क्‍या करें, जब बच्‍चा हो जाए चाइल्‍ड अब्‍यूज का शिकार

चाइल्‍ड अब्‍यूज के ट्रॉमा से निकालने में पेरेंट्स इस तरह कर सकते हैं मदद।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : July 18, 2018 1:50 PM IST

अभी हाल ही में नोएडा के एक प्रोमिनेंट स्‍कूल में साढ़े तीन साल की बच्‍ची के साथ यौन शोषण का का मामला सामने आया है। इसमें आरोपी कोई और नहीं बल्कि स्‍कूल में बच्‍ची को स्विमिंग सिखाने वाला कोच ही था। इन दिनों छोटी उम्र के बच्‍चों से लेकर किशोर उम्र तक चाइल्‍ड अब्‍यूज के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। बच्‍चों का यौन शोषण करने वाला अक्‍सर कोई करीबी ही होता है, इसलिए कई बार लंबे समय तक बच्‍चे इस बारे में शिकायत करने की हिम्‍मत ही नहीं जुटा पाते। ऐसे में वे कई तरह की परेशानियों के शिकार बन जाते हैं। कई बार तो बच्‍चा इतना अधिक अवसाद ग्रस्‍त हो जाता है कि उसकी पढ़ाई-लिखाई, खेलेकूद और अन्‍य गतिवि‍धि‍यां भी प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्‍मेदारी बहुत ज्‍यादा बढ़ जाती है। पेरेंट्स ही बच्‍चे को इस ट्रॉमा से बाहर निकाल सकते हैं। ताकि वह एक बेहतर भविष्‍य के लिए तैयार हो सके।

न करें नजरंदाज 

एक सर्वेक्षण के अनुसार यौन शोषण के शिकार 88 प्रतिशत बच्चे एंग्जाइटी की गिरफ्त में आ जाते हैं। बचपन में यौन शोषण का शिकार होने वाले बच्चे घबराहट, मूड डिसऑर्डर, पर्सनैलिटि डिसऑर्डर सहित कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्या से परेशान रहते हैं। इससे उनमें डर, उदासी, बेरुखी, तनाव या अवसाद जैसे लक्षण दिखते हैं। लेकिन, अक्सर घर वाले इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

हादसे से निकलना होता है मुश्किल

मनोविशेषज्ञ मानते हैं कि यौन शोषण का शिकार होना एक ‘हादसे’ के जैसा होता है। यह एक तरह का ट्रॉमा होता है, जिससे बाहर निकलने के लिए काउंसलिंग की बहुत जरूरत पड़ती है। चूंकि बच्चे पहले से ही डरे-सहमे होते हैं, वे लोगों से इस बारे में बात करने में डरते हैं, पर अंदर ही अंदर अपने साथ हुए दुराचार को भुला नहीं पाते हैं। इससे वे घबराहट सहित कई दूसरी मानसिक समस्याओं की गिरफ्त में आ जाते हैं।

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काउंसलर डॉ गी‍तांजलि शर्मा के पेरेंट्स के लिए सुझाव

  • अगर बच्‍चा चाइल्‍ड अब्‍यूज का शिकार हुआ है, तो जरूरी है कि उसकी काउंसलिंग करवाएं। क्‍योंकि कई बार पेरेंट्स यह समझ ही नहीं पाते कि बच्‍चे के साथ हुआ क्‍या है और उसके किस तरह से डील करना है। इसमें काउंसलर बच्‍चे और पेरेंट्स की मदद कर सकते हैं।
  • जितना ज्‍यादा हो सके बच्‍चे से बात करें। उसके भीतर जितना भी कुछ दबा हुआ है, उसे निकालना बहुत जरूरी है। कई बार बच्‍चा खुद ही बहुत कुछ बताना चाहता है, तो कभी-कभी वह बिल्‍कुल चुप हो जाता है। उसे अपनी बात कहने के लिए प्रेरित करें।
  • यह कतई शो न करें कि आप भी उसकी तरह बहुत घबराए हुए हैं, बल्कि बच्‍चे की हिम्‍मत बढ़ाएं और एक बेहतर भविष्‍य के लिए तैयार होने में उसकी मदद करें। ऐसे हादसे के बाद बच्‍चा अकसर अकेलापन महसूस करने लगता है। उसे यह यकीन दिलाएं कि आप हर कदम पर उसके साथ खड़े हैं।
  • कई बार बच्‍चा फि‍जिकल टच को अवॉइड करता है। अगर ऐसा है तो उसके साथ किसी भी तरह की जबरदस्‍ती न करें। वह जैसा चाहता है, पूरे धैर्य के साथ वैसा ही बर्ताव करें।
  • इसके उलट कई बार बच्‍चे को बहुत ज्‍यादा सपोर्ट की जरूरत होती है। वह अकेले रहने से भी डरने लगता है। ऐसे में बच्‍चे के कम्‍फर्ट का बहुत ध्‍यान रखें। उसके दोस्‍त, गाइड और काउंस‍लर बनकर हरदम उसके साथ रहें।
  • किसी भी तरह के बेड टच और यौन शोषण के बाद बच्‍चा गिल्‍ट में चला जाता है। उसे लगता है कि उसके साथ अगर कुछ गलत हुआ है तो वह भी अपराधी हो गया। इसकी बजाए बच्‍चे को यह यकीन दिलाएं कि जो कुछ भी हुआ है उसमें उसकी कोई गलती नहीं है। यह किसी भी बच्‍चे के साथ हो सकता था और अब आपको इस हादसे से बाहर आना है।
  • ये हरकतें अकसर करीबी लोगों द्वारा की जाती हैं। ऐसे में बच्‍चे का दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों, स्‍कूल या आसपास की सोसायटी पर से विश्‍वास टूटता है। इस विश्‍वास को दोबारा बनाने में उसकी मदद करें। उसे समझाएं कि इस तरह के लोगों से कैसे बच कर रहना है। कैसे बैड टच को पहचानना है।
  • किसी भी तरह के हादसे से उबरने में समय और बदलाव बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। बच्‍चे का मन बदलने के लिए हो सके तो आउटिंग प्‍लान करें। उसके उसकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल करें।
  • किशोर उम्र में एक और जोखिम रहता है कि सेक्‍स, रिलेशनशिप और सोसायटी के बारे में बहुत नेगेटिव इमेज बच्‍चे के दिमाग में बनने लगती है। समय के साथ-साथ इसके बारे में सही समझ और सलाह से उसकी मदद करें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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