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बच्चों को किस उम्र के बाद अलग सुलाना चाहिए? जानिए किस तरह बच्चों को अलग सुलाने की डालें आदत

बच्चों को कम उम्र में साथ सुलाना जरूरी होता है, लेकिन एक उम्र के बाद उन्हें अलग सुलाने की कोशिश करनी चाहिए। आइए जानते हैं इस बारे में-

बच्चों को किस उम्र के बाद अलग सुलाना चाहिए? जानिए किस तरह बच्चों को अलग सुलाने की डालें आदत

Written by Kishori Mishra |Published : August 8, 2024 3:21 PM IST

Parenting Tips : बच्चे जन्म के बाद से कुछ दिनों तक माता-पिता के साथ सोते हैं। यह सही भी है, क्योंकि उनकी अच्छी नींद के लिए उनके साथ माता-पिता का सोना काफी जरूरी होता है। इसके अलावा बच्चों का कोई न कोई स्लीप बडी जरूर होता है। लेकिन एक उम्र के बाद बच्चों को माता-पिता के साथ नहीं सोना चाहिए। जी हां, आप सोच रहे होंगे आखिर ऐसा क्यों, तो आपको इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं बच्चों को किस उम्र के बाद अलग से सुलाना जरूरी होता है?

बच्चों को किस उम्र तक साथ सुलाना चाहिए?

बच्चों को एक उम्र तक सुरक्षा प्रदान करना माता-पिता के लिए जरूरी होता है। ऐसे में बच्चा जब छोटा होता है, तो उनके साथ सोना सही है क्योंकि बेड पर वे अकेले सोएंगे, तो गिर सकते हैं या फिर किसी तरह की आकस्मिक चोट लग सकती है। इसके अलावा कम उम्र में बच्चों की नींद खुल जाती है, तो वे डर जाते हैं। ऐसे में उनके साथ सोना जरूरी होता है। लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगता है, वैसे-वैसे उन्हें अलग सुलाने का प्रयास करना चाहिए।

कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो बच्चे को 7 साल की उम्र के बाद से अलग सुलाना चाहिए। इस उम्र के बाद कोशिश करनी चाहिए कि आपका बच्चा स्वयं पर निर्भर हो सके। वहीं, कोशिश करनी चाहिए कि आप बच्चों को 18 माह से 3 साल की उम्र के बीच बेड अलग कर दें। ताकि उन्हें धीरे-धीरे अलग सोने की आदत खुद व खुद हो जाए।

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बच्चों को कैसे सुलाएं अलग?

अकेले सोने पर न कराए मजबूर

बच्चे को अलग सुलाना जरूरी होता है, लेकिन उन्हें अलग सुलाने पर मजबूर न करें। उन्हें अलग सुलाने का धीरे-धीरे प्रयास करें, जैसे शुरु में उन्हें सप्ताह में 1 से 2 दिन अलग सुलाएं। इसी तरह धीरे-धीरे अलग सुलाने का दिन बढ़ाएं। इससे बच्चा अपने आप अलग सोने की आदत को अपने अंदर डाल लेगा।

कुछ देर उनके साथ रहें

बच्चे को अलग सुलाना जरूरी होता है, लेकिन उन्हें कमरे में अकेले न भेजें। कोशिश करें कि सुलाने से कुछ देर पहले तक उनके साथ रहें। इस दौरान उन्हें नाइट ड्रेस पहनाएं, उन्हें गुड नाइट बोलें या फिर उन्हें नाइट स्टोरी सुनाएं। इससे बच्चा काफी आराम से सो जाएगा।

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रोने पर सुलाए साथ

कभी-कभार बच्चा बीच में जग जाता है, जिसकी वजह से वे खुद को अकेले पाकर रोना शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में आप उनके साथ रहें या फिर उन्हें अपने कमरे में साथ ले जाकर सुलाएं।