
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : January 29, 2026 2:44 PM IST
Medically Verified By: Dr. Prasad Kulat
Early Puberty Kise Kehte Hain: एक समय था जब 15 से 16 साल की लड़कियों को पीरियड्स हुआ करते थे। यह वह उम्र होती है जब लड़कियां खुद को संभालना शुरु कर देती हैं। लेकिन आज 8-9 साल की लड़कियों को मासिक धर्म हो रहा है। न मांओं को समय मिल पा रहा है अपनी बेटियों को कुछ समझाने का और न बच्चियां समझ पाती हैं कि उन्हें क्या करना है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा जा रहा है कि बेटियों को पहले के मुकाबले काफी कम उम्र में पीरियड्स आने लगे हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty) कहा जाता है। यह केवल एक शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि इससे जुड़े स्वास्थ्य और मानसिक प्रभाव भी माता-पिता की चिंता बढ़ा रहे हैं।
कई लड़कियों और माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि आखिर लड़कियों को उम्र से पहले ही पीरियड्स शुरू क्यों हो रहे हैं। पेरेंट्स की इस परेशानी को दूर करने के लिए हमने अंकुरा हॉस्पिटल ऑफ वुमेन एंड चाइल्ड के ऑब्स्टट्रिशन एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रसाद कुलट से बात की। उन्होंने कम उम्र में पीरियड्स आने के मुख्य कारणों के बारे में बताया है। आइए जानते हैं डॉक्टर ने क्या कहा है।
आजकल बच्चों की डाइट में जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, शुगर और प्रोसेस्ड फूड की मात्रा काफी बढ़ गई है। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद अनहेल्दी फैट और हार्मोन को प्रभावित करने वाले तत्व शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन को जल्दी सक्रिय कर देते हैं, जिससे पीरियड्स समय से पहले शुरू हो सकते हैं।
कम उम्र में वजन बढ़ना भी अर्ली प्यूबर्टी का एक अहम कारण है। शरीर की फैट सेल्स एस्ट्रोजन हार्मोन का निर्माण करती हैं। जब शरीर में फैट की मात्रा ज्यादा होती है, तो हार्मोनल बदलाव जल्दी होने लगते हैं और प्यूबर्टी का प्रोसेस समय से पहले शुरू हो जाता है।
थायराइड डिसऑर्डर, एड्रेनल ग्लैंड की समस्याया कुछ मामलों में PCOS जैसी स्थितियां भी कम उम्र में पीरियड्स आने की वजह बन सकती हैं। इन स्थितियों में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर मासिक धर्म पर पड़ता है।
आजकल बच्चे प्लास्टिक की बोतलों, डिब्बों और केमिकल युक्त कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के संपर्क में ज्यादा आ रहे हैं। इनमें मौजूद BPA और फ्थेलेट्स जैसे केमिकल शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं और एस्ट्रोजन की तरह काम करके प्यूबर्टी को जल्दी ट्रिगर कर सकते हैं।

मोबाइल, टीवी और ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है। लंबे समय तक बैठना, आउटडोर खेलों की कमी और अनियमित दिनचर्या हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करती है, जिससे पीरियड्स जल्दी आने का खतरा बढ़ता है।
बच्चों में पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया एक्सपोजर और नींद की कमी भी हार्मोनल बदलावों को तेज कर सकती है। लगातार तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो प्यूबर्टी को जल्दी शुरू करने में भूमिका निभाता है।

कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होने से बच्चियों की हाइट पूरी तरह विकसित न हो पाना, भविष्य में मोटापा और हार्मोनल समस्याओं का खतरा, साथ ही मानसिक और भावनात्मक असहजता जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
1.बच्चियों को घर का बना संतुलित भोजन दें- जैसे फल, हरी सब्जियां, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हों।
2. नियमित फिजिकल एक्टिविटी- हर दिन कम से कम एक घंटा आउटडोर एक्टिविटी, खेल, डांस या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
3.प्लास्टिक का कम उपयोग- स्टील या कांच की बोतलों और डिब्बों का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक में खाना गर्म करने से बचें।
4.पर्याप्त नींद और सकारात्मक माहौल- बच्चियों को 8–9 घंटे की नींद दें और उनसे खुलकर बातचीत करें ताकि वे अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर सहज महसूस करें।
यदि 8 साल से पहले पीरियड्स शुरू हो जाएं या शारीरिक बदलाव बहुत तेजी से हों, तो पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
कम उम्र में पीरियड्स आना आज की बदलती जीवनशैली का परिणाम है। सही खान-पान, सक्रिय दिनचर्या और समय पर मेडिकल सलाह से इस स्थिति को काफी हद तक संभाला जा सकता है। सबसे जरूरी है कि बच्चियों को सही जानकारी देकर उनका शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से साथ दिया जाए।