शरीफा खिलाकर बच्चों को बनाएं हेल्दी और स्मार्ट! 5 फायदे जो आपको चौंका देंगे

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Benefits of feeding custard apple to children : जब बच्चे शरीफा खाते हैं तो इससे उनके शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। इससे सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम की समस्या (Baccho Ko Sitaphal Khilane Ke Fayde) दूर होती है।

Written by Ashu Kumar Das | Published : January 7, 2026 8:06 AM IST

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बच्चों को सीताफल (शरीफा) खिलाने के फायदे

Benefits of feeding custard apple to children : आप अपने बच्चों की इम्यूनिटी को स्ट्रांग, दांतों और हड्डियों को मजबूत व वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो उसकी डाइट में सीताफल यानी की शरीफा को जरूर शामिल करें। शरीफा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,डायटरी फाइबर, विटामिन सी, विटामिन B6, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन पाया जाता है। जब बच्चे शरीफा खाते हैं तो इससे उनके शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। इससे सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम की समस्या दूर होती है। ऐसे में शरीफ को सुपर फूड कहा जाए तो ये बिल्कुल गलत नहीं होगा। अब देर किस बात की है आइए जानते हैं बच्चों को शरीफा (Baccho Ko Sitafal Khane Ke Fayde ) खिलाने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं।

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शारीरिक विकास तेजी से होता है

डाइटिशियन प्रांजल कुमत का कहना है कि शरीफा एक मौसमी फल है, जो मुख्य रूप से सर्दियों की शुरुआत में बाजार में पाया जाता है। शरीफा का गूदा सफेद, नरम और क्रीमी होता है, जिसमें काले बीज होते हैं। यह फल ऊर्जा, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है। सीताफल स्वाद में मीठा, मुलायम और खुशबूदार होता है। इसलिए ये फल बच्चों के साथ- साथ बुजुर्गों को भी काफी पसंद आता है। बढ़ते बच्चों को शरीफा खिलाने से उन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। शरीफा में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स बच्चों के शारीरिक विकास को सपोर्ट करते हैं और उन्हें एक्टिव बनाए रखते हैं। Also Read - बच्चे को बार-बार हो जाता है इंफेक्शन? ये 5 टिप्स आएंगे बेहद काम, घर पर जरूर अपनाएं

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कब्ज और पाचन करता है ठीक

शरीफा में हाई फाइबर होता है। अगर बच्चा कब्ज से परेशान रहता है, तो सीमित मात्रा में शरीफा देना फायदेमंद हो सकता है। डाइटिशियन बताती हैं कि शरीफा का नरम गूदा मल को मुलायम बनाता है और पेट साफ करने में मदद करता है। जिन बच्चों की मल त्याग की प्रक्रिया सही रहती है, उन्हें पाचन से जुड़ी परेशानी नहीं होती है।

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वजन बढ़ाता है

जिन बच्चों का वजन उम्र के हिसाब से कम है, उनके लिए शरीफा बहुत अच्छा ऑप्शन है। शरीफा में मौजूद नेचुरल शुगर और कैलोरी बच्चों का वजन हेल्दी तरीके से बढ़ाने में मदद करता है। दोपहर के समय बच्चों को शरीफा खिलाया जाए तो इससे वजन तेजी से बढ़ता है। वजन बढ़ाने के लिए 1 दिन में 1 बड़ा पीस शरीफा से ज्यादा खाने के लिए बिल्कुल न दें। बच्चों के लिए सीमित मात्रा में ही शरीफा खाना फायदेमंद होता है। Also Read - क्या थायराड की समस्या आपके बच्चे की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है? डॉक्टर से समझें

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दिमागी विकास करता है बेहतर

कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि शरीफा में पाया जाने वाला विटामिन B6 बच्चों के ब्रेन डेवलपमेंट के लिए बेहद जरूरी होता है। यह न्यूरोट्रांसमीटर को बेहतर बनाता है। बच्चों को शरीफा खिलाने से याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता में सुधार होता है। बच्चों को रोजाना शरीफा खिलाने से उनके चीजों को याद रखने की क्षमता तेज होती है।

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आंखों की क्षमता में सुधार

घंटों तक मोबाइल और टीवी स्क्रीन देखने के कारण बच्चों को कम उम्र में ही आंखों से जुड़ी बीमारियां हो रही हैं। आंखों की बीमारियों को दूर रखने में भी शरीफा अच्छा होता है। शरीफा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट बच्चों को कम उम्र से ही शरीफा खिलाने की सलाह देते हैं।  Also Read - 3-5 साल की उम्र के बच्चों के बिहेवियर में कौन से बदलाव आते हैं, जिन्हें संभालना जरूरी होता है?

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हड्डी और दांतों को रखें मजबूत

सीताफल में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो बच्चों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

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बच्चों को शरीफा खिलाने का सही तरीका

जो पेरेंट्स बच्चों को पहली बार शरीफा खिला रहे हैं, वो इसे अच्छी तरह मैश करके ही बच्चों को दें। शरीफा में बहुत सारे बीज होते हैं, इसलिए सारे बीजों को निकालने के बाद ही बच्चों को खाने के लिए दें। शुरुआत में बच्चों को 2–3 चम्मच से ज्यादा शरीफा न दें। बच्चे को शरीफा का स्वाद पसंद आता है तब भी 1 दिन में बच्चों को 1 बड़ा पीस शरीफा से ज्यादा न दें। Also Read - हेल्दी समझकर खा रहे हैं? ये 5 प्रोटीन सोर्स बन सकते हैं बीमारी की वजह

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किस उम्र के बच्चों को सीताफल दे सकते हैं?

एक्सपर्ट का कहना है कि 1 साल से ऊपर के बच्चों को सीमित मात्रा में शरीफा दिया जा सकता है। 6 महीने के बाद जब बच्चों को सॉलिड फूड खिलाने की शुरुआत की जाती है, तब उन्हें शरीफा खिलाने से बचना चाहिए। ध्यान दें कि हर बच्चे का शरीर अलग होता है, इसलिए पहली बार उन्हें शरीफा खिलाते समय एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।