Asthma in children: बच्चों में दिख रहे ये लक्षण हो सकते हैं अस्थमा का संकेत, डॉक्टर आयुष पांडे से जानें कैसे करें Childhood Asthma की पहचान

Childhood Asthma in Hindi: छोटे बच्चों को भी अस्थमा की शिकायत हो सकती है और अधिकतर लोग इस बारे में नहीं जानते हैं। डॉक्टर आयुष से जानें कैसे पता लगाएं छोटे बच्चों को अस्थमा है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2022 8:44 PM IST

आजकल अस्थमा काफी आम हो गया है और काफी संख्या में लोग इससे प्रभावित होने लगे हैं। इस रोग में व्यक्ति के श्वसन मार्गों में सूजन होने के कारण मार्ग रुक जाते हैं और कारणवश सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। साथ ही ज्यादा म्यूकस (बलगम) बनने के कारण भी सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हालांकि, बहुत ही कम लोग जानते हैं कि अस्थमा बच्चों में भी हो सकता है और कई बार स्थिति उनके लिए गंभीर हो सकती है। बच्चों में होने वाले अस्थमा के संबंध में हमने डॉक्टर आयुष पांडे से बात की और उन्होंने इस बारे में काफी जानकारी दी। डॉक्टर आयुष पांडे गुरुग्राम के एसजीटी हॉस्पिटल में जनरल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी डिजीज के स्पेशलिस्ट हैं। चलिए जानते हैं उनके द्वारा बताई गई कुछ बातें -

क्या अस्थमा वयस्कों की तरह ही बच्चों को प्रभावित करता है?

डॉक्टर आयुष कहते हैं कि चाइल्डहुड अस्थमा की गंभीरता उसे महसूस हो रहे लक्षणों की अवधि, बच्चे के द्वारा ली जा रही दवाएं और उसके फेफड़े किस प्रकार काम कर रहे हैं आदि पर निर्भर करती है। जबकि वयस्कों में होने वाला अस्थमा आमतौर पर बढ़े हुए आइजीई (igE) के स्तर पर निर्भर करता है। एडल्ट अस्थमा में आमतौर पर श्वसन संबंधी लक्षण अधिक देखे जाते हैं, बच्चों की तुलना में वयस्कों में अस्थमा के लक्षण ज्यादा हैं और बार-बार हो सकते हैं।

चाइल्डहुड अस्थमा का निदान किस टेस्ट से किया जाता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर आयुष पांडे बताते हैं कि अस्थमा का निदान करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला टेस्ट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट है, जिसे स्पाइरोमेट्री भी कहा जाता है। इस टेस्ट को 5 या 6 साल से ऊपर के बच्चों में किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ प्रकार के ब्लड टेस्ट जैसे सीरम आइजीई और एब्सल्यूट इओसिनोफिल काउंट का इस्तेमाल किया जा सकता है और साथ में स्किन प्रिक टेस्ट भी किया जा सकता है। एबीपीए (ABPA), एलर्जिक ब्रोन्कोपल्मोनरी एस्परजिलोसिस और ब्रॉकिक्टेसिस जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए चेस्ट एक्स रे और सीटी स्कैन भी किया जा सकता है।

कैसे पता लगाएं कि बच्चे को अस्थमा है?

डॉक्टर आयुष बताते हैं कि खांसी, घरघराहट, छाती में जकड़न, सांस फूलना और आंख से पानी आना आदि बच्चों में अस्थमा के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। अस्थमा से ग्रसित बच्चे में ये लक्षण बार-बार होते हैं और ये लक्षण आमतौर पर किसी न किसी कारक से ही विकसित होते हैं। डॉक्टर आयुष के अनुसार अपर या लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, एक्सरसाइज, किसी प्रकार के एलर्जन के संपर्क में आना, धूल-मिट्टी, प्रदूषण, सिगरेट व अन्य प्रकार के धुएं आदि अस्थमा के लक्षण पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि अस्थमा कई बार एक्जिमा या एलर्जी जैसी समस्याओं के साथ विकसित होता है।

क्या बच्चों में अस्थमा का इलाज हो सकता है?

डॉक्टर आयुष पांडे ने बताया कि अस्थमा एक एयरवे रिमॉडलिंग डिजीज या एलर्जिक डिजीज है और इसका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है। हालांकि, डॉक्टर ने बताया कि इसकी रोकथाम या बचाव किया जा सकता है, जिसके नॉन-फार्माकोलॉजिकल और फार्माकोलॉजिकल दोनों तरीके हैं। अगर नॉन-फार्माकोलॉजिकल की बात करें तो उसमें आपको उन सभी कारकों से बचना होगा जो अस्थमा के लक्षण पैदा कर सकते हैं जैसे वातावरण प्रदूषण, धूम्रपान करना और अन्य एलर्जिक पदार्थ आदि। वहीं अगर फार्माकोलॉजिकल तरीके की बात की जाए तो अगर किसी बच्चे में अचानक से अस्थमा के लक्षण विकसित हो गए हैं, तो उसे शॉर्ट एक्टिंग ब्रोंकोडायलेटर दवाएं व उनके साथ इन इनहेलेशनल कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं दी जाती हैं। इसके बाद जब बच्चे में अस्थमा के लक्षण नियंत्रित हो जाएं तो उसके बाद लॉन्ग एक्टिंग ब्रोंकोडायलेटर और इनहेलेशनल कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ-साथ अन्य एंटी-एलर्जिक दवाएं भी दी जा सकती हैं जैसे मोन्टेल्यूकास्ट, जो कि एक ल्यूकोट्रायन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट है।

पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं इनहेलर्स

इसके बाद डॉक्टर आयुष ने यह भी बताया कि अगर बच्चा अस्थमा से ग्रसित है और उसे किसी प्रकार के लक्षण भी महसूस नहीं हो रहे हैं, तो भी उसे रोजाना इनहेलर का इस्तेमाल करना चाहिए। डॉक्टर आयुष बच्चों के लिए इनहेलर के इस्तेमाल को पूरी तरह से सुरक्षित बताते हैं। उनके अनुसार अस्थमा से ग्रसित बच्चे को नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए।

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