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ब्रेस्टफीडिंग के लिए सबसे बेहतर पोजीशन क्या हैं?

अगर आप हाल ही में मां बनी हैं, तो आपको सारे काम छोड़कर सबसे पहले यह आर्टिकल पढ़ना चाहिए!

मैं 30 वर्षीय महिला हूं और हाल ही में एक बच्ची को जन्म दिया है। मैं यह जानना चाहती हूं कि ब्रेस्टफीडिंग के लिए बेहतर पोजीशन क्या है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर हो?

इस सवाल का जवाब न्योनोटोलॉजिस्ट और फिलिप्स एवेंट के कंसल्टेंट डॉक्टर रघुराम मालिया दे रहे हैं।

1)  क्रेडल पोजीशन

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इस पोजीशन में बच्चे के सिर को, मां अपने एक हाथ की कोहनी के अंदर से सहारा दे सकती हैं और दूसरे हाथ की सहायता से ब्रेस्ट बच्चे के मुंह से लगा सकती हैं। शुरू के हफ्तों में यह तरीका अपनाने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है, क्योंकि बच्चें की गर्दन बहुत कमजोर होती है। यदि इस स्थिती में ज्यादा कठिनाई आ रही हो तो कोई अन्य तरीका भी अपनाया जा सकता है। बाद में, जब बच्चें का गर्दन मजबूत हो जाए, तो वह खुद ही अपना सिर उठा कर दूध पी सकता है, और तब यह तरीका मां को बहुत ही सुविधाजनक लग सकता है। शिशु को सहारा देने के लिए अपने हाथ के नीचे गद्दियां या तकिए भी लगा सकती हैं।

2) क्रॉस क्रेडल पोजीशन

यह पोजीशन उन छोटे शिशुओं के लिए बेहतर है, जिन्हें मां के निप्पल तक पहुंचने के लिए परेशानी होती है। इस पोजीशन में हाथों का इस्तेमाल बच्चे को पकड़ने के लिए किया जाता है। आपकी भुजा बच्चे के सिर को सपोर्ट करती हैं। अगर आप बच्चे को दूध पिलाने जा रही हैं, तो तो अपने दाहिने ब्रेस्ट का इस्तेमाल करें और बच्चे को पकड़ने के लिए बाएं हाथ व भुजा का उपयोग करें। बच्चे के शरीर को मोड़ लें ताकि उसका पेट और छाती आपके सामने रहे। अब अपनी उंगलियों और अंगूठे को उसके सिर के पीछे रखें और उसके मुंह को दायें ब्रेस्ट की ओर ले जाएं।

3) साइड-लाइंग पोजीशन

यह पोजीशन रात  में बच्चें को दूध पिलाने के लिए सबसे उपयुक्त है। इसमें मां बच्चे को सो कर दूध पिला सकती है। इसके लिए मां बच्चें के बगल में करवट लेकर लेट जायें। एक हाथ से अपने बच्चे को सहारा दें और दूसरे हाथ से ब्रेस्ट को पकड़ कर बच्चें के मुंह में डाल दें। अक्सर सिज़ेरीयन सर्जरी के बाद डॉक्टर इसी अवस्था से स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।

4) फुटबॉल पोजीशन

इसमें बच्चे को बगल में रखते हैं। सबसे पहले मां आराम से कुर्सी पर बैठ जायें, या पालथी ले कर बैठ जायें। बगल में एक तकिया रख लें। बच्चे को उस पर लिटा दें। इसमें मां अपने एक हाथ से बच्चे के सिर को सहारा दे सकती है, बिल्कुल उसी तरह जैसे कि एक फुटबाल को पकड़ा जाता है। इस अवस्था में मां की उंगलियां, बच्चें के एक कान के पास होती हैं, और अंगूठा, दूसरे कान के पास। बच्चें का सिर हथेली पर होता है। जब बच्चा दूध पीने के लिए तैयार हो जाता है तो दूसरे हाथ की सहायता से स्तन बच्चे के मुंह से लगा दें। यदि किसी महिला की सिज़ेरीयन सर्जरी हुई है और वह अपने पेट के टांके पर दवाब नहीं देना चाहती तो यह तरीका उसके लिए सबसे उपयुक्त है। यदि नवजात शिशु का वजन सामन्य से कम है, या समय से पहले हुआ है और वह बहुत छोटा है, तो बच्चे को अन्य स्थिती में दूध पीने में दिक्कत आ सकती है, तब यह तरीका बहुत लाभकारी होता है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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