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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 7, 2021 10:53 PM IST
बच्चे न हो साइबरबुलिंग का शिकार इसके लिए करें ये काम, भावनात्मक रूप से बच्चे होंगे मजबूत
सोशल मीडिया और तकनीक ने हमारे जीवन को बहुत आसान बना दिया है और अब ज्यादातर काम घर बैठे ही हो जातें हैं लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध के शिकार होने का खतरा भी बहुत बढ़ गया है। पिछले कुछ सालों में साइबर चोरी, कैटफिशिंग और साइबरबुलिंग के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। इन साइबर अपराधों से कोई भी सुरक्षित नहीं है। चूंकि बच्चों में नई चीजों को लेकर उत्सुकता अधिक रहती है और समझ कम। इसलिए बच्चे इनका सबसे आसान शिकार बनते हैं।
हमें यह समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है। हम सभी को इसका उपयोग जिम्मेदारी से करना चाहिए। साथ ही अगली पीढ़ी को साइबर पीड़ित या अपराधी बनने से बचाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। बच्चों को साइबर दुनिया के बारे में उचित ज्ञान देना और सुरक्षित रहने के टिप्स देना बहूत जरूरी है। आइए जानते हैं कैसे बच्चों को साइबर अपराध से बचाय़ा जाए।
कभी-कभी बच्चे अनजाने में कुछ ऐप्स और वेबसाइटों पर अपनी जानकारी साझा कर देते हैं। जिससे वे सायबर अपराधियों का निशाना बन सकते हैं। कई बार बच्चे कुछ वेबसाइटों तक पहुंचने के लिए अपनी उम्र भी गलत बात देते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चों और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखने की जरूरत होती है। जिससे बच्चे जिम्मेदारी से व्यवहार करें और डिजिटल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग कर पाएं।
डिजिटल शिष्टाचार, डिजिटल सुरक्षा के बिल्कुल विपरीत है लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण है। डिजिटल शिष्टाचार सोशल मीडिया साइटों पर किसी व्यक्ति के आचरण और इंटरनेट और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बताता है। यह बताता है कि कौनसी जानकारी और तस्वीरों को निजी रखने की आवश्यकता होती है। डिजिटल मीडिया में दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
अपने बच्चे को साइबर कानूनों और अपराध के बारे में शिक्षित करें। इससे बच्चे में सोशल मीडिया और इंटरनेट के उपयोग को लेकर एक समझ बनती है। आपका बच्चा सही और गलत के बीच अंतर करने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही किसी भी समस्या का सामना करने पर आपसे इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए।
आपको अपने बच्चे के साथ तकनीक के उचित उपयोग के बारे में चर्चा करनी चाहिए। अपने फैसलों को उन पर न थोपें और न ही ज्यादा जोर-जबर्दस्ती करें। खुली चर्चा करें और उन्हें बताएं कि क्या गलत है और क्या सही है। उचित कारण बताए बिना उन्हें मजबूर करना या उन्हें दंडित करना ज्यादा मदद नहीं करेगा।