6 महीने बाद बच्चे की डाइट में जरूर जोड़ें ये 3 सुपरफूड, पीडियाट्रिशियन ने बताया क्यों हैं खास

6 महीने के बाद जब बच्चों को सॉलिड फूड खिलाया जाता है, तब उनकी डाइट में कुछ खास सुपरफूड्स को शामिल किया जाए तो इससे उनका दिमागी विकास तेज होता है। आज हम आपको ऐसे ही 3 सुपरफूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : August 12, 2026 9:31 AM IST

बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती कुछ महीने उसके विकास के लिहाज से बेहद अहम होते हैं। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है और डॉक्टर भी मानते हैं जन्म के बाद शुरुआत के 1,000 दिन बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की नींद को तैयार करते हैं। इस दौरान मां का दूध बच्चे के लिए सबसे जरूरी पोषण का सोर्स होता है। लेकिन जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है, तो धीरे-धीरे उसे ऊपर से खाना यानी कम्प्लीमेंट्री फीडिंग शुरू कराई जाती है। ऐसे में पेरेंट्स अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि बच्चे को क्या खिलाएं, जिससे उसे जरूरी पोषक तत्व मिल सकें और उसका दिमाग भी अच्छी तरह विकसित हो। अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत महंगे या पैकेट वाले फूड्स की जरूरत नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा का कहना है कि भारतीय किचन में मौजूद 3 चीजों को खिलाने से बच्चे का दिमागी विकास तेज हो सकता है। तो आइए जानते हैं उन फूड्स के बारे में-

बच्चों को अखरोट पीसकर देना चाहिए।

1. अखरोट

बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों के दिमागी को बेहतर बनाने के लिए अखरोट एक सुपरफूड है। अखरोट में प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैट और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। 6 महीने के बाद बच्चों को रोजाना अखरोट देने से दिमागी विकास बेहतर बनता है। हालांकि, छोटे बच्चे को पूरा अखरोट देना सही नहीं है, क्योंकि इससे गले में फंसने का खतरा हो सकता है। इसलिए अखरोट को अच्छी तरह पीसकर बारीक पाउडर बनाकर ही बच्चों को देना चाहिए। बच्चा अगर सिर्फ अखरोट का पेस्ट नहीं खाता है तो आप इसे खिचड़ी, दलिया, दही या फलों में इसे मिलाकर दे सकते हैं। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में डॉ. अनुराधा बताती हैं कि बच्चों को अखरोट का पेस्ट शुरुआत हमेशा कम मात्रा से करें और देखें कि बच्चा इसे आसानी से पचा पा रहा है या नहीं।

बच्चों के लिए अंडा सुपरफूड है।

2. अंडा

6 महीने की उम्र के बाद बच्चों की डाइट में अंडा जरूर शामिल करना चाहिए। अंडा एक सुपरफूड है, जिसमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि अंडे में प्रोटीन के साथ कोलीन नाम का पोषक तत्व भी पाया जाता है। कोलीन शरीर और दिमाग के विकास में अहम भूमिका निभाता है। 6 महीने के बाद बच्चे को अच्छी तरह पका हुआ अंडा मैश करके दिया जा सकता है। शुरुआत में थोड़ी मात्रा से शुरू करना बेहतर रहता है। ध्यान रखें कि अंडा अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए। बच्चे को कच्चा या अधपका अंडा बिल्कुल नहीं देना चाहिए।

3. राजगिरा

राजगिरा एक सुपरफूड है। पारंपरिक तौर पर आज भी देश के ग्रामीण इलाकों में राजगिरा रोजाना खाया जाता है। राजगिरा में प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। राजगिरा को अच्छी तरह पकाकर नरम किया जा सकता है और फिर मैश की हुई सब्जियों के साथ मिलाकर बच्चे को खिलाया जा सकता है। इस तरह बच्चे को एक ही मील में अलग-अलग पोषक तत्व मिल जाते हैं।

खाने के साथ मां का दूध भी है जरूरी

डॉक्टर कहती हैं कि 6 महीने के बाद ऊपर का खाना शुरू करने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को स्तनपान बंद कर देना चाहिए। कम्प्लीमेंट्री फीडिंग के साथ स्तनपान जारी रखना बच्चे के पोषण के लिए फायदेमंद रहता है। शुरुआत में बच्चा बहुत कम मात्रा में खाना खा सकता है। यह बिल्कुल सामान्य है। इस उम्र में खाना केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि नए स्वाद, बनावट और खाने की आदत विकसित करने के लिए है।

डॉक्टर का कहना है कि बच्चे का दिमाग किसी एक सुपरफूड से अचानक तेज नहीं होता। बच्चे के शरीर के सही विकास के लिए खानपान के साथ- साथ सही नींद, व्यवहार, बातचीत और माता- पिता का प्यार जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। 6 महीने के बच्चे को कोई भी नई चीज देने से पहले उसकी उम्र, एलर्जी के बारे में डॉक्टर से बात जरूर करें। ध्यान दें कि बच्चे को कोई चीज खाने के बाद एलर्जी, शरीर पर दाने, बुखार या कोई अन्य परेशानी हो रही है, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें और बच्चे का एलर्जी टेस्ट जरूर करवाएं।