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बोर्ड एग्जाम (Board Exam 2020) अगले महीने यानी फरवरी से शुरू होने वाला है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का मार्क्स, तैयारी, रिविजन आदि को लेकर स्ट्रेस लेवल बढ़ना जायज है। लेकिन,अधिक स्ट्रेल लेने से आपको ही नुकसान होगा। आप जितना दिमागी रूप से तनाव में रहेंगे, परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। ऐसे में शांत भाव और कूल दिमाग से आपको परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। आप बेशक पढ़ाई करें, क्योंकि अच्छे नंबर लाने हैं, तो पढ़ना जरूरी है, लेकिन खुद के लिए भी समय निकालें। सारा दिन तनाव में बैठकर हाथों में किताब लिए रहने से कुछ नहीं होगा। अच्छा खाएं, भरपूर सोएं, एक्सरसाइज भी करें ताकि मूड और दिमाग फ्रेश होकर कुछ भी ग्रहण (Tips to beat exam stress) कर सके। आप योग मुद्रा के सहारे खुद को मेंटली फिट रख सकते हैं। स्मरण शक्ति को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आप आज से ही शुरू कर दें ज्ञान मुद्रा (Yoga mudra to boost memory power) का अभ्यास...
बोर्ड परीक्षा के समय बच्चे के मन को पढ़ना क्यों जरूरी है
पेरेंट्स को इतना भी दबाव नहीं बनाना चाहिए कि बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो जाएं। पेरेंट्स को उनके सोने-जागने, खानपान आदि पर विशेष ध्यान देना चाहिए। तनाव लेकर आप खुद को बीमार ही करेंगे, इससे मार्क्स तो अच्छे आएंगे नहीं। बेशक, अच्छे मार्क्स की वैल्यू होती है, आप जिस कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं, वहां प्रवेश करना आपके लिए आसान हो सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि एग्जाम की तैयारी करने के साथ ही आप अपनी रूटीन, खानपान, सोने-जागने, एक्सरसाइज (Tips to beat exam stress) आदि का भी ध्यान रखें।
आप चाहते हैं कि आपको सारी चीजें अच्छी तरह से याद रहें और तनाव के कारण याद की हुई चीजें भूलने ना पाएं, तो आप ज्ञान मुद्रा (gyan mudra to boost memory power) करना शुरू कर दें। ज्ञान मुद्रा करने से याद्दाश्त क्षमता बूस्ट होती है। ऑटिज्म के लक्षणों को भी ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से कंट्रोल किया जा सकते हैं। ऑटिज्म के कारण बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। इस समस्या से पीड़ित बच्चों को प्रतिदिन ज्ञान मुद्रा का अभ्यास पेरेंट्स करवाएं, तो बहुत हद तक लाभ हो सकता है।
ज्ञान मुद्रा मस्तिष्क के ज्ञान-तंतुओं को सक्रिय करती है। यह मुद्रा मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि और पीनियल ग्रंथि को प्रभावित करती है। इससे स्मरण-शक्ति बढ़ती है। नकारात्मकता दूर होती है। बुद्धि का विकास होता है तथा एकाग्रता बढ़ती है। यह मुद्रा छठी इन्द्रिय को सक्रिय करती है, इसलिए रचनात्मकता बढ़ाने के साथ ही आध्यात्मिक उन्नति में भी कारगर है। इससे शान्ति का अनुभव होता है।
आप अपने अंगूठे और तर्जनी के अग्र भाग को मिलाएं। शेष उंगलियों को सीधा रखें। धीमी, लंबी एवं गहरी सांस लें। यदि इसे आप 15-15 मिनट के लिए हर दिन करेंगे, तो आपको मानसिक रूप से काफी लाभ होगा। स्ट्रेस दूर होगा। मेंटली रिलैक्स फील करेंगे।