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Written By: Anshumala | Published : September 28, 2018 10:39 PM IST
ब्रक्सिज्म का असर बच्चों के दांतों पर खराब पड़ता है। © Shutterstock
आपने गौर किया होगा, कई बच्चे रात में सोते समय अपने दांतों को पीसते हैं। यह समस्या कई बच्चों में देखी जाती है। क्या आपके बच्चे में भी यह आदत है? यदि हां, तो समय से पहले इस समस्या से छुटकारा दिलाने के उपाय कर लीजिए, वरना बच्चे में कई तरह की शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। वह कमजोर भी हो सकता है। दरअसल, बच्चे का रात में सोते समय दांत पीसने की इस आदत को ब्रक्सिज्म (bruxism) कहते हैं। हालांकि, यह सामान्य समस्या है, लेकिन ऐसा होता क्यों है, यह जानना भी जरूरी है। इससे दांत किटकिटाने की आदत दूर करने में आसानी रहेगी।
बच्चों में दांत पीसने की आदत क्यों होती है?
ब्रक्सिज्म की समस्या रात को सोने के दौरान अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान व्यक्ति अवचेतन अवस्था में होता है। कुछ लोग कहते हैं कि बच्चों में यह समस्या पेट में कीड़े होने या फिर पाचन संबंधी गड़बड़ी के कारण होती है। शोध के अनुसार, इस समस्या का कारण बच्चे में पाचन की गड़बड़ी नहीं बल्कि तनाव के कारण होता है। एक अध्ययन के अनुसार, 2 साल से 5 साल तक के 50% बच्चों में दांत पीसने की समस्या होती है। इसका मुख्य कारण तनाव हो सकता है। बच्चों के मन में किसी बात का डर या फिर कोई बोझ उसकी मानसिकता पर प्रभाव डाल सकता है।
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डाल सकती है बुरा प्रभाव
यह समस्या बेशक सामान्य लगती हो, लेकिन इसका असर बच्चों के दांतों पर खराब पड़ता है। इससे दांत कमजोर हो सकते हैं। इन पर मौजूद इनेमल की परत नष्ट हो सकती है जिससे सेंसिटिविटी होने लगती है और दांत जल्दी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।
हो सकती हैं ये समस्याएं
- दांतों में दर्द रहना।
- सेंसिटिविटी की परेशानी।
- दांतों का आकार खराब होना।
- दांत हो सकते हैं कमजोर।
- नसों में तनाव की वजह से मुंह, जबड़ों और सिर में दर्द रहना। (इसे भी पढ़ें- कहीं आपका बच्चा तो नहीं करता स्मोकिंग, जानने और इस लत को छुड़ाने के लिए आजमाएं ये तरीके)
ब्रक्सिज्म का इलाज
बच्चे में यह समस्या बार-बार हो तो इसका कारण तनाव हो सकता है। तनाव की वजहों को जानने की कोशिश करें। कहीं बच्चे को किसी तरह का डर या चिंता तो नहीं सता रहा है। प्यार से बच्चे से बात करें। उन्हें दांत पीसने के समय नींद में ही डांटना न शुरू कर दें। बहुत अधिक दांत पीस रहा है, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें।