इन 5 कारणों से बच्चों की आंखें बार-बार हो रही हैं लाल, रोशनी जाने से पहले कराएं जांच

Pink Eye in Kids :  बच्चों की आंखे बार-बार लाल होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं। आइए जानते हैं इन वजहों के बारे में विस्तार से-

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 16, 2024 10:35 AM IST

Pink Eye in Kids : बच्चों की आंखें काफी ज्यादा कोमल होती हैं। इसलिए उनकी आंखों की देखभाल करनी बहुत ही जरूरी होती है। मुख्य रूप से अगर आपका बच्चा काफी छोटा है और बार-बार गंदे हाथों से आंखों को छूता है, तो इससे उनकी आंखों में कई तरह के संक्रमण और बैक्टीरिया अटैक करते हैं। ऐसी स्थिति में आंखें खराब हो सकती हैं। इसके अलावा बच्चों की आंखें बार-बार लाल होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं। आइए जानते हैं बच्चों की आंखें लाल होने के पीछे की वजह क्या है?

बच्चों को पिंक आई के लक्षण क्या हैं? - Symptoms of Pink Eye 

  1. एक या दोनों आंखें लाल होना
  2. आंखों में खुजली होना।
  3. दोनों आंखों में किरकिरापन महसूस होना।
  4. एक या दोनों आंखों से स्राव होना, जो रात के दौरान एक पपड़ी बना देता है। 
  5. आंखें फड़फड़ना
  6. प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, इत्यादि।

बच्चों की आंखें लाल होने के पीछे की वजह? - Causes Behind Pink Eye

  1. वायरस हो सकता है बड़ा कारण
  2. बैक्टीरिया की परेशानी
  3. एलर्जी की शिकायत
  4. आंखों में किसी तरह का केमिकल पहुंचना
  5. आंख में कोई विदेशी वस्तु जाना, इत्यादि।

आंखें गुलाबी होने के जोखिम - Risk Factors of Pink Eye

गुलाबी आंख के जोखिम कारकों में शामिल हैं-

कंजंक्टिवाइटिस के वायरल या बैक्टीरियल रूप से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आना।

किसी ऐसी चीज़ के संपर्क में आना, जिससे आपको एलर्जी है हो। इससे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस का खतरा रहता है।

कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करना भी गुलाबी आंखों के जोखिम बढ़ा सकते हैं। 

बार-बार आंखें लाल होने पर क्या करें?

  1. बच्चों को आंखों को रब करने से रोकें।
  2. बार-बार बच्चों के हाथ धुलाएं।
  3. प्रतिदिन एक साफ तौलिया और वॉशक्लॉथ का प्रयोग करें।
  4. तौलिए या वॉशक्लॉथ शेयर न करें।
  5. बच्चों की आंखों में केमिकलयुक्त काजल न लगाएं। इससे उनकी आंखें खराब हो सकती हैं।

Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।

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