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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 14, 2018 3:14 PM IST
क्या आप जानते हैं कि आपका मोबाइल बच्चों की ग्रोथ के लिए कितना घातक है ? आपके मोबाइल की हल्की सी मैसेज टोन भी आपके बेबी की रेम स्लीप डिस्टर्ब कर देती हैं। जिससे उनका शारीरिक ही नहीं मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।
पड़ गई है आदत
आलम यह है कि रात में सोने से पहले अपने मोबाइल के साथ समय बिताने की आदत, हम सभी की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। शायद आपको पता नहीं है कि आप अपनी इस आदत से अपना तो नुकसान कर ही रहे हैं, अनजाने में आप अपने बच्चों की ग्रोथ को भी अपने हाथो बर्बाद कर रहे हैं। जी हां, चौकाने वाली यह बात न केवल एक कटु सत्य है, बल्कि पूरी तरह से प्रमाणित भी हो चुकी है। मेडिकल साइंस में कई ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जिसमें अभिभावकों की इस आदत के चलते उनके बच्चों की पूरी जिंदगी बर्बाद हो चुकी है।
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ये है नुकसान
किसी भी व्यक्ति और बच्चों के विकास में सबसे बड़ी भूमिका शरीर में बनने वाले हार्मोन होते हैं। शरीर की जरूरत के अनुसार, हार्मोन उस समय विकसित होते हैं, जब आप गहरी नींद में सो रहे होते हैं। यदि आपकी नींद में किसी भी तरह का खलल आया तो आपके शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। लिहाजा, किसी भी व्यक्ति या बच्चों की नींद के समय आने वाली खलल आपकी सेहत तो खराब करेगी ही, साथ ही आपके शारीरिक और मानसिक विकास की रफ्तार को धीमा कर देगी। जिसका खामियाजा आपको जिंदगी पर्यन्त भुगतना पड़ सकता है। लिहाजा, यह कोशिश होनी चाहिए कि सोते वक्त आपके पास कोई भी ऐसी चीज मौजूद नही होनी चाहिए, जिसके चलते आपकी नींद टूटने का खतरा उत्पन्न होता हो।
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डिस्टर्ब होती है रेम स्लीप
हमारे शरीर में करीब 230 तरह के हार्मोन्स होते हैं। हार्मोन्स सिक्रीशन की प्रक्रिया रेम स्लीप के दौरान होती है। रेम स्लीम, नींद का वह दौर है जब हमारा मस्तिष्क पूरी तरह से एक्टिव होता है। नवजात या छोटे बच्चों का शरीर के तमाम अंग शारीरिक और मानसिक विकास रेम स्लीप के दौरान हीं होता है। अक्सर देखा गया है कि इन बच्चों के बगल में बैठकर हम अपने मोबाइल पर काम करने लगते हैं। इस दौरान, मोबाइल फोन से उत्पन्न होने वाली ध्वनि या मैसेज टोन से होने वाली आवाज से बच्चों की नींद टूट जाती है। बच्चों को थपकी देने पर वह दोबारा सो जरूर जाते हैं, लेकिन उनके शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया वहीं रुक जाती है। जिसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है।
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खतरनाक है यह
डाक्टर्स के अनुसार, रेम स्लीप के दौरान मस्तिष्क उसी तरह सक्रिय होता है, जिस तरह आपका मस्तिष्क जागते हुए सक्रिय रहता है। आखों की मूवमेंट शुरू होती है। सांसे अनियमित और तेज हो जाती है। शरीर का तापमान और ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है। मस्तिष्क में आक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है। साथ ही चेहरे पर भाव आना शुरू हो जाते हैं। यह वही अवस्था है जब हम नींद में सपने देख रहे होते हैं। नींद के दौरान, यह अवस्था तब आती है, जब नींद अपने सभी चरण पूरे कर खत्म होने की तरफ होती है। नींद की इसी अवस्था में एक तरफ हमारे शरीर में हार्मोन सिक्रीट हो रहे होते हैं और हल्की सी आहत नींद तोड़ने के लिए काफी है। इस अवस्था में किन्हीं कारण से नींद टूटती है तो बच्चों के शारीरिक और मस्तिष्क के विकास में नकारात्मक असर पड़ता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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