हैप्पी हार्मोन्स को कैसे बढ़ाएं? जानिए हमेशा आनंदित रहने के नेचुरल उपाय

अगर आप भी खुशहाल जीवन जीने की चाहत रखते हैं तो आपके न्यूरोट्रांसमीटर या हार्मोन संतुलित होना आवश्यक है।

Written by Atul Modi | Published : January 23, 2024 8:37 PM IST

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खुश रहने के नेचुरल उपाय

जिंदगी में हर एक शख्स खुश रहना चाहता है। खुशी और संतुष्टि के लिए हम क्या कुछ नहीं करते। लेकिन आपकी खुशियों की पोटली में संतुलित हैप्पी हार्माेन्स का होना जरूर है। इनके बिना खुशियां महसूस होना थोड़ा मुश्किल काम है। अगर आप भी खुशहाल जीवन जीने की चाहत रखते हैं तो आपके न्यूरोट्रांसमीटर या हार्मोन संतुलित होना आवश्यक है। ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे हार्मोन हमारी खुशियों के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आप भी मूड स्विंग, चिड़चिड़ेपन, हताशा, निराशा के दौर गुजर रहे हैं तो हो सकता है कि आपके इन हैप्पी हार्माेंस का संतुलन कुछ बिगड़ गया है। हालांकि कुछ तरीके अपनाकर आप इन्हें स्वभाविक रूप से संतुलित कर सकते हैं।

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डोपामाइन करता है याददाश्त तेज

डोपामाइन एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है। यह मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों के बीच रासायनिक संदेश भेजने का काम करता है। यह स्मृति तेज बनाने, सीखना, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने आदि के लिए आवश्यक है। इस हार्मोन की मदद से आप अपने लक्षय को प्राप्त करने के लिए फोकस रह पाते हैं। यह आपमें हमेशा आगे बढ़ने का जुनून जगाएगा। शरीर में इस महत्वपूर्ण हार्मोन को बढ़ाना बेहद आसान है। इसके लिए आप नियमित रूप से अच्छा संगीत सुनें, पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें। सबसे जरूरी है पर्याप्त नींद लें। Also Read - बच्चों के लंच में गलती से भी पैक नहीं की जानी चाहिए ये 5 चीजें, ऐसा करके खुद कर रहे बीमार

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एंडोर्फिन से दर्द होते हैं दूर

एंडोर्फिन एक प्राकृतिक दर्द निवारक है। यह मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में भी मदद करता है। एंडोर्फिन को ‘हैप्पी हार्मोन’ के रूप में भी जाना जाता है। एंडोर्फिन हमारे शरीर में दर्द संकेतों को कम करने में मदद करता है। यह खुशी और संतुष्टि की भावनाओं का अनुभव करने में भी मदद करता है। इस हार्मोन का स्तर बढ़ाने के लिए आप नियमित रूप से व्यायाम करें। मेडिटेशन, योग, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद से यह हार्मोन अधिक बनता है।

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सामाजिक व्यवहार बढ़ाता है ऑक्सीटोसिन

ऑक्सीटोसिन हार्मोन एक स्तनधारी हार्मोन है जो मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों में पाया जाता है। यह सीधे तौर पर प्रसव, स्तनपान और सेक्स से जुड़ा होता है। ऑक्सीटोसिन गर्भाशय के संकुचन को प्रेरित करता है जो प्रसव में मदद करता है। यह स्तनपान के दौरान भी दूध के स्राव को उत्तेजित करता है। यह हार्मोन सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देता है। विश्वास, स्नेह और निष्ठा की भावनाओं को मजबूत करने में मदद करता है। ऑक्सीटोसिन तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है। व्यायाम ऑक्सीटोसिन के स्तर को बढ़ाने में मददगार है। अपनों के साथ समय बिताकर, योग, मेडिटेशन और अच्छी नींद से भी इस हार्मोन का स्तर बढ़ता है। Also Read - Gas After Eating: खाना खाने के बाद तुरंत बाद गैस होने लगती है, तो पिएं ये 4 होममेड ड्रिंक्स

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मूड स्विंग से बचाएगा सेरोटोनिन

अगर आपका मूड भी पल-पल में बदलता है तो यह तय है कि आपमें सेरोटोनिन हार्मोन की कमी है। यह ‘हैप्पी हार्मोन’ आपके मूड को बेहतर बनाता है, याददाश्त तेज करता है, अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। साथ ही आपकी शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है। इसकी कमी से आपका पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। प्रकृति में घूमकर, पर्याप्त नींद लेकर, ध्यान लगाकर आप इस हार्मोन का स्तर बढ़ा सकते हैं।