Eye Infection in Children: छोटे बच्चों की आंखों में इन्फेक्शन के ये हो सकते हैं संकेत, जानें क्या है इसका इलाज और बचने का सही तरीका
Eye Infections in Kids: छोटे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और इस कारण से उन्हें आई इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। इस लेख में बच्चों में आंख के संक्रमण की पहचान और उससे बचाव करने के तरीकों के बारे में बताया गया है।
छोटे बच्चों का शरीर बेहद नाजुक होता है इसलिए उनकी विशेष रूप से देखभाल करने की जरूरत होती है। डॉक्टर भी कहते है कि छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, क्योंकि वह शरीर में बना रहा होता है। अक्सर रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने के कारण ही उन्हें अक्सर कई प्रकार के संक्रमण हो जाते है। बच्चों को आमतौर पर होने वाले संक्रमणों में से आंखों का संक्रमण भी है। बच्चे अक्सर अपनी आंख में हो रही समस्याओं को बता नहीं पाते हैं और हमें तब दिखाई देता है, जब संक्रमण पूरी तरह से आंख में फैल जाए और आंख से पानी आना या खुजली होने जैसे लक्षण दिखने लगें। बच्चों को होने वाला आई इन्फेक्शन एक गंभीर स्थिति है, जिसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर होकर आंख में स्थायी रूप से नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए बच्चों की आंखों में होने वाले संक्रमणों की पहचान करना जरूरी है। यदि आपके घर में भी कोई छोटा बच्चा है, तो आपको भी यह आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें बच्चों में आई इन्फेक्शन की पहचान करने और उससे बचाव करने के तरीकों के बारे में बताया गया है।
बच्चों की आंखों में संक्रमण के ये हो सकते हैं संकेत
यदि आपका बच्चा बार-बार पलकें झपका रहा है, तो आपको समझ लेना चाहिए कि उसकी आंखों में किसी प्रकार की तकलीफ है और यह आंख के संक्रमण का शुरूआती संकेत हो सकता है। इसके बाद जब संक्रमण शुरू हो जाता है, तो इससे निम्न लक्षण हो सकते हैं
- बार-बार आंखें मलना
- आंखों से पानी आना
- लालिमा व खुजली होना
- आंखों में सूजन होना
क्यों होता है बच्चों की आंखों में इन्फेक्शन
जब आंख किसी प्रकार के बैक्टीरिया, फंगी या वायरस के संपर्क में आती है, तो इससे संक्रमण शुरू हो जाता है और कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis in Hindi) इसका प्रमुख उदाहरण है। बच्चों में आई इन्फेक्शन के निम्न कारण हो सकते हैं -
- बच्चे की आंख में मिट्टी चली जाना
- बच्चे द्वारा बार-बार आँख मलना
- खेलते समय आंख पर कोई चीज लग जाना (जैसे गेंद या अन्य कोई खिलौना)
इसके अलावा अक्सर नवजात शिशुओं की अश्रु नलिकाएं रुकी हुई (Tear ducts blocked) होती हैं, जिसके कारण भी उनकी आंख में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए
आंख का मामला बेहद नाजुक होता है, इसलिए यदि आपको अपने बच्चे की आंख से संबंधित कोई मामूली लक्षण भी महसूस हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इतना ही नहीं आपको किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और समय-समय पर बच्चे की आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सही है।
क्या है बचने का सही तरीका
अपने बच्चे को धूल-मिट्टी में न खेलने दें और साथ ही उसे सफाई रखने की अच्छी आदतें सिखाएं। बच्चे को बार-बार अपने हाथ धोने की आदत डालें ताकि जब वह मुंह व आंखों पर हाथ लगाए तो उसके हाथ स्वच्छ हों। साथ ही उसे अच्छा व पोषक तत्वों से भरपूर आहार दें, ताकि वह स्वस्थ रहे और उसका इम्यून सिस्टम जल्दी मजबूत हो जाए। इसके अलावा समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना भी बच्चों में आई इन्फेक्शन से होने से खतरे को कम करने में काफी मदद कर सकता है।