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Written By: Yogita Yadav | Published : June 18, 2018 6:51 PM IST
गर्मियों की छुटि़टयां अभी जारी हैं। कुछ बच्चों ने समर क्लासेज ज्वाइन की हैं तो कुछ बच्चें आउटडोर एक्टिविटीज में मस्ती कर रहे हैं। इन दिनों का बेहतर लाभ बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने में भी लिया जा सकता है। रीडिंग हेबिट में शामिल की जा सकती हैं कुछ परी कथाएं, जो मनोरंजक अंदाज में ही आपके बच्चों को करवाएंगी सही और गलत की पहचान। अब तो परी कथाओं को सबसे रिच स्टडी मैथड में शामिल किया जा रहा है।
स्मृतियों का संसार हैं
विक्रम की पीठ पर लदा बेताल राजा विक्रम को एक कहानी सुनाता है और हर बार अंत में उससे एक प्रश्न पूछता है। बच्चें भी अपनी-अपनी समझ अनुसार इस सवाल का जवाब देते हैं और सीखते हैं कि इस परिस्थिति में बेहतर निर्णय क्या हो सकता है। कहीं इच्छाएं पूरी करने वाली सात परियां, तो कहीं सौतेली मां के अन्याय झेलती सिंडरेला, परी कथाओं में स्मृतियों का खजाना है। इसी संसार से गुजरते हुए हम सब बड़े हुए हैं। अब तो शोध में भी यह दावा किया जा रहा है कि बचपन की सुखद स्मृतियों में एक बड़ा संसार परी कथाओं का भी है।
सांस्कृतिक समझ बढ़ाती हैं
परी कथाएं अपने सांस्कृतिक परिवेश की संपूर्ण जानकारी समेटे होती हैं। राजस्थान में सुनी-सुनाई जाने वाली परी कथाओं में अकसर परियों का डेरा किसी बावड़ी में होता है, तो वहीं पहाड़ी इलाकों में सुनाई जाने वाली परी कथाओं के नायक, नायिकाएं पहाड़ों और झरनों के आसपास रहते हैं। तेज घोड़े पर दौड़ना, चमड़े के जूते बनाना और नदी पार करना, ये वे क्रियाएं हैं जो अमुक परिवेश की सांस्कृतिक पहचान बच्चों को करवाती हैं।
करवाती हैं सही गलत की पहचान
परी कथाओं में अकसर नायक और खलनायक होते हैं। वे सभी गुण जो मानवता को बचाते हैं वे नायक में आरोपित किए जाते हैं, जबकि वे सभी अवगुण जिनसे बचना चाहिए, वे सभी खलनायकों में मौजूद रहते हैं। इन्हें सुनते हुए, इनके बारे में जानते हुए कभी बच्चे डरते हैं तो कभी खुश हो जाते हैं। उनके मन में आने वाले ये भाव उन्हें भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।
कल्पना शक्ति बढ़ाती हैं
सात घोड़ों पर सवार होकर राजकुमार कहां जाएगा, सिंडरेला का शूज उसे वापस कैसे मिलेगा या फिर जिन्न की कैद से राजकुमारी कैसे बाहर आएगी, इन स्थितियों की कल्पना बच्चों की कल्पनाशक्ति मजबूत करती है। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में लॉरा एफ क्रीडी द्वारा परीकथाओं पर किए गए अध्ययन में यह साबित हुआ है कि परी कथाओं के माध्यम से विकसित हुई कल्पनाशक्ति बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करती है।
शब्द भंडार में होती है बढ़ोतरी
शेमरॉक प्ले स्कूल के निदेशक डॉ सुधीर महाजन कहते हैं , परी कथाओं को त्वरित लाभ यह होता है कि बच्चों के शब्द भंडार में बढ़ोतरी होती है। जो किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा इतने मनोरंजक तरीके से नहीं हो सकती। कथाओं में प्रयुक्त होने वाले शब्द बच्चें उनके व्यवहार से बेहतर तरीके से समझ लेते हैं। इसलिए शब्द ज्ञान बढ़ाने के लिए अकसर बच्चों को प्ले स्कूल में परी कथाएं सुनाने की सलाह दी जाती है।
बुराई से बचाती हैं
नोएडा के अपोलो अस्पताल में मनोवैज्ञानिक डॉ मनीषा सिंघल कहती हैं, एक समय ऐसा लगता था कि हम बच्चों को क्या यह फिजूल की कथाएं सुना रहे हैं। लेकिन अब विभिन्न शोधों में यह सामने आया है कि परीकथाएं बच्चों की सोच पर पॉजीटिव इफैक्ट डालती हैं। वे बातें जो हम उन्हें सीधे तौर पर नहीं समझा सकते, उन्हें समझाने का काम परी कथाएं करती हैं। परीकथाएं तो अब विश्व के सबसे समृद़ध स्टडी मैथड में शुमार की जा रहीं हैं। अकसर नायक सबकी मदद करता है, जबकि इन कथाओं के नेगेटिव कैरेक्टर दूसरों का सामान छीनते हैं, उन्हें तंग करते हैं। इस तरह हम बच्चों को कथाओं के माध्यम से ही यह भी सिखा देते हैं कि मदद करना अच्छा गुण है और तंग करना बुरी बात।
चित्रस्रोत: Shutterstock.