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Written By: Editorial Team | Published : June 12, 2017 5:53 PM IST
बच्चों का शर्मिला होना अच्छी बात नहीं, खासकर आज के ज़माने में जब बच्चों को हर लिहाज से चपल और होशियार होने की उम्मीद की जाती है, फिर चाहे वह लोगों से बातचीत करना हो या सामाजिक मेलजोल जैसी बातें होती हैं। लेकिन वर्तमान की एक और बड़ी सच्चाई यह है कि आज ज़्यादातर बच्चे एकल परिवार में पलते-बढ़ते हैं, जहां मां-बाप के अलावा बच्चों से बातचीत के लिए बहुत अधिक लोग नहीं होते। छुट्टीवाले दिन लोग मॉल जाते हैं और पार्क में मां-बाप बैठे रहते हैं जहां बच्चे उनके सामने खेलते हैं, जिनका कोई फायदा नहीं। ऐसे में अगर आपके बच्चे में आत्म-विश्वास की कमी है तो उसे लोगों से बातचीत करने का तरीका बताएं। उसे अपनी बुक की कविताएं पढ़ने और मेहमानों के सामने डांस कराने से भी कुछ नहीं होगा। बच्चे को अचानक से सबके सामने ला न खड़ा करें, इसकी बजाय इन टिप्स को भी फॉलो करें:
• बच्चे को कोई उपनाम न दें: हम हमारे बच्चों से कैसे बात करते हैं, बच्चे अपने आपको वैसा ही समझने लगते हैं। अगह आप खुलेआम अपने बच्चे के शर्मीले होने, आत्मविश्वास की कमी या किसी भी नकारात्मक पहलू के बारे में बात करते हैं, तो यह मदद करने की बजाय केवल समस्या को बढ़ाने का काम करेगा, क्योंकि बच्चा इस पर विश्वास करना शुरू कर देगा। आपको उसके बारे में सकारात्मक बातें हीं करनी चाहिए ताकि उसे काम करने में मदद हो और वह आसानी से आगे बढ़े। किसी बच्चे के व्यवहार को किसी विशिष्ट प्रकार का कहना बहुत ग़लत है। याद रखें कि वह अभी भी छोटा है और धीरे-धीरे बढ़ रहा है और उसके व्यक्तित्व का विकास अभी हो रहा है।
• लोगों से बात करना सिखाएं: हो सकता है कि आपका बच्चा आपके दोस्तों और परिचितों के साथ सहज न हो, लेकिन आपका बच्चा अपनी उम्र के लोगों के साथ बात करता हो, और खेलना चाहता हो। बच्चों का संवाद करने और लोगों के साथ रहने का अपना तरीका होता है, तो उन्हें अपने तरीके से ही यह सब करने दें। आप बस उन्हें उन जगहों पर ले जाएं जहां वह अपनी उम्र से बच्चों को मिल सकें। किसी पार्क, प्लेज़ोन या किसी हॉबी क्लास या प्लेस्कूल में उनका दाखिला कराएं। इस तरह आपके बच्चे को अपनी उम्र के अन्य बच्चों के साथ घुलने-मिलने और बातचीत करने का एक अच्छा अवसर मिलेगा।
• बच्चे को बताएं कि आगे क्या होनेवाला है: किसी भी बच्चे को नयी जगह पर, नये लोगों के बीच असहज लग सकता है, विशेषकर अगर वह शर्मीला हो। अपने शर्मीले बच्चे की मदद के लिए उसे आगे की योजनाओं और स्थितियों के बारे में बताएं। आप कहां जा रहे हैं, वहां क्या होगा और आप किससे मिलेंगे, और आप वहां कब तक रहेंगे, यह सब अपने बच्चे को बताएं। इसी तरह जब मेहमान घर आएं या घर में किसी पार्टी का प्लान हो तो तब भी बताएं कि वहां क्या-क्या होगा। जो भी होनेवाला है उसके लिए तैयार रहने में अपने बच्चे की मदद करें।
• उसका हौसला बढ़ाएं: अपने बच्चे को बात करने, अधिक आत्मविश्वासी बनने, अपने विचार व्यक्त करने और लोगों के सामने बात करने से ना शर्माने के लिए लगातार उसका हौसला बढ़ाते रहें। जब भी वह किसी चीज़ के लिए हिम्मत करे तो उसकी तारीफ करें और उसके प्रयासों-उपलब्धियों के लिए उसका हौसला बढ़ाएं। ऐसी स्थितियां जब वह शर्म या झिझक महसूस करे तो तब अपने बच्चे को उसकी पुरानी उपलब्धियों के बारे में बताएं, उसे विश्वास दिलाएं कि वह ऐसा कर सकती है।
• आंखों में आंखें डालकर बात करना का महत्व समझाएं: जब अपने अपने बच्चे से बात करें, तो उसकी आंखों में आंखें डालकर बात करें। उसे बताएं कि किसी से बात करते समय आई कॉन्टैक्ट बनाना महत्वपूर्ण क्यों है उसे घर में परिवारवालों के साथ इसकी प्रैक्टिस कराएं, उसे प्यार से समझाएं कि उसे क्या करना चाहिए और उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ सकता है।
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अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत-Shutterstock