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बेबी स्ट्रॉलर पर चिपके पॉल्यूटेंट और धूल मिट्टी से बच्चे पड़ सकते हैं बीमार, इस तरह करें केयर

Minimize Pollution Exposure For Infants क्या आप भी अपने बच्चे को प्रैम में कवर करके घर से बाहर लेकर जाते हैं? अगर हां तो आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि पॉल्यूशन आपके बच्चे के लंग्स को खराब कर सकता है। आइए आपको बताते हैं बच्चे की केयर कैसे करें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : January 8, 2026 5:42 PM IST

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Medically Verified By: Dr Piyush Goel

Bachho Ko Pollution Se Kaise Bachaye: शहरों का एयर पॉल्यूशन आज एक रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्या बन चुका है और इसका असर लोगों की सोच से कहीं पहले ही शुरू हो जाता है। खासकर अगर हम प्रैम और पुश चेयर में सफर करने वाले शिशुओं की बात करें तो यह सबसे अधिक प्रभावित समूहों में आते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी सांस लेने की जो ऊंचाई होती है वो सीधे वाहनों के एग्जॉस्ट और सड़क-लेवल के उत्सर्जन के करीब होती है। ऐसे में बच्चे को कवर रखने के बाद भी उनके प्रैम पर धूल-मिट्टी चिपक जाती है और हेल्थ को नुकसान पहुंचाती है।

फेफड़ों के विकास के शुरुआती स्टेज में होने और वयस्कों की तुलना में तेज सांस लेने की दर के कारण, बच्चे अपने शरीर के वजन के अनुपात में अधिक हवा अंदर लेते हैं। इसी वजह से रोजाना बाहर ले जाते समय उन्हें प्रदूषण से बचाना बेहद जरूरी हो जाता है। आइए हम नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट- पल्मोनोलॉजी डॉक्टर पीयूष गोयल से जानते हैं कि बेबी प्रैम से चिपके प्रदूषण के कण और धूल मिट्टी से बच्चों को बीमार होने से कैसे बचाया जा सकता है।

क्यों जरूरी है प्रैम कवर का इस्तेमाल?

अध्ययनों से पता चला है कि बीजी सड़कों पर फाइन पार्टिकुलेट मैटर यानी कि PM2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ब्लैक कार्बन जैसे हानिकारक प्रदूषकों की मात्रा नीचे अधिक होती है। ट्रैफिक जाम या रुकी हुई गाड़ियों के पास खड़े प्रैम में बैठे बच्चे सीधे धुएं के संपर्क में आ सकते हैं। हालांकि प्रदूषित रास्तों से बचना सबसे बेहतर उपाय है, लेकिन इतनी ज्यादा पॉल्यूशन वाली आबादी वाले शहरों में यह हमेशा संभव नहीं होता। इसी कारण कई माता-पिता अपने बच्चे के चारों ओर सेफ्टी के तौर पर बाहर से कवर करने वाले प्रैम ले रहे हैं। 

क्या बच्चे को पॉल्यूशन से बचाने के लिए प्रैम कवर लगाना सही है?

हालांकि सभी तरह के कवर सेफ नहीं होते हैं, क्योंकि प्रदूषित हवा को रोकने के लिए प्रैम को मोटे कंबलों या प्लास्टिक शीट से ढक देना एक आम तरीका हो सकता है, लेकिन बच्चे की सेहत के लिए तो यह खतरनाक गलती हो सकती है। ऐसे तरीके हवा के प्रवाह को गंभीर रूप से बाधित कर सकते हैं, गर्मी को अंदर रोक सकते हैं और प्रदूषकों को बाहर रखने के बजाय प्रैम के अंदर ही फंसा सकते हैं।

इससे खराब वेंटिलेशन से ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ने से और ऑक्सीजन का संचार कम होने से शिशुओं की सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए हमारे याद रखें कि प्रैम को पूरी तरह से बंद करके न ढकें, बल्कि ताजी हवा के फ्लो को बनाए रखते हुए सीधे प्रदूषण के संपर्क को कम करना करें।

