने के 6 घंटे से 72 घंटे के भीतर दिखाई देते हैं। चिकन खाने के कारण होने वाले फूड प्वाइजनिंग में पेट दर्द और ऐंठन, उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और शारीरिक दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं। वहीं, चिकन के कारण होने वाली फूड प्वाइजनिंग गंभीर है, तो लगातार पानी जैसे दस्त, खून की उल्टी या दस्त, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और सिर में दर्द की परेशानी देखी जाती है।

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चिकन से होने वाली फूड प्वाइजनिंग से बचाव कैसे करें

चिकन के कारण आपको फूड प्वाइजनिंग की समस्या न हो, इसके लिए चिकन को अच्छे से खाएं। जब तक चिकन का रंग बिल्कुल सफेद न हो जाए और उसके अंदर का गुलाबी रंग साफ न हो, तब तक चिकन को धोना बहुत जरूरी है। चिकन को पकाते समय भी पूरी तरह से ध्यान दें। चिकन को तेल, प्याज और मसालों में तब तक पकाए, जब तक की चिकन अंदर तक न पक जाए। चिकन के अंदर तक पकने की निशानी हड्डी छोड़ना है। कभी भी ग्रिल्ड या तवे पर पका हुआ चिकन बिल्कुल न खाएं। ग्रिल और तवे पर पका हुआ चिकन कच्चा रह जाता है। इसके कारण फूड प्वाइजनिंग की समस्या देखी जाती है। Also Read - क्या थायराड की समस्या आपके बच्चे की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है? डॉक्टर से समझें

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चिकन स्टोर करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

एक्सपर्ट का कहना है कि फूड प्वाइजनिंग से बचाव के लिए चिकन को फ्रिज में स्टोर करते हुए भी कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चिकन को हमेशा 4 डिग्री सेल्सियस पर ही फ्रिज में रखें। चिकन को स्टोर करते समय उसे किसी एयर टाइट कंटेनर में ही रखें। किसी भी परिस्थिति में खुले बर्तनों में चिकन को स्टोर बिल्कुल न करें।

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चिकन से होने वाली फूड प्वाइजनिंग से कैसे बचें?

अगर आपको चिकन खाने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या हुई है, तो सबसे पहले इस बारे में डॉक्टर को बताएं। फूड प्वाइजनिंग के लक्षण हल्के हैं, तो इससे राहत पाने के लिए खूब सारा पानी पिएं। ओआरएस पिएं, हल्का और सादा खाना खाएं। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक लेने से बचें। फूड प्वाइजनिंग के लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर से बात करके ही दवा का सेवन करें।  Also Read - 3-5 साल की उम्र के बच्चों के बिहेवियर में कौन से बदलाव आते हैं, जिन्हें संभालना जरूरी होता है?