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Written By: Editorial Team | Updated : April 23, 2018 2:07 PM IST
कुछ दिनों पहले ही मेरी बेटी दो साल की हो गयी और मैं आपको बता नहीं सकती कि मुझे इन दो सालों में क्या-क्या झेलना पड़ा है। इस बात का अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि मैं अपनी बच्ची से परेशान रहने वाली अकेली मां हूं। ऑनलाइन रिसर्च करते और लोगों से चैट करते मैंने ऐसा बहुत कुछ जाना जहां बहुत-सी माएं शिकायत करती हैं कि अक्सर लोग उनके बच्चों के व्यवहार की वजह से उन्हें रोकते-टोकते रहते हैं। क्योंकि उनका बच्चा केवल एक ही रंग के फल खाता है या बिना चॉकलेट पाउडर मिलाए दूध पीने के लिए तैयार नहीं होता। बच्चों के इस व्यवहार से मां तो परेशान है क्योंकि बाकी लोगों के बीच उसे कई बार शर्मिंदगी उठानी पड़ती है!
खैर मेरी समस्या मेरी बच्ची नहीं है। वह तो अपनी उम्र के हिसाब से ही व्यवहार कर रही है। मैं तो अपने माता-पिता की उस नज़र से परेशान हूं जिससे वो मुझे तब देखते हैं जब मेरी बच्ची किसी मॉल या होटल में नखरे दिखाने लगती है और मेरी तरफ देखकर यह साबित करना चाहते हैं कि मैं कितनी बेचारी हूं। इसी तरह मैं परेशान हूं उन सलाहों से जहां मुझे बताया जाता है कि मैं किस तरह मैं अपने बच्चे को ग़लत चीजें खिलाकर उसका दिमाग ख़राब कर रही हूं। इसलिए वो तमाम लोग जो दूसरे पैरेंट्स को मुफ़्त और बेकार की सलाह देते रहते हैं मैं उन सभी से कुछ कहना चाहूंगी। यहां मैं वे बातें लिख रही हूं जिनके बारे में आपसे मुझे कोई सलाह नहीं चाहिए।
1. टीवी देखना-अगर आपने मुझे एक बार और बताया कि किस तरह ऑनलाइन रहने, मोबाइल में झांकते रहने या टीवी देखने से मेरा बच्चा मोटा हो जाएगा तो मैं आपको बता दूं कि मुझे इस सलाह से नफरत है। प्लीज़ मुझे इस बारे में सलाह न दीजिए क्योंकि आपकी राय सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आता है।
2. नखरे- अगर मैं अपने बच्चे को रुलाने का काम करूंगी तो वह जिद्दी और चिड़चिड़ा बन जाएगा। बड़े होने के बाद उसे दिक्कत होगी और वह लोगों से बातचीत नहीं कर पाएगा। लेकिन अगर मैं उसे बहुत ज़्यादा पुचकारती हूं या उसके नखरे बर्दाश्त करती हूं तो वह जज़्बाती रुप से कमज़ोर बन जाएगा। अब आप ही बताइए, आप दोनों तरफ कैसे बोल सकते हो यार!
3. अनुशासन- एक छोटा बच्चा जो अपने कपड़े नहीं संभाल सकता या जिसे ब्रश पकड़ना भी नहीं आता, उसे अनुशासन कैसे सिखाया जा सकता है। मैं समझ सकती हूं कि दीवारों पर लिखकर या पार्क में मिट्टी में कूद-कूद कर वह सबकुछ गंदा कर लेती है। लेकिन मैं उसे तब रोकुगीं जब वह दूसरों को मारने-पीटने या उनके लिए बुरे शब्दों का प्रयोग करे। बाकी शरारतें तो उसके बचपन का हिस्सा हैं और मुझे नहीं लगता कि मुझे मेरे बच्चे का बचपन छिनना चाहिए।
4 खाने-पीने की आदतें- अब खिलाओ, बार-बार खिलाओ, मत खिलाओ, उसे अपने हाथो से खाने दो, ये वो तमाम बाते हैं जो आपके आसपास के लोग आपको बताते रहते हैं। मैं इन चक्करों में नहीं पड़ती कि मैं उसे ऑर्गैनिक, फार्म-फेड, साफ-सुथरा चीजें खिला रही हूं या नहीं। एक अच्छी बात यह भी है कि मेरी बच्ची केचअप और मेयोनेज़ से भरी चीजें नहीं खाती लेकिन अगर वह खाना चाहेगी तो मैं उसे अपने किचन गार्डन में उगाए टमाटरों से उसके लिए टोमैटो केचअप बना लूंगी।
5. पॉटी ट्रेनिंग- क्या कहा तुमने वह अब भी डायपर पहनती है?” आपको भी ऐसे ही सवाल करते हैं कई लोग और उसके बाद आपको सुनने मिलता है कि आप कैसे अपने बच्चे को कुछ भी नहीं सीखा सकीं। मेरी बच्ची खुद बाथरूम तक जाती है और उसे पता है कि फ्लश कैसे करना है। इसलिए अगर आपको मेरी बच्ची के डायपर के लिए पैसे नहीं देने पड़ रहे तो मैं आपसे कोई सलाह नहीं चाहूंगी। ना ही आपके विचार जानना चाहूंगी कि मुझे मेरे बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग क्यों देनी चाहिए।
हमारा बच्चा भले 2 साल का हो या 3 का, हम अपने बच्चे का अच्छी तरह ख्याल रख सकती हैं। हमें पता है कि बच्चे को कैसे, कब और क्या-क्या सिखाना है। इसके लिए मुझे और मेरी जैसी मांओं को मुफ़्त की सलाह देनेवालों के सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं।
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अनुवादक-Sadhna Tiwari.
चित्रस्रोत –Instragram/aaradhyabachchan.