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World Breastfeeding Week- बच्चों के लिए छह महीने तक केवल मां का दूध देना क्यों है जरूरी

जानिए मां का दूध नहीं पीने से आपके शिशु को कौन-कौन सी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं!

कामकाजी महिलाओं के लिए बच्चे को छह महीने लगातार स्तनपान कराना मुश्किल हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शिशु के संपूर्ण विकास के लिए पहले छह महीने तक मां का दूध बहुत जरूरी है। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकतर महिलाएं शुरू के केवल तीन महीने तक ही फीडिंग कराती हैं और इसके बाद फार्मूला मिल्क देना शुरू कर दी है।

जन्म के बाद बच्चों को मां का पहला दूध देना बहुत जरूरी है। इस हल्के गाढ़े और पीले दूध को बच्चे का पहला टीका भी कहा जाता है। यह दूध मां से शिशु में एंटीबॉडी और फाइटर सेल्स ट्रांसफर करता है। यह बच्चे को सभी तरह के इन्फेक्शन और एलर्जी से बचाता है।

आपको जानकार हैरानी होगी कि बहुत से महिलाएं जन्म के पहले घंटे में भी शिशु को दूध नहीं पिलाती हैं। मेडेला ब्रेस्टफीडिंग सर्वे 2017 के अनुसार, महाराष्ट्र की 36 फीसदी महिलाओं ने जन्म के पहले घंटे में ही शिशु को फार्मूला मिल्क देना शुरू कर दिया था। आगे इसके परिणाम बताते हैं कि 27 फीसदी नई माताओं ने डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को फार्मूला मिल्क देना शुरू किया था।

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इसका मतलब यह है कि परिवार के अन्य लोगों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे माता को इस बात के लिए प्रोत्साहित करें कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे फार्मूला मिल्क की बजाय स्तनपान कराया जाए। बैंगलोर स्थित मनिपाल हॉस्पिटल में एमडी (पीडियाट्रिक) आईबीसीसीएल डॉक्टर रवनीत जोशी के अनुसार, बच्चों को छह महीने तक केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए और अगर संभव हो तो इसे दो साल तक जारी रखना चाहिए। इससे बच्चे को वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है और उसे अस्थमा या एलर्जी का कम जोखिम होता है। ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे को कनेक्ट करने का एक तरीका है और सबसे बड़ी बात यह बच्चे को शांत करने का भी एक उपाय है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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