कैसे बन सकता है भारत ब्रेस्टफीडिंग के लिए अनुकूल देश?

अगर हम इन सुझावों पर ध्यान देते हैं, तो हम भारत को Breastfeeding-friendly देश बनाने में मदद कर सकते हैं।

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Written By: Editorial Team | Published : August 7, 2017 5:31 PM IST

विश्व स्तनपान सप्ताह 2017, के अवसर पर अपोलो क्रैडल के डॉक्टरों ने भारत को स्तनपान के लिए एक अनुकूल देश में बदलने का सुझाव दिया। हाल ही में पारित मातृत्व (संशोधन) बिल में भी इस बारे में बात की गयी है, लेकिन बुनियादी ढांचे और अन्य सामाजिक पहलुओं के मामले में अभी भी इसमें कुछ अड़चने हैं, जो देश को ब्रेस्टफीडिंग को उचित समर्थन प्रदान करने से रोकती हैं।

पिछले कुछ वर्षों से जहां अन्य देशों में ब्रेस्टफीडिंग करानेवाली महिलाओं की संख्या में कमी आ रही है, वहीं भारत में इस मामले में लगातार वृद्धि देखी गयी है। हालांकि, इस साल के स्तनपान सप्ताह या वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2017 का विषय चुना गया 'एक साथ स्तनपान कराने का सतत पालन'। प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमन राव ने अपोलो क्रैड से कहा कि हमारे देश को 'स्तनपान के अनुकूल' बनाने के लिए अभी थोड़ी और मेहनत करने की जरूरत है।

स्तनपान बच्चों के साथ-साथ उनकी माताओं के स्वास्थ्य लिए कई प्रकार से लाभकारी है। यह प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाने और आगे चलकर गैर-संक्रामक या नॉन-कम्युनिकेबल रोगों की संभावना को कम करने में एक खास भूमिका निभाता है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण में इसे महत्वपूर्ण मानते हुए, नॉर्वे, जापान, ब्राजील, पेरू जैसे देशों ने ऐसी विभिन्न तरीकों से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की ताकि हर बच्चे को जन्म के बाद 6 महीनों तक केवल मां का दूध पिलाया जा सके। महिलाओं के लिए स्तनपान आसान बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय ये भी हो सकते हैं:

  • डॉक्टरों और अस्पतालों को कम उम्र की मांओं को फार्मूला या बोतल से दूध पिलाने से मना करना चाहिए।
  • डिलिवरी के बाद अस्पताल से घर जाने से पहले लैक्टेशन विशेषज्ञों और अस्पताल के कर्मचारियों को स्तनपान कराने की सही तकनीक के बारे में माताओं को प्रशिक्षित करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को ऐन्टीनेटल क्लासेस (antenatal classes) जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जहां स्तनपान पर फोकस होना चाहिए। यह महिलाओं को शिशु के आगमन से पहले स्तनपान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  • ऑफिस में भी महिलाओं को उनके बच्चों को 12 महीने तक ब्रेस्टफीडिंग कराने के लिए आवश्यक मदद करनी चाहिए और उन्हें छुट्टियां देनी चाहिए।
  • ह्यूमन मिल्क बैंकों के एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का निर्माण करना चाहिए। जहां ऐसी महिलाएं दूध दान कर सकती हैं जिन्हें दूध बनता है। ब्रेस्ट मिल्क को ज़रूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों और कर्मचारियों का इंतज़ाम करना चाहिए। ब्रेस्ट मिल्क को इकट्ठा करने के लिए यह मोबाइल वैन विभिन्न इलाकों और पड़ोस में भेजी जा सकती है।
  • स्तनपान कराने के लिए स्टेशन / सार्वजनिक नर्सिंग होम, पार्क, मेट्रो स्टेशन, सुपर मार्केट आदि में एक विशेष स्थान बनाया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक मां के लिए बच्चे को दूध पिलाना सुविधाधनक हो।
  •  फार्मूला पाउडर बनानेवाली निजी कम्पनियों द्वारा बांटे जानेवाले फ्री-सैम्पल और जानकारियों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
  •  भारत सरकार और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मौजूदा कानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन के लिए प्रावधान बनाने की आवश्यकता है। ताकि सभी महिलाओं को शिशु और कमउम्र बच्चों को दूध पिलाने से जुड़े परामर्श और जानकारियां आसपास ही मिल जाएं, जिनमें सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ का भी योगदान हो।

ब्रेस्टफीडिंग के भरपूर लाभ के लिए सुनिश्चित करें कि बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध पिलाया जाए। 6 महीने तक पानी, अन्य तरल पदार्थ या खाद्य पदार्थों की बजाय बच्चे को केवल मां का ब्रेस्ट मिल्क पिलाना चाहिए, इसके बाद 2 साल तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। दरअसल मां का दूध पोषक तत्वों से समृद्ध होता है जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में मदद करता है। इसलिए, मां का दूध बच्चे के लिए एक आदर्श भोजन माना जाता है। इससे बच्चे को आदर्श विकास और हर तरीके से बढ़ने में मदद मिलती है। स्तनपान का समर्थन करने के लिए उठाए गए सही प्रयासों के साथ, भारत ‘स्तनपान के लिए अनुकूल’ राष्ट्र के रूप में उभर सकता है।

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अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत-Shutterstock.

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