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Written By: Anshumala | Updated : June 7, 2020 10:45 PM IST
Viral Infection in Kids: मौसम में बदलाव और बारिश होने के कारण बच्चे सबसे जल्दी बीमार पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें खास देखभाल की जरूरत होती है। बड़ों के मुकाबले वायरल इंफेक्शन (Viral Infection in kids) या वायरल फीवर (Viral Fever in kids) बच्चों को अधिक होता है। दरअसल, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों मुकाबले अधिक मजबूत नहीं होती है, इसलिए वे जल्दी किसी भी संक्रमण के शिकार हो जाते हैं।
छोटे बच्चों को सर्दी-जुकाम, बुखार, लाल आंखें, आंखों से पानी आना, गले में खराश, रेड रैशेज, डायरिया जैसे लक्षण यदि चार-पांच दिनों तक नजर आए तो डॉक्टर से जरूर दिखा लें। ये लक्षण वायरल इंफेक्शस के हो सकते हैं। बच्चों को आप वायरल इंफेक्शंस से बचाने (Viral Infection in Kids) के लिए नीचे बताए गए कुछ उपायों को भी जरूर अपनाकर देखें।
अक्सर देखा गया है कि पेरेंट्स अपने बच्चे की बहती नाक और चेहरे के बार-बार पोंछने के लिए एक सूती रूमाल साथ रखते हैं, जो बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसके चलते बच्चे हर बार फिर से वायरस के संपर्क में आ रहे होते हैं। कपड़े के रूमाल के मुकाबले गीला व मेडिकेटिड स्किनकेयर वाइप्स और टिश्यू पेपर त्वचा पर सौम्य अहसास कराते हैं। साथ ही इसका सबसे अच्छा पहलू ये है कि वे (वाइप्स व टिश्यू पेपर) उपयोग करने के बाद आसानी से फेंके जा सकते हैं। सबसे अहम बात, पेरेंट्स को तत्काल अपने हाथ साबुन व पानी से अच्छी तरह धोने चाहिए, जिससे उनके हाथों से चिपके हानिकारक बेक्टीरिया धुलकर निकल जाएं।
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यह बात हर कोई जानता है कि बच्चों और नवजातों को घातक बीमारियों व वायरसों से बचाने का सबसे बढ़िया और प्रभावी रास्ता टीकाकरण कराना है। आज भी, पेरेंट्स अपने बच्चों की बेहतरी के लिए महत्वपूर्ण होने के बावजूद इस टीकाकरण की अनदेखी करते हैं। केवल जब बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो पेरेंट्स बच्चों के लेकर अस्पताल या डॉक्टर के पास दौड़ते हैं। लेकिन इसका परिणाम बीमारी के घातक हो जाने तथा अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने के रूप में देखना पड़ता है। इसलिए, बच्चों के शुरुआती जीवन में ही डिप्थीरिया, टेटनस, हूपिंग कफ (पर्टुसिस) (DTaP),पोलियो (IPV),रोटावायरस (RV), इन्फ्लुएंजा (फ्लू), खसरा (मीजल्स), कंठमाला (ममप्स), रूबेला (MMR) आदि बीमारियों का अनिवार्य टीकाकरण करा लेना चाहिए।
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हानिकारक बेक्टीरिया और वायरसों के लिए मच्छर, मक्खी, चिंचड़ी, पिस्सू और कांक्रोच सबसे सक्रिय वाहक होते हैं तथा बच्चे इनका आसानी से निशाना बन जाते हैं। भले ही घर साफ-सुथरा हो, लेकिन ये कीड़े हमेशा घरों में घुसने और हमला करने का तरीका ढूंढते हैं। इसलिए, माता-पिता को अपने घरों में और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुछ अतिरिक्त निवारक उपाय करने चाहिए। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए घर के अंदर किसी भी बंद नाली या चैनल और घर के आसपास जमा पानी की जांच करें। सुबह और शाम के समय अपने बच्चों को घर से बाहर कम ही निकलने दें। मच्छरों के पैदा होने पर रोक लगाने के लिए अपने अड़ोस-पड़ोस को कूड़े, फेंके गए कंटेनरों और गंदगी के ढेर से मुक्त रखें।
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वायरल संक्रमणों से बचाव के सबसे अजेय तरीकों में से एक है बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को मजबूत करना। इसके लिए सबसे सही तरीका है अच्छा खानपान। नवजात शिशुओं के लिए उनकी मां का दूध, जबकि सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए बहुत सारे फल और सब्जियां सबसे अच्छा भोजन हैं। बच्चों के शरीर को पानी, दूध और फलों के रस के जरिए ऊर्जावान बनाए रखें। उनका स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन और सोडा, चिप्स, चॉकलेट व कुकीज जैसे स्नेक्स का सेवन सीमित करें। साथ ही बच्चों के खानपान में दलिया और अनाज की खपत बढ़ाएं।
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