डॉक्टर से जानें कैसे चुनें सही बैगी बैरियर

बच्चों के प्रैम पर लगाने वाले कवर को बैगी बैरियर कहा जाता है। सबसे सेफ बगी बैरियर में 3 जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे- सांस लेने योग्य होना, फिल्ट्रेशन और पर्याप्त जगह। खास तौर पर बनाए गए, सांस लेने लायक प्रैम कवर जो बारीक जाली या एयर-पर्मिएबल सामग्री से बने होते हैं, अस्थायी या घरेलू उपायों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित होते हैं। ये कपड़े इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि बच्चे तक पहुंचने वाले पॉल्यूटेंट की मात्रा कम हो जाए, जबकि हवा का लगातार प्रवाह बना रहे। इससे पॉल्यूटेंट का असर घटता है और बच्चा घुटन में रह सकता है।

बच्चे को प्रैम में घुमाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि कवर और बच्चे के चेहरे के बीच जगह होनी चाहिए। फ्रेम या प्रैम के स्ट्रक्चर द्वारा सहारा दिए गए कवर एक बफर जोन बनाते हैं, जिससे हवा का संचार होता रहता है और कपड़ा सीधे शिशु के चेहरे पर नहीं टिकता। यह दूरी सांस लेने में रुकावट के जोखिम को कम करती है और प्रैम के अंदर तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

प्रदूषण आमतौर पर किनारों से अंदर आता है, खासकर जब सड़क के साथ-साथ चला जा रहा हो। ऐसे साइड कवर जो सीधे एग्जॉस्ट के संपर्क को रोकते हैं लेकिन ऊपर या पीछे से खुले रहते हैं। वेंटिलेशन और आगे देखने की क्षमता को इफेक्ट किए बिना पॉल्यूटेंट को कम कर देते हैं।

बच्चे को पॉल्यूशन से कैसे बचाएं

बैगी बैरियर का सबसे अच्छा असर तब होता है जब उसे रोजमर्रा की समझदारी भरी आदतों के साथ अपनाया जाए। जैसे शांत सड़कों का चयन करना, कम ट्रैफिक वाले टाइम पर बाहर निकलना, रुकी हुई गाड़ियों के पास खड़े रहने के बजाय प्रैम को चलाते रहें और बच्चे को ट्रैफिक की दिशा से उल्टी ओर बैठाना आदि। ये सभी कदम पॉल्यूटेंट के संपर्क को घटा सकते हैं। रास्ते और समय में छोटे-छोटे बदलाव भी लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकते हैं।

सबसे पहले सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। देखभाल करने वालों को यह देखना चाहिए कि प्रैम के अंदर हवा बिना रुकावट आ रही हो और बच्चा आसानी से दिखाई दे रहा हो। अगर शिशु असामान्य रूप से गर्म, बेचैन या सुस्त लगे, तो कवर को तुरंत हटा देना चाहिए।

Highlights

  • प्रैम में घूमने वाले बच्चों में पॉल्यूशन से बीमार होने का खतरा अधिक होता है।
  • प्रैम को कवर करने वाला बैगी बैरियर अच्छी क्वालिटी का चुनें।
  • ध्यान दें कि प्रैम को कवर करने बाद बच्चे को असहजता तो महसूस नहीं हो रही।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

पॉल्यूशन से बचने के लिए क्या करें?

प्रदूषण से बचने के लिए N95 मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर और पौधे (तुलसी, मनी प्लांट) लगाएं।

क्या प्रदूषण से सीने में दर्द हो सकता है?

जी हां। खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में आने से धमनियों में ऐंठन हो सकती है, प्रदूषण और रक्तचाप बढ़ सकता है, और सीने में दर्द या यहां तक ​​कि दिल का दौरा भी पड़ सकता है।

क्या प्रदूषण से दिल की समस्या हो सकती है?

हां, इसके अलावा उच्च रक्तचाप, हृदय की लय में परिवर्तन, रक्त के थक्के जमने संबंधी विकार, कोरोनरी धमनी रोग और स्ट्रोक शामिल हैं।

पॉल्यूशन से कौन सी बीमारी होती है?

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली सबसे आम बीमारियों में अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियाँ, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हृदय संबंधी विकार जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ शामिल हैं।