Blue Whale Challenge के खतरे से बच्चों को बचाने के लिए उन्हें सिखाएं ये योग और मेडिटेशन

बच्चों को इस मौत के खेल से बचाने के लिए उनकी ऐसे करें मदद!

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : September 20, 2017 4:13 PM IST

ब्लू व्हेल चैलेंज एक घातक कंप्यूटर इंटरनेट गेम है जिसके कारण दुनियाभर में लगभग 150 से ज्यादा युवाओं की मौत हो चुकी है। इस खेल से जुड़ी सबसे खतरनाक बात यह है कि इस खेल को जीतने के लिए खुद को मारना पड़ता है। पिछले कुछ महीनों में कई पेरेंट्स ने अपने बच्चों को खो दिया है। यह एक चिंता का विषय है कि आजकल युवा इस तरह के खतरनाक खेलों की तरफ प्रभावित हो रहे हैं। वास्तव में यह पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वो अपने बच्चों को इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने से रोकें। दी आर्ट ऑफ़ लिविंग में किड्स एंड टीन प्रोग्राम की डायरेक्टर श्रेया चुग  आपको कुछ टिप्स दे रही हैं, जिनसे आपको अपने बच्चों को इस तरह के मामलों से बचाने में मदद मिल सकती है।

बच्चों में प्राण या जीवन शक्ति बढ़ाएं

शरीर में प्राण या एनर्जी लेवल बढ़ने से आप अति उत्साही, खुश, रचनात्मक, सकारात्मक और आत्मविश्वास महसूस करते हैं। प्राण बढ़ने से नकारात्मक भावनाओं के जाल में फंसना असंभव है। यहां तक कि अगर नकारात्मक विचार और भावनाएं उठते हैं, तो वे लंबे समय तक नहीं रहती हैं। इसलिए, शरीर में ऊर्जा स्तर में वृद्धि करना बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न श्वास और योग व्यायाम शरीर में ऊर्जा को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। सही तरह सांस लेने से फेफड़ों की क्षमता में सुधार होता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है, इस प्रकार शरीर और दिमाग को उत्साहित होता है। ऐसा करने से बच्चों के पास कम नकारात्मक विचार होंगे। आपको बता दें कि नकारात्मक विचार ब्लू व्हेल जैसी खतरनाक खेलों की ओर ध्यान या रुचि को बढ़ा सकते हैं।

बच्चों की ऊर्जा को व्यवस्थित करें

बच्चों में बहुत अधिक ऊर्जा होती है। यदि यह ऊर्जा व्यवस्थित नहीं है, तो यह आक्रामकता, हिंसा, बेचैनी या अति गतिविधि को जन्म दे सकती है। कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ से उनकी ऊर्जा को सही दिशा में मदद मिल सकती है:

1) भ्रामरी प्राणायाम

  • पीठ के बल सीधा बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।
  • अपनी तर्जनी उंगली अपने कान की उपास्थि (cartilage) पर रखें जो आपके गाल और कान के बीच स्थित है।
  • लंबी गहरी सांस लें और धीरे से कान दबाएं। आप या तो इसे दबाए रख सकते हैं या दबा सकते हैं और उसे बाहर खींचकर दबा सकते हैं।
  • इसके अलावा मधुमक्खी की तरह दोहरायें हुए नियमित अंतराल पर खींच सकते हैं।
  • बेहतर परिणाम के लिए उच्च गति से नहीं करना ठीक है।
  • इसे 4-5 बार धोह्राएं।

2) नाड़ी शोधन प्राणायाम

  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा और कंधों को ढीला छोडकर आराम से बैठे। अपने बाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखें, हथेलि आकाश की ओर खुली या चिन मुद्रा में।
  • तर्जनी और मध्यमा को दोनों भौहों के बीच में, अनामिका और छोटी उंगली को नाक के बाएं नासीका पर, और अंगूठे को दाहिनी नासिका पर रखे। बाएं नासिका को खोलने और बंद करने के लिए हम अनामिका और छोटी उंगली का और दायें नासिका के लिए अंगूठे का उपयोग करेगें।
  • अपने अंगूठे को दाएं नासिका पर धीरे से दबा कर बाएँ नासिका से साँस बाहर निकाले।
  • अब बाएं नासिका से सांस लिजिए और उसके बाद बाएं नासिका को अनामिका और छोटी उंगली के साथ धीरे से दबाएं। दाहिने अंगूठे को दायें नासिका से खोलकर दायें नासिका से सांस बहार निकाले।
  • दाएं नासिका से सांस लिजिए और बाईं ओर से साँस छोड़िए।

