भगन्दर और बवासीर में क्या अन्तर है और ये कैसे होता है; जानिए लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार

बवासीर और भगन्दर में अंतर बहुत ही स्पष्ट है, इनके बीच का मुख्य अंतर यह है कि भगन्दर पाचन तंत्र के अंतिम छोर और गुदा द्वार (Anus) के मध्य होता है। जबकि बवासीर गुदा द्वार की परत पर होता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर चंचल शर्मा से जानिए भगन्दर और बवासीर से होने होने वाली तकलीफों, लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार क्या हैं।

Written by Atul Modi | Published : January 20, 2022 7:07 PM IST

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भगन्दर (फिस्टूला) क्या है?

भगन्दर एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोगी के गुदा द्वार में एक फोड़ा (गांठ) हो जाता है, जो गुदा द्वार के भीतर तथा बाहर आने-जाने के कारण गुदा मार्ग में घाव (दरारें) पैदा कर देता है। जिससे मल त्याग के दौरान अधिक पीड़ा महसूस होती है। भगन्दर दो प्रकार के होते है। जिसे पूर्ण भगन्दर और अपूर्ण भगन्दर के नाम से जानते है। भगन्दर की बीमारी में रोगी को बार-बार ब्लीडिंग होती है और मल त्याग करते समय रोगी को रेक्टम में दर्द होता है। इसका कारण रेक्टम के ट्रक में जो संक्रमण हो जाता है। उसकी वजह से यह समस्या होती है। मगर आयुर्वेदिक चिकित्सा की मदद से धीरे-धीरे ठीक किया जा सकता है। इसमें आयुर्वेदिक हर्ब की मदद से उसकी हीलिंग के द्वारा इसे जड़ से समाप्त करने का प्रयास किया जाता है, ताकि दोबारा न हो।

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भगन्दर का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में भगन्दर का सफल उपचार किया जाता है, क्योंकि यदि आप भगन्दर का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से लेते है, तो यह भविष्य में दुबारा नही होता है और किसी भी प्रकार काे दुष्प्रभाव भी नही होते हैं। आयुर्वेद में भगन्दर से पीड़ित रोगियों को जीवनशैली और आहार में सुधार के साथ-साथ खादिरारिष्ट, अभयारिष्ट जैसे रसायनों के सेवन की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ चंचल शर्मा के मुताबिक, 'कुछ लोग भगन्दर की एलौपैथी से सर्जरी करवा लेते है, तो इसके दोबरा होने की पूर्ण संभावना रहती है। इसलिए, आयुर्वेदिक चिकित्सा ही भगन्दर का अंतिम विकल्प है। आयुर्वेद में भी क्षार सूत्र चिकित्सा से इसका समाधान किया जाता है। परंतु यदि हर्ब के द्वारा ही भगन्दर ठीक हो जाये तो इसकी जरुरत नही पड़ती है।'  Also Read - चेहरे पर पिगमेंटेशन क्यों हो जाती है? 3 नुस्खे दिलाएंगे झाइयों से छुटकारा

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बवासीर (पाइल्स) क्या है?

बवासीर होने पर रोगी के गुदा मार्ग की रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है, जिससे मल त्याग करने में परेशानी होती है, परंतु इसमें अधिक पीड़ा नही होती है। वबासीर भी भगन्दर की तरह ही दो प्रकार का होता है। एक होता है खूनी बवासीर और दूसरा होता है बादी बवासीर। खूनी बवासीर में दर्द नही होता है केवल मल के साथ रक्त बाहर आता है। इसमें गुदा में मस्सा होता है, जो शुरुआती दौर में गुदा द्वार के अंदर होता है और धीरे-धीरे फिर वह बाहर भी आने लगता है। बादी वबासीर में पेट में गैस, कब्ज होती है। जिसकी वजह से रोगी का पेट खराब रहता है। रोगी के शरीर में बेचैनी, जलन, दर्द, खुजली और किसी भी काम में मन नही लगती है।

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बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार

बवासीर के उपचार में सबसे पहले पीडि़त व्यक्ति को अधिक तीखा, तैलीय, मसालेदार भोज्य पदार्थ का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इन पदार्थों के सेवन से पेट में गैस और कब्ज की शिकायत होती है। आयुर्वेद के आहार विशेषज्ञ बवासीर रोगियों को छाछ, मट्ठा आदि खाने की सलाह देते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों से बादी एवं खूनी दोनों प्रकार के बवासीर जड़-मूल से नष्ट हो जाते है।  Also Read - भारत में अभी भी कई बच्चे कैंसर अस्पताल देर से क्यों पहुंचते हैं? कैसे थोड़ी जागरूकता बच्चे की जान बचा सकती है

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भगन्दर और बवासीर में अन्तर क्या है?

बवासीर (पाइल्स) में मुख्य रुप से रक्त कोशिकाओं में सूजन आ जाती है, लेकिन भगन्दर (फिस्टूला) की स्थिति उत्पन्न होने पर गुदा मार्ग में दरारे पड़ जाती है। बवासीर में दर्द तो होता है मगर ये दर्द सहनीय होता है। परंतु भगन्दर में इतना ज्यादा पीड़ा होती है, कि आपका शरीर उस पीड़ा का सहन करने योग्य नही होता है। भगन्दर और बवासीर की बीमारी 50 वर्ष तक की वायु में लगभग 75 प्रतिशत भारतीय आबादी को प्रभावित करती है। जबकि, 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी भगन्दर (फिस्टूला) जैसी दर्दनाक बीमारी से पीड़ित है। कोविड-19 में इसका प्रतिशत और भी बढ़ा है, क्योंकि महामारी के दौरान लोगों की जीवनशैली गतिहीन हो चुकी है। जिससे लोगों में विभिन्न गैस्ट्रिक समस्याओं में वृद्धि हुई है, इसके कुछ कारण हैं। जैसे कम फाइबर वाले आहार और वसा युक्त मसालेदार तीखे भोजन के अधिक सेवन से गुदा में गंभीर जलन होती है। 15 से लेकर 50 वर्ष के आयु वर्ग में बवासीर और फिशर जैसी स्थिति देखने को मिलती है। (Inputs: Doctor Chanchal Sharma, Ayurvedic Expert, Aasha Ayurveda, Rajouri Garden Delhi)