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How to get kids to listen to parents: बच्चों के व्यवहार की बात की जाए तो हर मां-बाप की यही चाहत होती है कि उनके बच्चे बड़ों का कहा माने। लेकिन, दूसरी तरफ अक्सर होता यही है कि बच्चों अपने मां-बाप या घर के बड़े-बुजुर्गों और अपना भाई-बहनों की बात सुनने से भी आनाकानी करते हैं। पढ़ाई-लिखाई से जुड़ीं बात हो या गैजेट्स का इस्तेमाल कम करना, हर छोटी-बड़ी बात पर बच्चे मां-बाप का कहा मानने से इंकार कर देते हैं और इसीलिए, कई बार पेरेंट्स को बहुत अधिक गुस्सा आ जाता है और बच्चे को डांट देते हैं या अपना सिर पकड़कर बैठ जाते हैं कि आखिर अच्छे कामों की सलाह देने या बच्चे का भला सोचने के बावजूद उनकी कोशिश नाकामयाब कैसे रह गयी है।
यह कहानी केवल आपकी नहीं, बल्कि लगभग हर घर की है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं वे अपने मां-बाप से बहस करने लगते हैं या उनकी बात मानना बंद कर देते हैं। ऐसे बच्चों के मां-बाप कुछ बातों का ध्यान रखकर अपने बच्चों की इस आदत को बदलने की कोशिश कर सकते हैं और उन्हें बड़ों का कहना मानने के लिए तैयार कर सकते हैं। यहां पढ़िए कुछ ऐसी ही पेरेंटिंग टिप्स जो अपने घरवालों का कहा ना मानने वाले बच्चों को समझाने में मदद कर सकती हैं। (How to get kids to listen to parents in Hindi)

बार-बार बच्चे को ना दें धमकी
बच्चों को कई बार कुछ काम बार-बार बताने के बाद भी वे उसे नहीं करते और बार-बार वही गलती करते रहते हैं। 2-3 बार किसी काम को बोलने के बाद भी ना करने पर मां-बाप अक्सर बच्चे को कुछ सुना भी देतें हैं जैसे- तुझे बार-बार क्यों बोलना पड़ता है या कितनी बार में सुनेगा मेरी बात। वहीं मां-बाप बच्चों को डराने और अपना कहा मनवाने के लिए उन्हें धमकी भी देते हैं कि अगर अब तुने मेरा कहा नहीं सुना तो देख क्या हाल करते हैं तेरा। दरअसल, मां-बाप को लगता है कि इस तरह बच्चे डर कर उनकी बात मान लेगें लेकिन, होता है ठीक इसका उल्टा। जब मां-बाप अपने बच्चे को बार-बार धमकी देने लगते हैं तो बच्चे समझ लेते हैं कि वे उनको कुछ नहीं करने वाले और मां-बाप की धमकी को गम्भीरता से लेने की जरूरत नहीं। इस तरह वे और भी मनमानी करने लगते हैं और मां-बाप की बात तो बिल्कुल नहीं सुनते। इसीलिए, उन्हें धमकी देने की आदत बार-बार नहीं दोहराएं।
कई बार मां-बाप बच्चे को डांटने लगते हैं और बच्चे भी पलटकर उन्हें जवाब दे देते हैं। ऐसे में यह बहस कई बार बहुत देर तक चलती है और इससे समय और घर का माहौल भी खराब होता है। बच्चे झगड़े या बहस की वजह से हो सकता है कि आपकी बात सुनना पूरी तरह से बंद कर दें। इसीलिए, उनसे बहस करने की बजाय शांत लहजे में बता दें कि उन्हें क्या काम करना है और वह काम ना करने से किस तरह से आपको या उस बच्चे को परेशानी हो सकती है।
बच्चों से अपनी बात मनवाने के लिए उन्हें आप जब सख्त लहजे में बात करते हैं तो इस तरह से बात करें कि वह उन्हें धमकी जैसा ना लगे। जैसे मां-बाप अक्सर बच्चों को घर से निकालने, भूखा रखने या बाथरूम में बंद करने की धमकी देते हैं और उन्हें लगता है कि इससे बच्चा डर जाएगा और मां-बाप हर बात मानना स्टार्ट कर देगा। लेकिन, ऐसी बातें तर्कसंगत नहीं मानी जाती क्योंकि, इनसे बच्चा कुछ सीखने की बजाय और अधिक खीज जाएगा और बच्चा गुस्सैल भी बन जाएगा। इसीलिए, बच्चों को धीरे-धीरे यह समझाएं कि अब वह बड़ा हो रहा है और उसे कुछ जिम्मेदारियां उठानी होंगी और इसी काम में मां-बाप उसकी मदद करना चाहते हैं। इस तरीके से बात करने से बच्चा आपकी बात समझने की कोशिश करेगा और आपका कहा सुनना भी शुरू कर सकता है।