
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : April 15, 2026 8:58 PM IST
tips for good parenting in hindi
Balance Parenting Kya hai: बच्चों के लिए कितनी आजादी आदर्श है? इसपर हर मां का उत्तर अलग ही होगा। बच्चों की परवरिश करने वाले हर माता-पिता का सबसे बड़ा सवाल भी यही होता है कि उन्हें कितनी स्वतंत्रता दी जाए। कुछ माता-पिता अक्सर ही अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं, तो कुछ खुली आजादी को जरूरी मानते हैं। हो सकता है आप भी इन दोनों मतों में से किसी एक को ही चुनें। लेकिन सच्चाई इन दोनों के बीच कहीं संतुलन में छिपी है। अमेरिका की 'साइकोलॉजी टुडे' का एक हालिया अध्ययन कहता है- सही मार्गदर्शन के साथ दी गई स्वतंत्रता बच्चों को आत्मनिर्भर, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी बनाती है। वहीं जरूरत से ज्यादा नियंत्रण उनके विकास को सीमित कर सकता है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बच्चों को सही दिशा देते हुए उन्हें खुद सीखने और आगे बढ़ने का अवसर दें। कैसे? आइए हम आपको बताते हैं।
माता-पिता होने के नाते बच्चों को अपनी बात कहने और असहमति जताने का मौका देना बेहद जरूरी है। जब आप हर फैसला खुद लेने लगते हैं, तो बच्चे अंदर ही अंदर दबाव महसूस करते हैं। ऐसे में उनकी राय को महत्व दें। उन्हें सिखाएं कि वे अपनी बात सम्मानपूर्वक रूप से रखें और दूसरों की बात भी ध्यान से सुनें। इससे उनमें संवाद कौशल विकसित होता है और वे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार व्यक्त करना सीख पाते हैं।
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आप बच्चों को ऐसा माहौल दें, जहां वे बिना डर के अपने विचार साझा कर सकें। साथ ही उन्हें अपनी पसंद-नापसंद चुनने की स्वतंत्रता दें, लेकिन साथ ही यह भी समझाएं कि हर आजादी के साथ जिम्मेदारी जुड़ी होती है। जब बच्चे इस संतुलन को समझ पाएंगे, तो वे सही और गलत के बीच फर्क करना सीख पाएंगे। इससे उनका मानसिक और भावनात्मक विकास मजबूत होगा और वे जीवन में बेहतर फैसले ले पाएंगे।
आप बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार चीजें चुनने का अवसर दें। चाहे वह पढ़ाई हो, खेल हो या कोई शौक उन्हें खुद चुनने के कि उनके लिए क्या सही है। अगर वे किसी चीज में असफल भी होते हैं, तो यह उनके सीखने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में माता-पिता होने के नाते आपका काम उन्हें रोकना नहीं, बल्कि सही दिशा में मार्गदर्शन करना है। इससे बच्चे नए प्रयोग करने से नहीं डरेंगे नहीं और आत्मनिर्भर बनते जाएंगे।
सबसे जरूरी है कि आप बच्चों को हर मुश्किल से बचाने की बजाय उन्हें चुनौतियों का सामना करना सिखाएं। ऐसे में अगर वे किसी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, तो उन्हें डांटने के बजाय प्रेरित करें। उन्हें समझाएं कि असफलता भी सफलता की राह का हिस्सा है। जब बच्चे खुद समस्याओं का हल ढूंढते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास और दृढ़ता बढ़ती है। यही गुण उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और मजबूत व्यक्तित्व बनाने में मदद करते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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