3) उज्जाई प्राणायाम

प्राण या जीवन शक्ति के लिए उज्जाई प्राणायाम भी बेहद फायदेमंद है।

कुछ आसन जो बच्चे घर पर कर सकते हैं:

  • शिशुआसन
  • सूर्य नमस्कार
  • नौकासन
  • धनुरासन
  • ताडासन
  • वृक्षासन
  • भुजंगासन

बच्चों को लत से छुटकारा दिलाएं

ब्लू व्हेल गेम एक लत है। यह लत पर्यावरण, शरीर, विचारों, भावनाओं और स्वयं के विभिन्न स्तरों पर बच्चों को प्रभावित करती है। यह बच्चे के बारे में जागरूकता को बाधित करता है। एक बच्चा सही और गलत के बीच का फर्क नहीं जानता है। बच्चों के लिए डिजाइन किए विशेष ध्यान प्रथाओं से इस लत को तोड़ने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप प्रज्ञा योग से बच्चों को अपने अंतर्ज्ञान और सही और गलत की भावना को जानने में मदद मिल सकती है।

बच्चों की सोच बदलें

ब्लू व्हेल एक न्यूक्लियर सोच का रिजल्ट है, जहां बच्चे अपने बारे, अपने हितों और सामाजिक उत्तेजनाओं के बारे में ज्यादा सोचने लग जाते हैं। वे जल्द ही अपनी एक छोटी से दुनिया तक सीमित होने लगते हैं। लेकिन जब बच्चे ध्यान अभ्यास करते हैं, तो उनके मन और चेतना में विस्तार होता है। वे अधिक आराम और खुशी महसूस करते हैं। वे खुद को बाहरी दुनिया में खोलना शुरू करते हैं और स्वस्थ संबंध रखते हैं। बच्चों में आत्मसम्मान बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देखा गया है कि ज्यादातर बच्चे और किशोरा जो इस खेल को खेलते हैं, वे कम आत्मसम्मान के चलते ऐसा करते हैं।

उन्हें दूसरे कामों में व्यस्त रखें

ऐसे खतरनाक खेलों से बचाने के लिए अपने बच्चों को संगीत, नृत्य, पेंटिंग, खेल, योग या कुछ रचनात्मक कला जैसी गतिविधियों में व्यस्त रखें। शारीरिक गतिविधि आपके बच्चों को इस तरह के फालतू खेलों से बचाती है। इससे उन्हें शांत और अधिक ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलता है।

अपने बच्चों से बात करें

वैज्ञानिक शोध का कहना है कि जब तक बच्चे किशोर बनते हैं, तब तक वो लाखों अस्वीकारों की बात करते हैं। इसलिए, वे बड़े होकर आपसे चीजें छुपाते हैं। वो अपने दिमाग के अनुसार काम करने लगते हैं। इतना ही नहीं वो अपने काम के बारे में किसी को नहीं बताने चाहते। इसलिए परिजन होने के नाते सकारात्मक रहें और उन्हें यह एहसास दिलाएं कि आप हर कदम पर उनकी मदद कर सकते हैं। उन्हें सहज महसूस कराएं ताकि वे आपसे खुलकर बात कर सकें। अपनी राय पर उन पर थोपे नहीं और जब उन्हें आपकी आवश्यकता होती है, तो उन्हें सुनें। वे आपको रोल मॉडल के रूप में देखते हैं। इसके अलावा, जब आप सहायक और मैत्रीपूर्ण होते हैं, तो बच्चों को बाद में इस प्रक्रिया में पहले कबूल करने के लिए तैयार हैं।

सही गलत का फर्क बताएं

पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप बच्चा सहकर्मी का दबाव में ना हो। जब बच्चों सही गलत के बीच का फर्क का पता होगा, ते यह संभव है कि बच्चे सहकर्मी के जाल में नहीं फसेंगे। ऐसा करने में योग और ध्यान बच्चे की मदद कर सकते हैं, इससे उन्हें उनके मन की आवाज सुनने और मदद मिलती है।

Read this in English

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock