टीचर्स बदल सकते हैं बच्‍चों का भविष्‍य

बदलते समय में बदल रही हैं अपेक्षाएं, टीचर्स के हाथ है बड़ी जिम्‍मेेेेदारी।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 4, 2018 7:04 PM IST

इन दिनों बदलते लाइफ स्‍टाइल के कारण हर रोज नई समस्‍याएं देखने में आ रही हैं। वे बीमारियां जो बढ़ती उम्र में हुआ करती थीं वे अब युवाओं में ही नहीं बच्‍चों में भी दिखाई देने लगी हैं। यह अपेक्षाओं के बढ़ते दबाव और अकेलेपन के कारण हो रहीं हैं। बदले हुए समय में जब सभी व्‍यस्‍त हो रहे हैं तब टीचर्स के हाथ में बच्‍चों के वर्तमान को संभालना और भविष्‍य को दिशा देना।

बढ़ रहा है स्‍कूलों का समय :

पहले जहां बच्‍चे सिर्फ पढ़ने के लिए स्‍कूल जाया करते थे वहीं अब स्‍कूलों का समय बढ़ रहा है। बच्‍चे बैठना सीखने के लिए भी प्‍ले स्‍कूल में डाल दिए जाते हैं। ऐसे में टीचर्स ही उनकी असल मेंटोर होते हैं। वे जैसे चाहें बच्‍चों को दिशा दे सकते हैं।

सिखा सकते हैं व्‍यवहार :

न्‍यूक्लियर फैमिली कल्‍चर और मां बाप के व्‍यस्‍त होने के कारण बच्‍चों को नैतिक शिक्षा देने का समय किसी के पास नहीं हैं। इस जिम्‍मेदारी को टीचर्स बखूबी निभा सकते हैं।

बन सकते हैं सुरक्षा कवच :

बच्‍चों के साथ बढ़ते यौन शोषण के मामलों में टीचर्स सुरक्षा कवच बन सकते हैं। अब सभी स्‍कूलों में गुड और बैड टच की समझ सिखाई जा रही है। यह जिम्‍मेदारी टीचर्स पर है कि वे कैसे और कितनी समझ बच्‍चों को देते हैं। बड़े कानूनों और सजाओं से ज्‍यादा यहां सुरक्षात्‍मक कवच टीचर्स बन सकते हैं।

बन सकती हैं दोस्‍त :

स्‍कूलों में ज्‍यादातर फीमेल स्‍टाफ होता है और आजकल लड़कियों में अर्ली प्‍यूबर्टी देखने में आ रही हैं। इस स्थ्‍िाति में क्‍लास टीचर उनकी दोस्‍त बन उन्‍हें उम्र के बदलावों के बारे में बताकर गाइड कर सकती है।

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