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Written By: Pallavi Kumari | Updated : June 17, 2022 4:54 PM IST
आज के बच्चे माता-पिता की इज्जत क्यों नहीं करते हैं (What causes a child to disrespect their parents)? ये सवाल आज कल कई माता-पिता पूछते हैं लेकिन आपको यह जान कर हैरानी हो कती है कि ये कमी बच्चों की नहीं होती बल्कि माता-पिता और उनके परवरिश की होती है। दरअसल, कुछ माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों को इस तरह से पालते हैं कि वे धीमे-धीमे विद्रोही स्वभाव के और निडर हो जाते हैं (How to Deal with A Defiant Child)। ऐसे बच्चे जब थोड़े बड़े होने लगते हैं तो पहले वे अपने माता-पिता की बात नहीं मानते हैं और फिर उनकी (Disrespectful Children) करना भी कम कर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बचपन से ही परवरिश करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। तो, आइए आज हम आपको ऐसी 3 बातों के बारे में बताते हैं जो माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को बोल देते हैं और धीमे-धीमे बड़े हो कर यही बच्चे अपने माता-पिता की इज्जत नहीं करते हैं।
माता-पिता बच्चों को बचपन से कई बार यह बात कहते हैं। दरअसल, ये बात गलत है क्योंकि इससे बच्चों का मन दुखता है। इसके इतर बच्चों को लगता है कि माता-पिता तो उनकी भावनाओं को समझते नहीं हैं और उन्हें डांट कर चुप करवा देते हैं। जबकि माता-पिताको समझना चाहिए कि वे रो रहे हैं क्योंकि वे परेशान हैं। ऐसे में जब आप अपने बच्चे को ये बात कहते हैं तो नकारात्मक भावनाओं से घिर जाता है और फिर आपको कुछ भी नहीं बताता और मन ही मन आपकी इज्जत करना कम देता है।
अपने बच्चों से नकारात्मक या आक्रामक तरीके से बर्ताव करना उन्हें बचपन से ही डरा हुआ बना देता है। लेकिन, जब वे बड़े होने लगते हैं तो यही बातें उन्हें विद्रोही बना देती है और वे आपकी इज्जत करना कम कर देते हैं। साथ ही बातें बच्चों में निगेटिविटी भी लाता है। उन्हें लगता है कि उन्होंने कुछ किया है और आपको इस तरह से निराश किया है कि वे कभी भी इसकी भरपाई नहीं कर सकते। इससे वे तनावग्रस्त और निराश हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वे कुछ अच्छा भी करेंगे तो आप उन्हें यही कहेंगे।
बच्चों के बीच में तुलना पैदा करना और हमेशा उनमें कंपैरिजन (comparison) करना, उन्हें बचपन से निराश करने लगता है। साथ ही वे मन ही मन आपके प्रति गलत छवि बना लेते हैं और आपकी बातों की उनकी नजरों में कोई भी अहमियत नहीं रहती है। इसलिए हमें कभी भी अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों या उनके भाई-बहनों से नहीं करनी चाहिए। आपका बच्चा अद्वितीय है और वह कभी दूसरा व्यक्ति नहीं बन पाएगा। ये बातें कहकर, आप उसे यह महसूस करा रहे हैं कि कोई दूसरा व्यक्ति उनसे बेहतर है। यह कई मायनों में परिणामस्वरूप उस व्यक्ति को नापसंद या नफरत करने का कारण बन सकता है और उनमें निगेटिविटी भर सकता है।
इसलिए उन बातों से अवगत रहें जो आप अपने बच्चों से कह रहे हैं। दरअसल, आप जितना देख सकते हैं बच्च उससे कहीं अधिक नाजुक होते हैं। वे थोड़े चिड़चिड़े हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको उनके साथ इस तरह से व्यवहार करें।