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International Mother's Day 2022: दुनिया में सबसे बड़ा योद्धा मां होती है , यह फिल्मी डायलॉग आपने भी सुना ही होगा। यह सच भी है कि हर मां अपने बच्चे की देख-रेख और उसकी परवरिश के लिए हर संभव कोशिश करती है और संघर्ष भी। मां बनना किसी भी महिला के लिए ज़िंदगी की सबसे बड़ी सौगात हो सकती है। साथ ही मां बनते ही हर महिला के ऊपर एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी आ जाती है। जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे मां और बच्चे की बॉन्डिंग भी मजबूत होती है और साथ ही बदलती है दोनों की ज़िंदगी, बच्चा जहां दुनिया को समझने के लिए प्रयास करता है वहीं मां बच्चे का सही तरीके से पालन-पोषण करने और उसे एक स्वस्थ व्यक्तित्व और अच्छा नागरिक बनाने के प्रयास करती है। बच्चे के जन्म के बाद हर महिला को ज़िंदगी में नये अनुभव होते हैं। इनमें से कुछ अनुभव अच्छे और कुछ कम अच्छे होते हैं। वहीं, न्यू मदर्स के सामने कई चुनौतियां भी आती हैं। अनुभव की कमी और मन में अनजाना डर, उलझन और सही सपोर्ट ना मिलने के कारण ये चुनौतियां और भी गम्भीर महसूस हो सकती हैं। ऐसी ही कुछ चुनौतियों के बारे में आप पढ़ सकते हैं इस लेख में जो न्यू मदर्स के सामने आती हैं। इसके साथ ही पढ़ें उन चुनौतियों से निपटने के कुछ तरीके भी। (common challenges faced by New mother in Hindi)
ऐसा कहा जाता है कि बच्चे को जन्म के घंटेभर बाद से ही ब्रेस्टफीडिंग की प्रक्रिया (breastfeeding) शुरू कर देनी चाहिए। लेकिन, यह उतना भी आसान नहीं जितना कि इसे समझा या बतलाया जाता है। बहुत-सी महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद समझ नहीं आता कि वे बच्चे को सही तरीके से पकड़कर दूध कैसे पिला (position of baby for breastfeeding) सकती हैं। इसके अलावा कम मिल्क प्रॉडक्शन या लैक्टेशन (Lactation) की कमी, तनाव (stress), बच्चे का स्वास्थ्य और मां की तबीयत या असुविधा महसूस होने जैसे कई कारणों के चलते महिलाओं के लिए सहज और सही तरीके से बच्चे को दूध पिलाना संभव नहीं हो पाता। (common causes of poor feeding in new mothers)

इस स्थिति से निपटने के लिए सबसे पहले खुद को तनावमुक्त रखने के प्रयास करें। याद रखें कि अगर आप और आपका बच्चा तनाव में होगें तो आपके लिए उसे फीड (feeding a baby) करना मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही इन बातों का ख्याल रखें-

आपको नींद की कुर्बानी देनी पड़ सकती है। बच्चे के सोने-जागने के रूटीन के अनुसार मांओं को भी जागना और सोना पड़ता है। इससे, उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। वहीं, कई महिलाएं जिन्हें दिन में सोने की आदत (daytime nap) नहीं होती या घर के कामों में हाथ बंटाना होता है उनके लिए नींद की कमी एक बड़ी समस्या बन कर उभरती है।
नयी मांओं को लगातार अपने आसपास के लोगों से सलाह, टिप्स और शिकायतें सुनने को मिलती रहती हैं जिससे उनपर लगातार खुद को अच्छी मां साबित करने का दबाव बढ़ता ही जाता है। इससे उनके मन में गिल्ट और ज़िंदगी में तनाव बढ़ताजाता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
अपने बढ़ते वजन, त्वचा पर दिखने वाले स्ट्रेच मार्क्स(strech marks) और हेयर फॉल (Hair fall post pregnancy) जैसी समस्याओं से न्यू मदर्स को अक्सर तनाव, दुख, उदासी और निराशा महसूस हो सकती है। उन्हें अपने शरीर को देखकर दुख हो सकता है और कई बार महिलाएं अपने शरीर से भी नफरत करने लगती हैं।

बच्चे के देखभाल और अस्त-व्यस्त दिनचर्या के बीच महिलाएं ज्यादातर समय घर में ही बिताती हैं और अपने दोस्तों-परिवार वालों या कलिग्स के साथ उनका मेल-जोल या बातचीत भी बंद हो जाती है। इससे, महिलाओं की सोशल लाइफ पूरी तरह खत्म होने का डर भी उनके अंदर पनप सकता है और उन्हें धीरे-धीरे अकेले रह जाने का डर सताता है। इसी तरह, बच्चे के जन्म के बाद (post-delivery) महिलाओं को अपने करियर या पढ़ाई से जुड़े कई समझौते भी करने पड़ सकते हैं, जो कई बार उनके लिए बहुत कठिन साबित हो सकता है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है जिसका सामना बहुत सी महिलाओं को चाइल्डबर्थ के बाद करना पड़ सकता है। बॉलीवुड अभिनेत्री समीरा रे़ड्डी पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजरने की बात स्वीकार कर चुकी हैं। वहीं, अन्य कई मशहूर सेलेब्स ने भी इस बारे में कई बार खुलकर बात की है।

कई कपल्स ने यह स्वीकार किया है कि बच्चे के जन्म के बाद उनका उनके पार्टनर के साथ रिश्ता बदल गया है। रिश्तों में बदलाव की बात करें तो पुरुष अपने बच्चे की तरफ अधिक ध्यान देने लगते हैं (और कई मामलों में वे अनुभवहीन होने के कारण बच्चे की देखभाल में मदद नहीं करते।) वहीं, महिलाएं इस बात पर गुस्सा होती हैं कि उनका पार्टनर यह नहीं समझ रहा कि उनके लिए इतने छोटे बच्चे को सम्भाल पाना बहुत मुश्किल है। नतीजतन, पत्नी औऱ पति के बीच अक्सर कहासुनी हो जाती है और दोनों का रिश्ता इससे प्रभावित होता है।
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