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कई लोग ऐसा सोचते हैं कि डिलीवरी के बाद स्तनों में दूध का बनना बिल्कुल सामान्य बात है जबकि ऐसा नहीं है। डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में इतने तरह के बदलाव होते हैं कि कई बार ब्रेस्टफीडिंग काफी मुश्किल हो जाती है। खासतौर पर वे महिलायें जिनकी डिलीवरी सी-सेक्शन या आईवीएफ से हुई है उनमें ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा ज्यादा रहता है। इस आर्टिकल में बैंगलोर स्थित अपोलो क्रैडल की कंसलटेंट गायनकोलॉजिस्ट डॉ. टीना एस थॉमस आईवीएफ डिलीवरी वाली महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े टिप्स बता रही हैं।
स्ट्रेस ना लें : पहली डिलीवरी के बाद अधिकतर महिलायें स्ट्रेस की शिकार हो जाती हैं और आपको बता दें कि स्ट्रेस का सीधा असर ब्रेस्टफीडिंग पर पड़ता है। इसलिए इन दिनों खुद को शांत रखें और ऐसी चीजों में ज्यादा मन लगायें जो आपको पसंद हो। नहाने के पानी में एसेंशियल ऑयल डालकर नहायें और हो सके तो रोजाना मेडिटेशन ज़रूर करें।
ब्रेक लें : घंटो बेबी को अपनी गोद में रखकर दूध पिलाने से भी कई बार स्ट्रेस बढ़ जाता है और दूध का उत्पादन कम होने लगता है। अगर आपका बेबी बहुत जल्दी जल्दी दूध पीता है तो इसका असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है और ब्रेस्टफीडिंग में मुश्किलें आने लगती है। हर समय दूध पिलाने से या बच्चे को गोद में लिए रहने से आपको पीठ दर्द भी हो सकता है इसलिए बीच में ब्रेक लें और तब तक अपने बच्चे को किसी रिश्तेदार को दें।
फोलिक एसिड की दवाइयां खाती रहें : लैक्टेशन बढ़ाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप नियमित तौर पर फोलिक एसिड की गोलियां खाती रहें। फोलिक एसिड की गोलियां जितना प्रेगनेंसी के दौरान ज़रूरी होती हैं उतनी ही ब्रेस्टफीडिंग के समय भी ज़रूरी होती हैं। इसके लिए अपने डॉक्टर से एक बार सलाह ज़रूर ले लें।
हेल्दी चीजें खाएं : आपके दूध पर सबसे ज्यादा असर आपके खानपान का ही पड़ता है। अगर आप खानपान में बहुत ज्यादा नमकीन चीजें या जंक फ़ूड का सेवन कर रही हैं तो इससे दूध के बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है और पौष्टिकता भी कम होती है। इसलिए इससे बचने के लिए अधिक से अधिक हेल्दी चीजों को डाइट में शामिल करें और खूब पानी पिएं। इससे मिल्क का प्रोडक्शन बढ़ता है।
डॉक्टर की मदद लें : कई बार सारे उपाय करने के बावजूद भी स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बन पाता है ऐसे में आप हताश ना हों बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास जायें और अपना चेकअप करवाएं। अधिकतर मामलों में ट्रीटमेंट से ये समस्या दूर हो जाती है।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock