अगर बच्चे को 2 दिन से अधिक कॉन्स्टिपेशन रहे तो suppository इस्तेमाल करें।

जानें क्या है suppository देने का सही समय

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Written By: Editorial Team | Published : November 7, 2017 1:58 PM IST

शिशुओं, बच्चों और बढ़ते बच्चों में कब्ज की समस्या उतनी ही आम है, जैसे यह वयस्कों और बुजुर्गों के साथ है। लेकिन बच्चों के साथ परेशानी यह है कि कब्ज के कारण उन्हें चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस होती है, जिसकी वजह से कभी-कभी बच्चे के नखरे संभालना बहुत मुश्किल हो सकता है। एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ यह समस्या होने का मतलब है कि वे निरंतर रोते रहेंगे और बहुत पुचकारने या प्यार करने से भी शांत नहीं हो सकते। अधिकतर घरेलू उपाय बच्चों के कब्ज की समस्या से काफी राहत दिलाते हैं जैसे- गर्म पानी, पेट पर गर्म तेल की मालिश, केले या प्रून्स खाना आदि। ये सब बोवेल को काम करने में मदद करते हैं।

लेकिन कई बार ऐसा भी होता है जब आपको अपने बच्चे को स्टूल पास कराने के लिए दवा की ज़रूरत होती है। शिशुओं और 2-3 साल तक के बच्चों को जहां दवाओं से बहुत अधिक फायदा होता है वहीं थोड़े बड़े बच्चों को एक सपोसिटरी (suppository) देने की सलाह आमतौर पर दी जाती है। लेकिन शायद ही कभी वे आपको बताते हैं कि आपके बच्चे को सपोसिटरी कब देनी चाहिए। आप केवल इतना ही जानते हैं कि आपको एनस यानि मलद्वार की मदद से दवा अंदर डालनी होती है। हां, बच्चे के लिए यह दर्द सहन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन ज़्यादातर मामलों में संतोषजनक परिणाम ही दिखाई पड़ता है।

सपोसिटरी कब देना चाहिए:

सपोसिटरी देने का सबसे अच्छा समय सुबह है जब आपका बच्चा सोकर उठता है, या फिर रात में सोने से पहले बच्चे को सपोसिटरी दें। कोशिश करें कि आप सपोसिटरी तब देते हैं जब आपका बच्चा खेल-कूद रहा हो ना कि एक ऐसे समय जब उसे पेट में बहुत अधिक दबाव महसूस हो रहा हो। मेरे पीडियाट्रिशन ने एक बार मुझे समझाया कि बच्चे को एक ऐसे समय सपोसिटरी देना चाहिए जब उसे ज़्यादा परेशानी ना हो रही हो, जब वह बोवेल में प्रेशर ना  महसूस कर रहा हो या शौच करने की कोशिश कर रहा हो। माता-पिता सबसे बड़ी ग़लती यही करते हैं कि जब मल रेक्टम में फंसा होता है और बच्चे के लिए इसे निकालना मुश्किल हो जाता है, तब वे सपोसिटरी इंसर्ट करते हैं। इस तरह, सपोसिटरी काम नहीं करता और स्टूल को नरम करने के लिए रेक्टम में जगह पाने की बजाय बाहर निकल जाता है।

इसकी  बजाय, ऐसे समय सपोसिटरी डालने की कोशिश करें जब स्टूल रेक्टम में ना फंसा हो। जब आपका बच्चा मोशन पास करने का दबाव महसूस नहीं करता तब दवा का उपयोग करने से सपोसिटरी अपने तरीके से काम करेगी और स्टूल को नरम बनाकर उसे आसानी से पास होने में मदद करेगी।

सपोसिटरी लगाने का सही तरीका:

  • अपने हाथ साफ करें और बच्चे को सीधा लिटाएं।
  • बच्चे के बटक्स को फैलाएं ताकि उसका अनस अच्छी तरह खुल जाए।
  • सपोसिटरी का नुकीला हिस्सा लेकर अनल होल में धीरे-धीरे डालें।
  • सपोसिटरी अनस में 2सेंटीमीटर अंदर तक जानी चाहिए।
  • कुछ देर तक बटक्स दबाकर रखें और बच्चे को 15 मिनट तक बिस्तर में सीधा लिटाकर रखें।
  • अंदर जाने के 15 मिनटों के अंदर सपोसिटरी अपना काम करने लगती है।
  • सपोसिटरी देने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह साफ कर लें।

अगर सपोसिटरी देने के एक दिन बाद तक बच्चे को स्टूल पास नहीं होता या उसकी कब्ज़ की समस्या बनी रहती है तो अपने डॉक्टर से बात करें।

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अनुवादक: Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत : Shutterstock Images.

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