बीमारी का संकेत भी हो सकती हैं बच्‍चाेें की ये गलत आदतें

बच्‍चों की परवरिश में बहुत ध्‍यान रखने की जरूरता होती है, उसकी ग‍लतियों पर उसे डांटने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि कहीं ये किसी बीमारीवश तो नहीं हो रहा।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : November 28, 2018 8:13 PM IST

कुछ बच्‍चे पढ़ाई के दौरान बार-बार वॉशरूम जाते हैं। इस पर टीचर्स और पेरेंट्स को लगता है कि वे पढ़ाई से बचने का बहाना बना रहे हैं। वहीं कुछ बच्‍चे रात में बिस्‍तर गीला कर देते हैं। इसके कारण भी उन्‍हें सबसे डांट पड़ती है। पर अगर बच्‍चे एक निर्धातर उम्र के बाद भी इन दोनों आदतों पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है तो डांटने से पहले एक बार डॉक्‍टर से जांच जरूर करवा लें। हो सकता है किसी बीमारी के कारण हो। यह भी पढ़ें -एचआरडी ने तय की बच्‍चों के बस्‍ते के वजन की सीमा, जानें क्‍या हैं भारी बस्‍ते का सेहत को नुकसान

विशेषज्ञ बताते हैं कि किडनी संबंधी रोग बच्चों को कई रूपों में प्रभावित करते है, जिसमें इलाज किए जाने वाले विकारों के साथ ही जीवन को खतरे में डालने वाले लंबे समय वाले परिणाम भी शामिल हैं। बच्चों में होने वाले मुख्य किडनी संबंधी रोग हैं- नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम, वीयूआरए यूटीआई आदि।

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किडनी रोग के लक्षण

  •  चेहरे में सूजन
  •  भूख में कमी
  •  मितली
  •  उल्टी
  •  उच्च रक्तचाप
  •  पेशाब संबंधित शिकायतें
  •  पेशाब में झाग आना
  •  रक्त अल्पता
  •  कमजोरी
  •  पीठ के निचले हिस्से में दर्द
  •  शरीर में दर्द
  •  खुजली और पैरों में ऐंठन.
  •  बच्चे का धीमा विकास
  •  छोटा कद और पैर की हडिड्यों का झुकना
  •  किडनी की नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम (Nephrotic Syndrome) आम बीमारी है।
  •  पेशाब में प्रोटीन का जाना
  •  रक्त में प्रोटीन की मात्रा में कमी
  •  कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर और शरीर में सूजन इस बीमारी के लक्षण हैं।

किडनी के इस रोग की वजह से किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है,  लेकिन बच्‍चों में यह ज्‍यादा देखी जाती है। यह भी पढ़ें - मोटे बच्चों में टाईप 2 मधुमेह की संभावना अधिक, ऐसे बचाएं उन्‍हें डायबिटीज के पंजे से

क्या होता है प्रभाव

सही उपचार से बीमारी पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके बाद भी फिर से सूजन दिखाई देना, यह सिलसिला सालों तक चलते रहना यह नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम की विशेषता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने की वजह से यह रोग मरीज और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए एक चिंताजनक बन जाता है। नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम में किडनी के छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने के कारण अतिरिक्त पानी और उत्सर्जी पदार्थों के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन भी पेशाब के साथ निकल जाता है, जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर में सूजन आने लगती है।

क्यों कर देते हैं बच्चे बिस्तर गीला

वीयूआर पीड़ित बड़े बच्चे भी बिस्तर खराब कर देते हैं। ऐसे बच्चों में वेसिको यूरेटेरिक रिफ्लक्स बीमारी होने का अंदेशा रहता है। यह वह रोग है, जिसमें (वाइल यूरिनेटिंग) यूरिन वापस किडनी में आ जाता है। वीयूआर में शिशु बार-बार मूत्र संक्रमण (यूटीआई) का शिकार होता है और इसके कारण उसे बुखार आता है। आमतौर पर फिजिशियन बुखार कम करने के लिए एंटीबायोटिक देते हैं, लेकिन वीयूआर धीरे-धीरे ऑर्गन को डैमेज करता रहता है। वीयूआर नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की आम समस्या है, लेकिन इससे बड़े बच्चे और वयस्क भी प्रभावित हो सकते हैं।

सौ नवजात शिशुओं में से एक या दो शिशु वीयूआर से पीड़ित होते हैं। बच्चों में यूटीआई को डायग्नोज करना कठिन होता है। उपचार न कराया जाए तो उम्र बढ़ने के साथ लक्षण भी बढ़ने लगते हैं, जैसे नींद में बिस्तर गीला करना, उच्च रक्तचाप, यूरिन में प्रोटीन आना, किडनी फेलियर।

लड़कियों को होता है ज्यादा खतरा

लड़कियों में इसके होने की आशंका लड़कों से दुगनी होती है। अगर यूटीआई का उपचार नहीं कराया जाए तो किडनी के ऊतकों को स्थायी नुकसान पहुंचता है, जिसे रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी कहा जाता है। जब यूरिन का बहाव उल्टा होता है, तो किडनी पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ता है। अगर किडनी संक्रमित हो जाती है तो समय के साथ उतकों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे उच्च रक्तचाप और किडनी फेलियर होने का खतरा अधिक हो जाता है।

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