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Written By: Anshumala | Updated : April 9, 2019 4:43 PM IST
योग चिकित्सा से करें पार्किंसंस रोग का इलाज। © Shutterstock.
11 अप्रैल को ''वर्ल्ड पार्किंसंस डे'' यानी विश्व पार्किंसंस दिवस मनाया जाता है। पर्किंसंस डिजीज नर्वस सिस्टम में धीरे-धीरे बढ़ने वाला एक डिसऑर्डर है, जिससे पूरे शरीर की गतिविधि प्रभावित होती है। इसके लक्षणों में कंपकंपी, धीमी गतिविधि, सख्त मांसपेशियां, शरीर की असाधारण मुद्रा और संतुलन, स्वाभाविक गतिविधियों पर विराम, बोली में बदलाव, लिखावट में बदलाव आदि शामिल हैं। सभी रोगियों में इसके लक्षण अलग-अलग नजर आते हैं।
योग में छिपा है पार्किंसंस का इलाज
पार्किंसंस के लक्षण शुरुआती हों, तो इस रोग को आप योगासन के जरिए भी कंट्रोल कर सकते हैं। योग की विभिन्न क्रियाओं से स्नायु और मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाया जाता है। शुरुआत में कोई भी आसन या एक्सरसाइज करने से आपको थकान महसूस हो सकती है। आप प्रतिदिन खुली हवा में दो से तीन किलोमीटर तक टहलें। स्विमिंग करने से भी लाभ होता है।
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आसन
किसी भी आसन को करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें। आसन अपनी शारीरिक स्थिति, रोग की उग्रता के अनुसार ही करें। पार्किंसंस डिजीज से ग्रस्त लोगों को पवनमुक्तासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही उत्तानपादासन, धनुरासन, शलभासन, भुजंगासन, नौकासन, विपरीतकरणी, गोमुखासन, पश्चिमोत्तानासन और शवासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से पार्किंसंस रोग के लक्षणों में कमी आती है। इसके अलावा, ऊं प्राणायाम, नाड़ीशोधन, उज्जायी, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, योग निद्रा का भी विशेष अभ्यास करने से आराम मिलता है।
उत्तानपादासन
उत्तानपादासन करने के लिए सबसे पहले बैठ जाएं। अब पैरों को आगे की तरफ फैलाएं और तलवों को आगे की ओर तानें। फिर चार-पांच बार गहरी सांस लेकर आसन लगाए हुए ही पीठ के बल लेट जाएं। सांस छोड़ते हुए गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं। अंत में, हाथों के सहारे सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाएं। इस अवस्था में कमर को जमीन से जितना संभव हो, ऊपर की तरफ उठाएं। हथेलियां पैरों के समानान्त रहें। सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे गर्दन को सीधा कर शवासन में आ जाएं।
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योग निद्रा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ ही शरीर को आराम भी देता है। © Shutterstock.
योग निद्रा
योग निद्रा दिमाग को पुनर्जीवित करता है। रक्त संचार बढ़ाता है। शरीर में ऊर्जा संरक्षित रहती है। इसके नियमित अभ्यास से पार्किंसंस की बीमारी से बचे रहते हैं। दिन में लगभग 50 मिनट के लिए योग निद्रा का अभ्यास करें। 50 मिनट की योग निद्रा का अभ्यास 3 घंटे की नींद के बराबर होता है। यह मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ ही शरीर को आराम भी देता है। योग निद्रा करने के लिए ढीले कपड़ें पहनें। सीधे पीठ के बल लेट जाएं। गहरी सांस लें। दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। दोनों हाथों को सीधे और अपने शरीर से थोड़ा दूर रखें। अब सांस को सामान्य रखें। आंखों को बंद करें। मन में कोई भी विचार ना आने दें। अपने ध्यान को दाएं पैर के पंजे पर लाएं। अब ध्यान को घुटनों पर ले जाएं। फिर जांघ पर लेकर आएं। इसके बाद बाएं पैर पर भी यही प्रक्रिया दोहराएं। अब ध्यान को मध्य भाग पर ले जाएं और जननांग से शुरू करके अपनी नाभि, गले से होते हुए अपने मस्तिष्क पर ले जाएं। अब लेटे-लेटे 5 बार गहरी सांस लें और उठकर के आंखे खोल लें।
पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन पार्किंसंस को काबू में रखने के साथ ही गैस, कब्ज, बवासीर से परेशान लोगों के लिए भी लाभकारी आसन है। पीठ के बल सीधे लेट जाएं। धीरे-धीरे सांस लें। अपने पैरों को एक साथ उठाएं और पैर के घुटनों को मोड़ें। अपने पैर के घुटनों को छाती की तरफ अपने मुंह के पास लाएं और पैरों को अपने हाथों की उगंलियों से जकड़ लें। आपकी जांघें आपके पेट को छूना चाहिए और आपके पैर के घुटने आपकी नाक को छुए ऐसा प्रयास करें। इस स्थिति में 20 से 30 सेंकड तक रहें। धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं। इस आसन को आप दिन में 5 से 10 बार करें।
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