क्या होता है Emotionally Immature पेरेंट्स? इससे बच्चे की परवरिश पर क्या प्रभाव पड़ता है

Emotionally Immature Parenting: पेरेंट्स भावनात्मक और मानसिक रूप से कैसे हैं, उससे उनके बच्चे की परवरिश पर गहरा असर पड़ता है। कुछ पेरेंट्स इमोशनली इमेच्योर होते हैं और उन्हें इस बारे में खुद ही पता नहीं होता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : January 19, 2026 6:44 PM IST

What is Emotionally Immature Parent: हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहद ही प्यार करते हैं और उनकी परवरिश भी बड़े ही लाड़ व प्यार से करते हैं। लेकिन ध्यान रहे एक अच्छी परवरिश के लिए केवल प्यार ही काफी नहीं है, बल्कि पेरेंट्स के अंदर भावनात्मक समझ और परिपक्वता भी होनी चाहिए। ताकि वह बच्चों के मन को बेहतर ढंग से पढ़ पाए और उनकी परेशानियों को समझ कर एक सही निर्णय के साथ उनकी जिंदगी में अहम भूमिका निभा पाए। लेकिन जब माता-पिता खुद ही इमोशनली इमैच्योर होते हैं, तो ऐसे में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। यही नहीं इससे बच्चे की निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है। जिससे बच्चा हमेशा सहमा हुआ रहता है और वह समाज के साथ मानसिक व भावनात्मक रूप से भी कभी जुड़ाव महसूस नहीं कर पाता है।

क्या है Emotionally Immature पेरेंट्स

इमोशनली मेच्योर पेरेंट्स उन्हें कहा जाता है, जो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और बच्चों की भी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ नहीं पाते हैं। Immature parents हमेशा गुस्से में भरे रहते हैं और उन्हें छोटी-छोटी गलतियां भी बर्दाश्त नहीं होती है। ऐसे में वह अपने बच्चों से भावनात्मक सहारा देने की उम्मीद करते हैं। यह जिम्मेदारी एक पेरेंट्स की होती है।

इमोशनल इमोशनली पेरेंट्स के लक्षण

ऐसे पेरेंट्स कभी भी अपने बच्चों की भावनाओं को नहीं समझते हैं और उनकी भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। साथ ही बच्चे की उपलब्धियों को कभी भी सहन नहीं करते हैं और छोटी सी गलती होने पर बच्चों के साथ बुरी तरह से बर्ताव करते हैं। ऐसे पेरेंट्स कई बार वह अपने बच्चों को दोषी ठहराकर खुद की जिम्मेदारी से बचते हैं।

बच्चों के भावनात्मक सेहत पर क्या पड़ता है प्रभाव

जिन बच्चों के पेरेंट्स इमोशनली इमैच्योर होते हैं। जब वे बच्चे बड़े होते हैं, तो अपने लिए अपने लिए निर्णय लेने में कठिनाई होती है। साथ ही वह बच्चे कभी भी समाज के साथ घुल मिल नहीं पाते हैं। ऐसे में उन्हें सोशल एंजायटी, डिप्रैशन और लॉ कॉन्फिडेंस फील होता है। साथ ही वह अपने लोगों के साथ कभी भी जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते हैं।

बच्चों के व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव

जिन बच्चों के पेरेंट्स इन मेच्योर होते हैं। उनके बच्चे जब बड़े होते हैं, तो वह या तो बहुत ज्यादा आज्ञाकारी बन जाते हैं, ताकि उनके पेरेंट्स उनसे नाराज ना हो या कुछ बच्चे का व्यवहार बिल्कुल नकारात्मक हो जाता है। जिसके कारण उन्हें लोगों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने में कठिनाइयां आती है। साथ ही वह बड़े होकर अन्य लोगों को भी नहीं समझते हैं। या कह ले वे बच्चे भी अपने पेरेंट्स जैसा व्यवहार दूसरे लोगों के साथ करते हैं।

कैसे करें सुधार

अगर कोई बच्चा इमोशनली इमैच्योर पेरेंट्स के साथ बड़ा हुआ है, तो ऐसे बच्चों को खुद में सुधार करने के लिए अपनी भावनाओं को पहचानना होगा और समझना होगा कि वह किस चीज में बेहतर है और किस चीज में बेहतर नहीं। अपने अंदर सकारात्मक सुधार लाने के लिए बच्चे काउंसलिंग या थेरेपी की भी मदद ले सकते हैं या आत्म चिंतन करके खुद में मैं भी सुधार ला सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।