
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 16, 2026 9:20 AM IST
Medically Verified By: Dr. Mona Kulsum
potty training
Potty Training : टॉडलर्स और छोटे बच्चों की जिंदगी में पॉटी ट्रेनिंग एक बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यह उनके बढ़ते कॉन्फिडेंट का संकेत है। हालांकि, कई माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि बच्चे की पॉटी ट्रेनिंग शुरू करने का सही समय क्या है और इसे बिना किसी तनाव के कैसे पूरा किया जाए।
नारायणा हॉस्पिटल की एसोसिएट कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक डॉ. मोना कुलसुम का कहना है कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी सीखने की गति भी अलग होती है। इसलिए पॉटी ट्रेनिंग के लिए कोई तय समय सीमा या प्रतियोगिता नहीं है। सबसे जरूरी है कि आपको अपने बच्चे की तैयारी और विकासात्मक संकेतों को समझना चााहिए।
अधिकतर बच्चे 18 महीने से 3 साल की उम्र के बीच पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार होते हैं। लेकिन सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि बच्चे की विकासात्मक तैयारी ज्यादा मायने रखती है। कुछ संकेत जो बताते हैं कि बच्चा तैयार है-
ये संकेत बताते हैं कि बच्चा अपने शरीर के संकेतों को समझना शुरू कर रहा है।
पॉटी ट्रेनिंग ऐसे समय शुरू करें जब घर में कोई बड़ा बदलाव न हो, जैसे- नया घर बदलना, छुट्टियां, नए भाई-बहन का जन्म और स्कूल की शुरुआत, इत्यादि। ऐसे समय में बच्चा पहले से ही बदलावों से गुजर रहा होता है, इसलिए पॉटी ट्रेनिंग का अतिरिक्त दबाव उसे परेशान कर सकता है।
बच्चे को धीरे-धीरे पॉटी चेयर या टॉयलेट सीट से परिचित कराएं। शुरुआत में उसे सिर्फ उस पर बैठने दें, ताकि वह सहज महसूस करे। बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग देने के लिए उन्हें आसान और सरल भाषा में समझएं। एक साथ सब कुछ सिखाने की कोशिश न करें। बच्चे की जिज्ञासा को बढ़ावा दें, इसे बोझ न बनाएं।
सफल पॉटी ट्रेनिंग के लिए नियमितता बहुत जरूरी है। बच्चे को इन समयों पर टॉयलेट जाने के लिए प्रेरित करें। उन्हें सुबह उठने के बाद, सोने से पहले और खाने के बाद यह नियमितता बच्चे को आदत बनाने में मदद करती है।
बच्चे को ढीले और आसानी से उतरने वाले कपड़े पहनाएं। छोटे बच्चों के लिए पॉटी चेयर सामान्य टॉयलेट की तुलना में कम डरावनी लगती है।
पॉटी ट्रेनिंग में पॉजिटिव रीइन्फोर्समेंट सबसे प्रभावी तरीका है, इसके लिए आपको कोशिश करनी चाहिए, जो निम्न हैं-
सीखने के दौरान पेशाब या पॉटी का कपड़ों में हो जाना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे समय में बच्चे पर चिल्लाएं नहीं, उसे शर्मिंदा न करें। इन गलतियों के दौरान थोड़ा शांत रहें और उन्हें अच्छे से समझाएं। नकारात्मक प्रतिक्रिया बच्चे में टॉयलेट को लेकर डर पैदा कर सकती है।
पॉटी ट्रेनिंग में आने वाली सामान्य चुनौतियां
कई बच्चों को इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-
कुछ बच्चे पहले तैयार दिखते हैं लेकिन अचानक पॉटी इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं। इसे रिग्रेशन कहते हैं, जो सामान्य है। यदि ऐसा हो कुछ दिन डायपर का इस्तेमाल करें, फिर दोबारा धीरे-धीरे शुरुआत करें।
बच्चे को पर्याप्त रूप से पानी पिलाएं। इसके साथ ही कोशिश करें कि उन्हें फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन दें। इस तरह के आहार से कब्ज की शिकायत नहीं होती है। कब्ज पॉटी ट्रेनिंग को कठिन बना सकता है।
Disclaimer : ध्यान रखें कि बच्चों के लिए पॉटी ट्रेनिंग कोई परीक्षा नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया है। बच्चे को समय दें, धैर्य रखें और उसे आत्मविश्वास बनाने में मदद करें। सही माहौल और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ यह सफर आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए आसान और सुखद बन सकता है।