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Written By: Pallavi Kumari | Updated : June 8, 2022 4:59 PM IST
बच्चों की परवरिश में माता-पिता का एक बड़ा हाथ होता है। दरअसल, वे बच्चों को एक सफल व्यक्तित्व के रूप में तैयार करते हैं, जिसमें शिक्षकों का भी एक बड़ा हाथ होता है। लेकिन कई बार माता-पिता और शिक्षक यानी कि बच्चों के टीचर कुछ ऐसी गलती कर देते हैं जो कि बच्चों में निगेटिव व्यक्ति बना देता है। तो, आज हम आपको ऐसी 5 बातों के बारे में बताएंगे जो कि माता-पिता को शिक्षक के सामने बच्चों के सामने नहीं (what parents should not say about kids in Pta meeting) कहनी चाहिए। नहीं तो ये उन्हें शरारती, बदमाश और निगेटिव बना सकता है।
पीटीए मीटिंग में कई बार माता-पिता अपने बच्चों को डांट भी देते हैं जो कि एक लगत व्यवहार है। इससे बच्चे के मन को चोट पहुंचता है और उन्हें लगता है कि उनके माता-पिता ने उन्हें सबके सामने डांट दिया। इससे उनके मन पर गलत प्रभाव पड़ता है और वे अपने माता-पिता पर भरोसा करना बंद कर देते हैं।
टीचर के सामने बच्चों की तारीफ कभी ना करें। इससे कई बार वे बदमाश हो जाते हैं और ओवर कॉन्फिडेंस में आ जाते हैं। इससे उनकी शैतानियां और बढ़ सकती है। साथ ही कई बार वे अपने टीचर को भी कुछ नहीं समझते हैं और उनकी इज्जत करना कम कर देते हैं।
पीटीए मीटिंग में अक्सर माता-पिता टीचर के सामने बच्चों की कमियां निकालते हैं और इससे वे अपना कॉन्फिडेंस खोने लगते हैं। इसके अलावा कई बार टीचर भी इस बात का फायदा उठाते हैं और वे बच्चों का डांटते समय उन्हें बार-बार उनके माता0पिता द्नारा बताई गई उनकी कमियों की याद दिलाते हैं
पीटीए मीटिंग के दौरान कई माता-पिता टीचर के सामने ही बच्चे पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं या बच्चों को मारने लगते हैं। इससे उनके मन पर गलत प्रभाव पड़ता है और वे गुस्स में आ कर निगेटिविटी की तरफ बढ़ने लगते हैं। अगर आपको किसी बात का बुरा भी लग रहा हो या फिर आपको लग रहा है बच्चों ने गलती की है तो उन्हें प्यार से समझाएं और घर जा कर उनसे बात करें।
बहुत से माता पिता अपने पीटीए मीटिंग में जाने के बाद बच्चों की कमियों को सुनने पर उन्हें डिमोटिवेट करने लगते हैं। उनसे कहते हैं कि आप जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे। फेल हो जाएंगे, कुछ नहीं होगा इत्यादि। ये सभी बातें बच्चों को परेशान करती हैं। इसलिए बात करते समय हमेशा से कहें कि आगे से नहीं होगा और ये समझदार है और कोशिश होगी कि चीजें बेहतर हों।
साथ ही अंत में, माता-पिता को अपने बच्चे के प्रदर्शन की तुलना किसी अन्य छात्र के प्रदर्शन से नहीं करनी चाहिए। बच्चे अलग तरह से सीखते हैं और सीखने का तरीका सबका अलग-अलग होता है। माता-पिता के लिए जरूरी ये है कि वे अपने बच्चों को समझें और उसी के अनुसार उन्हें पढ़ाएं। इससे बच्चों को तेजी से सीखने में मदद मिलेगी और उनका मोटिवेशन बना रहेगा।