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मानसून में बच्चों को कौन-कौन से संक्रमण होने का खतरा रहता है?

मानसून में बच्चों को कई तरह के संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में उन्हें इस सीजन में अधिक सुरक्षित रखने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं मानसून में बच्चों को कौन से इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है?

Written By Kishori Mishra
Published : June 15, 2026 9:33 AM IST

Kids health Issue

मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही बच्चों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। हवा में नमी बढ़ने और जगह-जगह पानी जमा होने से बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। क्योंकि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। ऐसे में उन्हें कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है। इस विषय को जानने के लिए हमने अहमदाबाद स्थित नारायणा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स डॉ. उर्वशी राणा बातचीत की है। आइए जानते हैं मानसून में बच्चों को कौन-कौन सी परेशानियां हो सकती हैं?

1. मानसून में बच्चों को हो सकता है सर्दी-खांसी और वायरल इंफेक्शन

डॉक्टर का कहना है कि मानसून के दौरान बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं काफी आम होती हैं। स्कूलों और बंद जगहों पर बच्चों के एक-दूसरे के संपर्क में आने से वायरस आसानी से फैल सकते हैं। नमी भरा मौसम भी इन संक्रमणों के प्रसार में मदद करता है।

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2. दूषित पानी से डायरिया और पेट का संक्रमण बढ़ सकता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बरसात के मौसम दूषित पानी और खराब स्वच्छता बच्चों में डायरिया के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसकी वजह से बच्चों को बच्चों को दस्त, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। छोटे बच्चों में पानी की कमी तेजी से हो सकती है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

3. मच्छर जनित बीमारियां होने की संभावना

WHO के मुताबिक,  हाल के वर्षों में दुनियाभर में डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई है। मानसून का मौसम इसके प्रसार के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में बच्चों को मानसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।  बारिश में घरों के आसपास जमा पानी, कूलर, गमले और टंकियां मच्छरों के प्रजनन स्थल बन सकते हैं। अगर बच्चे को तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

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4. आंख और स्किन के संक्रमण

बरसात के मौसम में कंजंक्टिवाइटिस यानि आंख आना, फंगल इंफेक्शन और त्वचा पर रैशेज के मामले भी बढ़ सकते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों में ये संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं।

बचाव ही है सबसे बेहतर उपाय

मानसून में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए माता-पिता कुछ आसान सावधानियां अपना सकते हैं, जैसे-

  • बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें।
  • सिर्फ स्वच्छ और सुरक्षित पानी पिलाएं।
  • ताजा और साफ भोजन ही खिलाएं।
  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • बच्चों को संतुलित आहार दें, जिसमें फल, सब्जियां और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हों।

ध्यान रखें कि अगर बच्चे को लगातार बुखार रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, बार-बार उल्टी हो, गंभीर दस्त हो, डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, अत्यधिक नींद आए या वह सामान्य से कम एक्टिव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है।

Disclaimer : मानसून ऐसा मौसम नहीं है जिससे घबराने की जरूरत हो। सही सावधानियां अपनाकर और शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। उचित देखभाल के साथ बच्चे मानसून का आनंद भी ले सकते हैं और स्वस्थ भी रह सकते हैं।