छोटे बच्चों को डेंगू हो जाए तो पेरेंट्स तुरंत करें ये 5 काम, जल्दी रिकवर होगा बच्चा

Dengue Se Bachav Ke Liye kya kare - छोटे बच्चों को अगर डेंगू हो जाए तो पेरेंट्स को तुरंत गंभीर हो जाना चाहिए। आइए, जानते हैं कि डेंगू की पुष्टि होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए -

Written by Rahul Sharma | Published : July 16, 2025 10:15 AM IST

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मानसून में ही क्यों होता है डेंगू?

मानसून के मौसम में बच्चों में सबसे ज्यादा डेंगू फैलने के चांस रहते हैं। क्योंकि बच्चे जहां तहां खेलते हैं और खुद का बचाव करने में अक्षम होते हैं। ऐसे में अगर डॉक्टर बच्चे में डेंगू की पुष्टि करते हैं तो आपको दवाओं के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज हम विस्तार में समझेंगे कि डेंगू बुखार क्या होता है बच्चों में इसके लक्षण कैसे दिखते हैं और पेरेंट्स को डेंगू कन्फर्म होने के बाद क्या करना चाहिए।

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क्या होता है डेंगू बुखार?

डेंगू बुखार एक मच्छर जनित बीमारी है, जो एडिज मच्छर के काटने से फैल ती है। इस मच्छर के काटने के बाद यह वायरस आपके रक्त में प्रवेश करता है, जिससे डेंगू के लक्षण दिखने लगते हैं। एडिज मच्छर के काटने से पूरा शरीर थका हुआ और अकड़ जाता है जिसके कारण इसे हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है।  Also Read - डेंगू के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जानें, कितने दिनों तक दिखाई देते हैं ये संकेत

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बच्चों में डेंगू के लक्षण कैसे दिखते हैं?

डेंगू के लक्षण आमतौर पर बच्चों में संक्रमण की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर शुरुआत में डेंगू बुखार के लक्षण सामान्य वायरस जैसे लगते है, लेकिन माता पिता को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। तेज बुखार आना, आंखों में दर्द, मासंपेशियों में अकड़न, जोड़ों में दर्द, थकान, कमजोरी, भूख की कमी, पेट दर्द, उल्टी और त्वचा का ठंडा पड़ना आदि जैसे लक्षण बच्चों में दिख सकते हैं। इन लक्षणों के दिखने के बाद तुंरत डॉक्टर के पास जाएं और जांच करवाएं।

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डेंगू की तुरंत जांच करावानी चाहिए

अगर आपके बच्चे में डेंगू के लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। आपको बता दें कि डेंगू की जांच करने के लिए डॉक्टर एनएस1 एंटीनज टेस्ट करते हैं। साथ ही, डॉक्टर आरएनए टेस्ट भी करते हैं जिससे प्लेटलेट्स का लेवल पता लगाया जा सके।  Also Read - Dengue फीवर के खतरनाक लक्षण जिनसे जान को खतरा

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पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

बच्चों के पूरे शरीर को स्पंज बाथ से साफ करना चाहिए। बच्चों को नींबू पानी, नारियल पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थ आदि देते रहें ताकि डिहाइड्रेशन की समस्या न हो। पेरेंट्स द्वारा बताए समय और मात्रा के अनुसार बच्चों को पैरासिटामॉल देते रहें। बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं और जब तक बच्चे की रिकवरी नहीं होती उसे बाहर खेलने न भेजें। सोते समय बच्चे के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें ताकि बच्चा आराम से सोए और जल्दी रिकवरी हो पाए। क्योंकि बच्चे एक ही जगह पर नहीं बैठ पाते हैं इसलिए पेरेंट्स उनका मनोरंजन करने के लिए उन्हें कहानी सुनाएं, बातें करें और कुछ एक्टिविटी भी कर सकते हैं।