... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: akhilesh dwivedi | Updated : April 14, 2019 3:02 PM IST
बच्चों की देखभाल जितनी जरूरी है उतनी ही उनके व्यवहार को समझने की जरूरत होती है। हेल्थ ठीक रहे इसके लिए खान-पान की अच्छी व्यवस्था जितनी जरूरी है उतनी ही जरूरत उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए आपके अच्छे व्यवहार की होती है। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं उनके बोल चाल और व्यवहार में परिवर्तन होता है। उनके साथ ज्यादा सख्ती से पेश आने पर वो अपनी बात आपके सामने जाहिर नहीं कर पाते हैं। एक समय ऐसा भी आता है कि बच्चा आपसे कुछ बातें छुपाने लगता है। हम यहां कुछ ऐसे ही टिप्स बता रहें हैं जो आपके बच्चे के लिए जरूरी हैं।
कई बार माता-पिता अपने ही बच्चों के बीच कॉम्पिटिशन क्रिएट कर देते हैं। एक-दूसरे की तुलना करने लगते हैं। कभी बच्चों को जल्दी होमवर्क करने में प्रतियोगिता करवाते हैं, तो कभी जल्दी खाने-पीने की चीजों में। आपके इस व्यवहार से बच्चे में हीनभावना आ जाती है और आपको पता भी नहीं चलता। उसके आत्मविश्वास में कमी आने लगती है, जिससे बच्चा बाहर भी मिलने-जुलने और लोगों से बात करने से कतराने लगता है।
चाहे आप नौकरीपेशा हों या व्यवसायी, बच्चों के साथ समय बिताना बहुत जरूरी होता है। बच्चे भी चाहते हैं कि उनको मां-बाप का ज्यादा-से-ज्यादा सानिध्य मिले। ऐसा नहीं होने पर भी बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं।
बच्चे छोटे हों या बड़े, मां-बाप को चाहिए कि बच्चों के साथ बैठकर टीवी देखें। इससे आप जान सकेंगे कि बच्चा टीवी से क्या अच्छा-बुरा सीख रहा है। बच्चा किन चीजों से अपडेट हो रहा है। उनको वही प्रोग्राम देखने दें, जो ज्ञानवर्धक हों।
बच्चों को भी अपनी बातचीत में शामिल करें। उनसे स्कूल की बातें करें और वहां की गतिविधियों के बारे में पूछें। बातचीत का दायरा जितना बढ़ेगा, उतना ही बच्चे खुलकर हर मुद्दे पर आपसे बात कर सकेंगे।
क्योंकि किशोर होते कई बच्चे अपने अंदर हो रहे हारमोनल परिवर्तन के बारे में बता नहीं पाते। वे इससे संकोच करने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उनको इससे संबंधित कुछ बातें पहले ही बता दें, ताकि वे भटक न सके।
आखिर क्यों बढ़ता जा रहा है बच्चों में गुस्सा, किस तरह करें इसे काबू।
कई बार बच्चों को जब इनसे संबंधित जवाब नहीं मिलता तो वे इंटरनेट, टीवी और दोस्तों की मदद लेने लगते हैं, जोकि बेहद ही खतरनाक है। इससे बच्चा अवसाद में जा सकता है और कुंठा से बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास सही तरह से नहीं हो पाता। इसलिए उनकी जो भी समस्या हो, गौर से सुनें औैर सुलझाने में मदद करें। अगर काउंलसर की जरूरत हो, तो उसकी भी मदद लें।
आपका बच्चा क्या चाहता है, उसकी रुचि किन चीजों में है, इसे जानने की कोशिश करें। पड़ोसी का बच्चा क्या कर रहा है और क्या नहीं, इस बात से ज्यादा जरूरी है कि आपका बच्चा क्या चाहता है? जिस चीज में उसकी रुचि है, उसी को बढ़ावा दें।
किड्स समर केयर टिप्स : गर्मी के प्रकोप से अपने बच्चे को बचाने के लिए अपनाएं ये महत्वपूर्ण टिप्स।