सफेद दाग के कारण स्कूल में बच्चों का मजाक उड़ता है? सारे काम छोड़कर पेरेंट्स पढ़ें ये 4 टिप्स

Vitiligo day 2025: विटिलिगो की समस्या छोटे बच्चों में भी देखी जा सकती है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है और इसके बारे में हम आपको इस लेख में खास जानकारी देंगे।

WrittenBy

Written By: Mukesh Sharma | Updated : June 25, 2025 5:44 PM IST

Vitiligo in Children: स्किन पर बनने वाले ये सफेद दाग स्किन से जुड़ी एक ऑटोइम्यून कंडीशन है और यह बीमारी किसी भी उम्र देखी जा सकती है। बच्चों में भी विटिलिगो के मामले काफी ज्यादा देखने को मिल जाते है। यह ऐसी बीमारी है, जिससे किसी प्रकार का दर्द तो नहीं होता लेकिन इससे मानसिक स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ता है और बच्चों में इसके कारण सेल्फ कॉन्फिडेंस की काफी कमी देखी जाती है। स्कूल में पढ़ाई के दौरान व किसी प्रतियोगिता में विटिलिगो से ग्रस्त बच्चे कई बार खुलकर अपना प्रदर्शन नहीं दे पाते हैं। लेकिन कुछ चीजें हैं, जो पेरेंट्स कर सकते हैं और इससे बच्चों का आत्मविश्वास भी कम नहीं होगा। यह लेख खासतौर पर उन पेरेंट्स के लिए है, जिनके बच्चे सफेद दाग की बीमारी यानी विटिलिगो से जूझ रहे हैं।

उसे बताएं वह कितना स्पेशल है

बच्चा खुद को देखकर अक्सर ऐसा महसूस कर सकता है कि वह सबसे अलग है और वह बाकी बच्चों जैसा नहीं दिखता है। लेकिन उसके मन में यह बात बैठने ना दें और उसे बताएं वह उन सभी के लिए कितना स्पेशल है। वह सबसे अलग नहीं बल्कि सबसे स्पेशल है। अगर आप उसे ऐसे समझाएंगे तो उसे अलग महसूस नहीं होगा।

उसके काम की प्रशंसा करें

कई बार आत्मविश्वास की कमी होने के कारण बच्चे कोई काम ठीक से नहीं कर पाता है या फिर उस काम में पूरी तरह से मन नहीं लगा पाता है। लेकिन बच्चे के द्वारा की गई मेहनत की प्रशंसा करें और उसे बताएं कि उसने खूब मेहनत की है और वह अगली बार इसे और अच्छे से कर पाएगा।

रोज उसमें आत्मविश्वास भरें

सफेद दाग से ग्रसित बच्चे में आत्मविश्वास भरना जरूरी है और अगर उसके पेरेंट्स जरूरत पड़ने पर उसमें आत्मविश्वास भरते रहते हैं तो बच्चा भरोसा नहीं हारता है। बड़ा होने के बाद भी उसका आत्मविश्वास बना रहता है और वह जैसा भी दिखता है, खुद को स्वीकार कर लेता है और उस पर गर्व करता है।

खुलकर बात करें

कई बार बच्चे के मन में बहुत से सवाल होते हैं, कि वह ऐसा क्यों है सबसे अलग क्यों दिखता है लेकिन वह खुलकर इस बारे में बात नहीं कर पाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप उसे समझाएं और उसके साथ खुलकर बात करें। जब आप बच्चे के साथ खुलकर बात करेंगे तो वह भी आपके खुलने लगेगा और उसका मन हल्का हो जाएगा।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।