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ऑटिज्म वाले बच्चों को किस उम्र से स्कूल भेज सकते हैं? एक्सपर्ट से जानें ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की देखभाल कैसे करें

World Autism Awareness Day: अक्सर कई माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि यदि बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, तो उसे स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है? आइए, एक्सपर्ट से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

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Written By: priya mishra | Published : April 2, 2025 11:55 AM IST

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Medically Verified By: Dr Ankit Prasad

Right Age To Send An Autistic Child To School: क्या आपका बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है? और आप उसे स्कूल भेजने से घबरा रहे हैं कि वह स्कूल में कैसे बिहेव करेगा, उसके साथ वाले बच्चे उसके साथ कैसे बिहेव करेंगे और क्या वह आपकी गैरमौजूदगी में लोगों से डील कर पाएगा? यदि हां, तो आज हम आपको इस लेख के जरिए बताएंगे कि यदि कोई बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित हैं, तो उसे स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है। साथ ही, यदि आप ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को स्कूल भेजना चाहते हैं, तो इस दौरान आप अपने बच्चे की देखभाल कैसे कर सकते हैं। आपको बता दें कि ऑटिज्म एक विकास संबंधित समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहा जाता है। इससे पीड़ित बच्चों को सही तरीके से व्यवहार करने, पढ़ने-लिखने और अन्य लोगों के साथ मेल-मिलाप करने में परेशानी होती है। इससे बच्चे की सोचने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑटिज़्म से पीड़ित में बच्चों का दिमाग अन्य बच्चों की तुलना में अलग तरीके से काम करता है। हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (WAAD) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के बारे में जागरूकता, स्वीकृति और समझ को बढ़ाना है। यदि आपका बच्चा भी इस समस्या से जूझ रहा है, तो घबराइये नहीं। आइए, इस लेख में नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक्स कंसल्टेंट, डॉ अंकित प्रसाद से जानते हैं कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को किस उम्र से स्‍कूल भेज सकते हैं और ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की देखभाल कैसे करें?

पहले बच्चे के विकास पर ध्यान दें

डॉ अंकित बताते हैं कि यदि आपका बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित हैं, तो पहले उसके विकास पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है, न कि उसे स्कूल भेजना। आपके लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि आप अपने बच्चे के विकास पर ध्यान दें, ताकि उसके अंदर सोचने व समझने की क्षमता विकसित हो सके।

स्कूल कब भेज सकते हैं?

बच्चे को स्कूल भेजना उसके व्यक्तिगत विकास पर निर्भर करता है। इसलिए पहले बच्चे को चीजों पर फोकस करने और उसकी संवाद शैली को बेहतर बनाने पर ध्यान दें। इसके बाद यदि आपका बच्चा खुद को सामाजिक वातावरण में ढाल पा रहा है या कुछ हद तक आत्मनिर्भर है, तो आप अपने बच्चे को स्कूल भेजने का विचार कर सकते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, 3 से 5 वर्ष की उम्र में बच्चे के लिए थेरेपी और स्पेशल एजुकेशन शुरू करना लाभदायक होता है।

क्या बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी है?

इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की अलग-अलग जरूरतें होती हैं। इसलिए माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि कौन-सा वातावरण उनके बच्चे के विकास के लिए लाभकारी है। हालांकि, ऑटिज़्म से पीड़ित कुछ बच्चों को पढ़ने-लिखने में परेशानी भी होती है। लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए। इससे उन्हें सामाजिक कौशल, आत्मनिर्भरता और संचार क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है।

स्कूल भेजने की सही उम्र

वैसे तो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए स्कूल भेजने की उम्र का कोई विशेष क्राइटेरिया नहीं है। लेकिन यदि आप फिर भी अपने बच्चे को जल्दी स्कूल भेज देते हैं, तो हो सकता है कि वह बच्चों के बीच रहने के लिए तैयार न हों। ऐसे में, बच्चे स्कूल में जरूरी कौशल को विकसित नहीं कर पाएंगे। क्योंकि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे अमूमन अपनी ही धुन में ही रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए स्कूल भेजने से पहले अपने बच्चे के व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें और उसके बाद ही उन्हें स्कूल भेजने का फैसला करें।

स्कूल भेजने से पहले करें यह तैयारी

यदि आप वाकई अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहते हैं, तो उन्हें स्कूल भेजने से पहले आपको उनकी कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर करना होगा। साथ ही, बच्चे को अकेले खाना खिलाना भी सीखाएं। अक्सर ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की भावनाओं को नियंत्रित करना मुश्किल होता है, इसलिए सबसे पहले इस पर काम करें। इसके अतिरिक्त बच्चे को भीड़ में रहने और स्कूल के माहौल में ढालने के लिए सहज बनाए, ताकि आपके बच्चे को बाकी बच्चों के साथ घुलने-मिलने में कोई परेशानी न हों।

टीचर भी रहें तैयार

इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को  संभालने के लिए टीचर की भी अहम भूमिका होती है। इसलिए एक टीचर को अपने बच्चों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जहां बच्चा सुरक्षित महसूस कर सके। साथ ही, टीचर को बच्चों की उपलब्धियां को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ सकें। इसके अतिरिक्त टीचर प्रत्येक बच्चे की जरूरतों का ध्यान रखें और उनके अनुसार ही उनकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहे।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।