लॉकडाउन में बच्चों में बढ़ रहा है मानसिक तनाव, ऐसे रखें उन्हें मेंटली फिट

कोरोना वायरस महामारी के कारण बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। स्कूल बंद हैं और बच्चों का घर के बाहर निकलना, पार्क में खेलने जाना और दूसरे बच्चों के साथ घुलना-मिलना भी बंद है। इससे, बच्चों की मानसिक सेहत पर असर पड़ रहा है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : July 29, 2020 6:50 PM IST

Child's Mental Health during Covid: कोरोना वायरस महामारी से बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। जहां, बच्चे रोज स्कूल या कॉलेज जाते थे। वहीं, अब लॉकडाउन के कारण बच्चों को घर में ही रहना पड़ रहा है। स्कूल बंद हैं और बच्चों का घर के बाहर निकलना भी मना है। साथ ही, पार्क में खेलने जाना और दूसरे बच्चों के साथ घुलना-मिलना भी बंद है। इससे, बच्चों की मानसिक सेहत पर असर पड़ रहा है। इस वैश्विक महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन की वजह से बेचैनी या एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य मानसिक बीमारियों का ख़तरा और इसके मामले बढ़ते जा रहा है।  बच्चों को भी इन समस्याओं से गुज़रना पड़ रहा है।

लॉकडाउन में बच्चों में बढ़ रहा है मानसिक तनाव:

भले ही बच्चों को मानसिक बीमारियों की समस्या बड़ों की तरह नहीं है। लेकिन, उन्हें कोविड-19 का खतरा अधिक है। साथ ही बच्चों को मानसिक स्तर पर लॉकडाउन के दौरान परेशान होना पड़ रहा है और लॉकडाउन के बाद भी उनके दिमाग पर इसका बहुत अधिक असर दिखायी पड़ेगा।

अपना दैनिक रूटीन बिगड़ने से बच्चे इरिटेटेड, चिड़चिड़े और गुस्सैल बन रहे हैं। तो वहीं, कई बच्चों को चिंता, बेचैनी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी महसूस हो रही है। तो वहीं, कुछ जगहों से चाइल्ड अब्यूज़ जैसे मामले सामने आने जैसी घटनाएं भी हुई हैं।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की मेंटल हेल्थ को मज़बूत रखने के लिए क्या किया जाए। महामारी के इस माहौल में बच्चों को कैसे दूसरी बीमरी से बचाया जाए। इसके लिए आप इन बातों का ध्यान रख बच्चों की मदद कर सकते हैं:

  • बच्चों की बात पहले ध्यान से सुने और उसके बाद उन्हें किसी प्रकार की सलाह या मशविरा दें।
  • उनके व्यवहार में बदलाव आने पर शांत रहें, गुस्सा ना करें।
  • बच्चों की भावनाएं समझें और उन्हें अपनी भावनाएं समझाएं।
  • कुछ भी छुपाएं नही, उन्हें सच बताना सीखें
  • बच्चों को बताएं कि वे खुद को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं
  • अपने बच्चों को ऐसे वयस्कों के बीच रहने दें जो स्वस्थ हों और जिनका साथ बच्चों को पसंद आता है।
  • उन्हें प्यार दें, गले लगाएं और अपना स्पर्श महसूस कराएं।
  • बच्चे के आसपास रहें
  • उनके साथ मेडिटेशन करें, खेलें और एक्सरसाइज़ साथ करें
  • जब बच्चे गुस्सा या चिड़चिड़ापन दिखाए, तो आप प्रतिक्रिया में शांत रहें।
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