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Written By: Atul Modi | Updated : September 6, 2022 7:01 AM IST
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ का सुझाव है कि नॉर्मल या सिजेरियन डिलीवरी होने पर पहले घंटे में ही शिशु को स्तनपान कराना चाहिए। इतना ही नहीं, जीवन के शुरुआती छह महीनों में शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए। स्तनपान न केवल मां और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ते को मजबूती देता है बल्कि यह मां और बच्चे, दोनों के लिए कई मायनों में लाभकारी है। स्तन से दूध पीने वाले बच्चे को कई वायरल और सांस से जुड़े संक्रमणों से निपटने के लिए आवश्यक रोग प्रतिरोधक शक्ति मिलती है। मानव दूध में मौजूद बायोएक्टिव फैक्टर बच्चे को कई तरह की बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं और उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देते हैं। इसके अलावा, स्तनपान से बच्चे के मस्तिष्क के स्वस्थ विकास में मदद मिलती है।
यह साबित हो चुका है कि लंबे समय तक स्तनपान कराने से मेटाबॉलिज्म संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है। माताओं के लिए गर्भाशय को गर्भावस्था से पहले के आकार में वापस लाने में मदद करने के अलावा, यह स्तन और ओवरियन कैंसर के खतरे को भी कम करता है।
हालांकि, कुछ मतभेद भी हैं। उदाहरण के लिए मेटाबॉलिज्म से जुड़े रोग यानी गैलेक्टोसिमिया से पीड़ित नवजात शिशु। अगर मां कुछ दवाएं ले रही हो तो शिशु को स्तनपान कराना उचित नहीं होगा। खासकर ऐसी दवाएं जिनका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में हो रहा हो, इसी तरह लीथियम, रेटिनोइड्टस, गोल्ड सॉल्ट जैसी साइकोट्रोपिक दवाओं का इस्तेमाल कर रही माताओं को भी स्तनपान से बचना चाहिए। स्तन पर होने वाले फोड़े और दाद जैसे संक्रमणों के मामले में कुछ दिनों के लिए स्तनपान नहीं कराना अच्छा विकल्प होगा।
निप्पल के दर्द के मामले में जो काफी सामान्य है, निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
इनपुट्स: डॉ. सरिता शर्मा- बाल रोग विशेषज्ञ, पीएसआरआई अस्पताल दिल्ली