
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 8, 2026 7:30 AM IST
Medically Verified By: Dr. N. Varsha Monica Reddy
Single Child Parenting Tips
How to raise a happy single child: आजकल छोटे परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है और कई माता-पिता सिर्फ एक बच्चे की परवरिश करना पसंद कर रहे हैं। हालांकि, सिंगल चाइल्ड की परवरिश करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। अगर आप एक सिंगल बच्चे की परवरिश में कर रहे हैं, तो आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। मुख्य रूप से आप उन्हें एक सही माहौल और संतुलित पेरेंटिंग से आत्मविश्वासी, संवेदनशील और भावनात्मक रूप से मजबूत बना सकते हैं।
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एन वर्षा मोनिका रेड्डी का कहना है कि सिंगल चाइल्ड की परवरिश में माता-पिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बच्चे के भावनात्मक और सामाजिक विकास की जिम्मेदारी काफी हद तक सिर्फ परिवार पर ही होती है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा भावनात्मक और सामाजिक रूप से मजबूत बने, तो आपको कुछ चीजों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं इस बारे में-
सिंगल चाइल्ड को अक्सर अकेलापन महसूस हो सकता है। ऐसे में माता-पिता को रोजाना बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। इसके लिए आप कुछ समय के लिए उनके साथ खेलें। उनके साथ कहानियां पढ़ें। उनसे खुलकर बातचीत करें। उसकी पसंद-नापसंद समझें। इससे बच्चे और माता-पिता के बीच मजबूत बॉन्ड बनता है और बच्चा भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करता है।
भाई-बहन न होने की वजह से कई बार बच्चे में सोशल स्किल्स की कमी देखी जा सकती है। इसलिए उसे दूसरे बच्चों के साथ समय बिताने का मौका देना जरूरी है। इसके लिए आप अपने बच्चे के लिए प्लेडेट्स प्लान करें। ग्रुप एक्टिविटीज में शामिल करें। स्पोर्ट्स या हॉबी क्लास जॉइन करवाएं। इससे बच्चा शेयरिंग, टीमवर्क और दोस्ती जैसी चीजें सीखता है।
Image Credit : ChatGPT
एक ही बच्चा होने के कारण कई माता-पिता उसकी हर मांग तुरंत पूरी कर देते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार बच्चे को जिद्दी या डिपेंडेंट बना सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चे को सीमाएं और अनुशासन सिखाना भी उतना ही जरूरी है, जितना प्यार देना।
कम उम्र से ही बच्चे को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना शुरू करें। उन्हें अपना सामान व्यवस्थित करना सिखाएं, छोटे फैसले खुद लेना सिखाएं। साथ ही रोजमर्रा के कामों में मदद करने के लिए कहें। इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह जिम्मेदार बनता है।
सिंगल चाइल्ड कई बार माता-पिता के तनाव को जल्दी महसूस करने लगता है। इसलिए उसके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चे की बातें ध्यान से सुनें, उसकी भावनाओं को नजरअंदाज न करें। अपने बच्चे को खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे बच्चा अपनी भावनाएं बेहतर तरीके से व्यक्त करना सीखता है।
सिर्फ पढ़ाई पर जोर देना बच्चे पर दबाव बढ़ा सकता है। बच्चे के रूटीन में खेल, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज और आराम को भी जगह दें। साथ ही, माता-पिता को खुद भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए, क्योंकि बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं।
बच्चे की शारीरिक और मानसिक ग्रोथ सही तरीके से हो रही है या नहीं, इसके लिए नियमित पीडियाट्रिक चेकअप करवाना जरूरी है। इससे बच्चे के विकास से जुड़ी किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
Disclaimer : सिंगल चाइल्ड की परवरिश चुनौतीपूर्ण जरूर हो सकती है, लेकिन सही पेरेंटिंग, भावनात्मक सपोर्ट और संतुलित माहौल से बच्चे को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और आत्मविश्वासी बनाया जा सकता है। बच्चे को सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि समय, समझ और सही मार्गदर्शन देना सबसे ज्यादा जरूरी है।