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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 6, 2018 4:56 PM IST
परंपरागत भारतीय खानपान में हर उम्र और हर अवस्था के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। कुछ व्यंजन तो खास बनाए ही इसलिए जाते हैं कि उस विशेष अवस्था में पोषण की आवश्यकता को पूरा किया जा सके। इसी तरह नई मां के लिए भी परंपरागत भारतीय व्यंजनों और विधियों में से कुछ हैं इतने खास कि अगर मां उन्हें खाएं तो बेबी को फीड की बिल्कुल कमी नहीं होगी। विशेष रूप से स्तन दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करने वाले इन फूड्स को गेलेक्टोगोगस (galactagogues) के रूप में जाना जाता है।
सूखे मेवे : भारत के लगभग हर प्रांत में डिलीवरी के बाद मां को सूखे मेवे दिए जाते हैं। कहीं इन्हें घी में फ्राई करके खिलाया जाता है, तो कहीं सूखे मेवे को लड्डू में शामिल कर नई मां को दिया जाता है। दरअसल सूखे मेवे प्रोटीन का बेहतर स्रोत हैं, जो एनर्जी बूस्टर का काम करते हैं। इनमें कैलोरी, विटामिन, और खनिजों की भी अच्छी मात्रा उपल्बध होती है। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान अकसर बार-बार भूख लगती है। इस छोटी-छोटी भूख के लिए भी सूखे मेवे बढि़या स्नेक्स हैं। सूखे मेवे सेरोटोनिन के उत्पादन में मदद करते हैं। साथ ही इनमें विटामिन ई और ओमेगा 3 भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है। ओमेगा -3 लैक्टेशन हार्मोन को बढ़ावा देने में मदद करता है। दूध के साथ बादाम खाने से भी दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ती है।
मेथी के लड्डू : ब्रेस्ट फीड की क्वांटिटी बढ़ाने के लिए बरसों से न्यू मॉम को मेथी के लड्डू दिए जाते रहे हैं। मेथी के बीज विटामिन, खनिज, और प्रोटीन जैसे ओमेगा -3 वसा, लोहा और विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत हैं जो स्तनपान करवाने वाली मां के लिए बहुत जरूरी है। मेथी के बीज को 7-8 घंटे के लिए एक गिलास पानी में भिगोकर सुबह में खाली पेट पीना भी स्तन दूध को बढ़ाने में मदद करता है।
सौंफ का पानी : नई मां को शुरूआत में सादा पानी देने की बजाए सौंफ का पानी दिया जाता है। सौंफ का पानी माता के दूध की मात्रा तो बढ़ाता ही है साथ ही बच्चे के पेट में गैस बनने से भी रोकता है। मां अगर सौंफ का पानी पीती है तो इससे उसके अपने और बेबी दोनों के स्वास्थ्य को लाभ होता है।
दलिया : दलिया लोहा, कैल्शियम, और विटामिन बी का बेहतर स्रोत हैं। दलिया में फाइबर होता है और ब्रेस्ट फीड करवाने वाली मांओं के लिए बहुत जरूरी है। खास बात यह कि इसे पचाना भी आसान होता है, जिससे बच्चे को कब्ज नहीं होती। यह रक्त में आरबीसी काउंट बढ़ाने में भी कारगर है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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